पंचकूला स्कूल हमले की पीड़ित बच्ची से मिले PGIMER निदेशक, पूरा इलाज होगा मुफ्त
सारांश
मुख्य बातें
पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ के निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने 1 नवंबर 2026 को उस छह वर्षीय बच्ची से मुलाकात की जो 28 अक्टूबर को पंचकूला के एक स्कूल में कथित तौर पर हमले का शिकार होने के बाद संस्थान में भर्ती है। अपने दौरे के दौरान प्रोफेसर लाल ने आदेश दिया कि बच्ची का पूरा इलाज निःशुल्क किया जाए और इसका समस्त खर्च संस्थान वहन करेगा।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
28 अक्टूबर 2026 को पंचकूला के एक स्कूल में क्लासरूम के भीतर आठ साल के एक लड़के द्वारा कथित तौर पर हमला किए जाने के बाद छह साल की यह बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी। प्रारंभिक उपचार के बाद उसे बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए चंडीगढ़ स्थित PGIMER रेफर किया गया। यह घटना स्कूल परिसरों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
निदेशक का दौरा और निर्देश
प्रोफेसर विवेक लाल ने अपनी मुलाकात के दौरान बच्ची का इलाज कर रहे चिकित्सकों से सीधे बातचीत की और उसकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, मेडिकल प्रगति तथा सुधार की संभावनाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए परिवार को आश्वस्त किया कि संस्थान हरसंभव सहयोग करेगा।
निदेशक ने स्पष्ट रूप से कहा कि PGIMER की जिम्मेदारी केवल चिकित्सा उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि विपत्ति के समय में मरीजों और उनके परिवारों के साथ खड़े रहना भी संस्थान का दायित्व है।
मुफ्त इलाज और विशेष सुविधाएँ
एक महत्वपूर्ण मानवीय पहल के तहत PGIMER ने बच्ची को एक निजी कमरा भी उपलब्ध कराया है, ताकि अस्पताल में प्रवास के दौरान उसे पर्याप्त आराम, गोपनीयता और उचित देखभाल मिल सके। अधिकारियों के अनुसार, निदेशक स्वयं बच्ची के इलाज और देखभाल की निगरानी करेंगे।
इलाज कर रहे विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बच्ची की स्थिति पर निरंतर नजर रख रही है और उसे आवश्यक मेडिकल सहायता प्रदान की जा रही है।
परिवार को आश्वासन
निदेशक के दौरे के पश्चात PGIMER ने बच्ची के परिवार को भरोसा दिलाया है कि पूरे उपचार अवधि के दौरान उन्हें चिकित्सीय और अन्य सभी आवश्यक सहायता मिलती रहेगी। प्रोफेसर लाल ने दोहराया कि संस्थान इस बच्ची और उसके परिवार को सर्वोत्तम देखभाल देने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चाएँ तेज हैं। आने वाले दिनों में बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार और घटना की जाँच की दिशा में उठाए गए कदम महत्वपूर्ण होंगे।