ममता बनर्जी का रामलीला मैदान से BJP पर हमला: 'जो काफिर हैं, वे हर रोज डरते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया ब्लॉक की 'देश बचाओ महारैली' में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में देशभर के प्रमुख विपक्षी दलों के नेता एक मंच पर एकजुट हुए।
ममता का मुख्य संबोधन
रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, 'वे हमें कहते हैं कि घर से मत निकलो, उन्होंने हमें हाउस अरेस्ट किया। मैं कहती हूं कि जो लड़ते हैं, वह जिंदगी कमाते हैं। जो डरते हैं, वो मरते हैं। जो काफिर हैं, वे हर रोज डरते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय का नारा होगा — 'सेव इंडिया, सेव डेमोक्रेसी।' उनके अनुसार, सभी विपक्षी दलों को मिलकर BJP के खिलाफ लड़ना चाहिए।
एसआईआर और बंगाल पर आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल एसआईआर (SIR) का पीड़ित राज्य रहा है। उन्होंने कहा, 'हम छोड़ेंगे नहीं। हम जान दे देंगे, हम लड़ेंगे। हमारे बंगाल में लूट हुई, लेकिन अब दिल्ली में लूट नहीं होने देंगे।' उन्होंने दावा किया कि BJP के लिए एसआईआर का अर्थ 'स्पेशल इंटेंसिव रिलीफ' है।
चुनाव आयोग और ईवीएम पर निशाना
चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए ममता ने कहा, 'सरकार ने ईवीएम, लोकतंत्र, संविधान और लोगों के अधिकारों की लूट की है।' उन्होंने चुनाव आयोग के पूर्व अधिकारी ज्ञानेश कुमार पर विशेष निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने बंगाल में एक प्रतिशत वोट को हटाया। उन्होंने कहा कि वे चुनावी हार स्वीकार नहीं करतीं बल्कि उन्हें 'हराया गया' है और इसका बदला राजनीतिक रूप से लिया जाएगा।
BJP पर तंज और कविता
ममता बनर्जी ने BJP के नारे पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'वे कहते थे — सबका साथ सबका विकास, लेकिन अब उनका नारा हो गया है — भाजपा का साथ और सबका विनाश।' उन्होंने मंदिर में लूट, रामजन्म भूमि के चढ़ावे में अनियमितता और वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग के भी आरोप लगाए। अपने भाषण के दौरान उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर तंज कसते हुए 'ज्ञानेश-ज्ञानेश यस पापा...' कविता भी गाई।
युवाओं से आह्वान
रैली के समापन में ममता बनर्जी ने देश के युवाओं और जेन-जी वर्ग से एकजुट होकर लोकतंत्र बचाने की अपील की। यह रैली ऐसे समय में आई है जब इंडिया ब्लॉक अपनी संगठनात्मक एकता को पुनः स्थापित करने की कोशिश कर रहा है और 2027 के कई राज्य चुनावों से पहले विपक्षी मोर्चाबंदी को धार देने का प्रयास हो रहा है।