16 जुलाई 2026
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अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने 669 हीमोफीलिया मरीजों को ₹17 करोड़ का मुफ्त इलाज दिया

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अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने 669 हीमोफीलिया मरीजों को ₹17 करोड़ का मुफ्त इलाज दिया

सारांश

अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने एक ही वर्ष में 669 हीमोफीलिया मरीजों को ₹17 करोड़ से अधिक के इंजेक्शन मुफ्त दिए — एक ऐसी बीमारी जिसका इलाज अधिकांश परिवारों की पहुँच से बाहर है। GMERSCL की थोक खरीद प्रणाली ने यह संभव किया और गुजरात के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी यही सुविधा जारी है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने वर्ष 2025-26 में 669 हीमोफीलिया मरीजों को ₹17 करोड़ से अधिक मूल्य के क्लॉटिंग फैक्टर इंजेक्शन निःशुल्क उपलब्ध कराए।
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने इसे मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की संवेदनशील स्वास्थ्य नीति का उदाहरण बताया।
महंगे इंजेक्शनों की खरीद जीएमईआरएससीएल (गुजरात मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के माध्यम से बड़े पैमाने पर की गई।
यह सुविधा अहमदाबाद तक सीमित नहीं — गुजरात के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में भी जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क उपचार मिल रहा है।
हीमोफीलिया में क्लॉटिंग फैक्टर 7, 8 या 9 की कमी होती है; समय पर इंजेक्शन न मिलने पर मामूली चोट भी जानलेवा बन सकती है।

अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने वर्ष 2025-26 में हीमोफीलिया से पीड़ित 669 मरीजों को ₹17 करोड़ से अधिक मूल्य के क्लॉटिंग फैक्टर इंजेक्शन पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराए। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने इस पहल को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया, जो जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने पर केंद्रित है।

मुख्य घटनाक्रम

स्वास्थ्य मंत्री पंशेरिया ने बताया कि सरकार ने जीएमईआरएससीएल (गुजरात मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के माध्यम से इन महंगे इंजेक्शनों की बड़े पैमाने पर थोक खरीद की, जिससे प्रति मरीज लागत में उल्लेखनीय कमी आई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुविधा केवल अहमदाबाद सिविल अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि गुजरात के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में भी जरूरतमंद मरीजों को यही लाभ मिल रहा है।

हीमोफीलिया: बीमारी और इलाज

हीमोफीलिया एक दुर्लभ आनुवंशिक रक्तस्राव विकार है, जो शरीर में क्लॉटिंग फैक्टर 7, 8 या 9 की कमी के कारण होता है। ये प्रोटीन रक्त को जमाने के लिए अनिवार्य हैं। इनकी अनुपस्थिति में मामूली चोट पर भी अनियंत्रित रक्तस्राव हो सकता है या शरीर के भीतर स्वतः रक्तस्राव की स्थिति बन सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।

डॉ. जोशी ने बताया कि उपचार में मरीज के शरीर में जिस विशेष क्लॉटिंग फैक्टर की कमी होती है, उसी प्रोटीन को इंजेक्शन के ज़रिए प्रत्यक्ष रूप से दिया जाता है। यह प्रक्रिया रक्तस्राव को शीघ्र नियंत्रित करने और मरीज की जान बचाने में अत्यंत प्रभावी है।

आम जनता पर असर

स्वास्थ्य मंत्री ने रेखांकित किया कि हीमोफीलिया के इलाज में उपयोग होने वाले क्लॉटिंग फैक्टर इंजेक्शन बाज़ार में बेहद महंगे हैं और अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इन्हें अपने खर्च पर खरीदने में असमर्थ होते हैं। सरकारी हस्तक्षेप से इन परिवारों पर वित्तीय बोझ पूरी तरह समाप्त हो गया है। डॉ. जोशी के अनुसार, इस विशेष कार्यक्रम ने वर्षभर निरंतर और उन्नत उपचार सुनिश्चित कर सैकड़ों मरीजों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।

सरकार की प्रतिक्रिया

पंशेरिया ने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को महंगे उपचार के बोझ से राहत देने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए हैं। यह पहल मुख्यमंत्री पटेल की उस व्यापक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा है, जो दुर्लभ और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को विशेष सहायता प्रदान करती है।

क्या होगा आगे

गुजरात सरकार के अनुसार, यह कार्यक्रम आगामी वर्षों में भी जारी रहेगा और राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में हीमोफीलिया मरीजों को निःशुल्क उपचार की यह सुविधा बरकरार रखी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की केंद्रीकृत थोक खरीद प्रणाली अन्य दुर्लभ बीमारियों के इलाज में भी अपनाई जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हीमोफीलिया जैसी दुर्लभ बीमारी के संदर्भ में यह उन 669 परिवारों के लिए जीवन और मृत्यु का फर्क है जो बाज़ार भाव पर ये इंजेक्शन कभी नहीं खरीद सकते थे। असली सवाल यह है कि क्या GMERSCL की यह थोक खरीद प्रणाली अन्य दुर्लभ बीमारियों — जैसे थैलेसीमिया या सिकल सेल एनीमिया — तक विस्तारित होगी, जहाँ लाखों मरीज अभी भी महंगे इलाज के बोझ तले दबे हैं। गुजरात का यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय हो सकता है, बशर्ते आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जाए।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद सिविल अस्पताल का हीमोफीलिया मुफ्त इलाज कार्यक्रम क्या है?
यह गुजरात सरकार की एक विशेष स्वास्थ्य पहल है, जिसके तहत अहमदाबाद सिविल अस्पताल में वर्ष 2025-26 में 669 हीमोफीलिया मरीजों को ₹17 करोड़ से अधिक मूल्य के क्लॉटिंग फैक्टर इंजेक्शन पूरी तरह निःशुल्क दिए गए। यह सुविधा GMERSCL के माध्यम से बड़े पैमाने पर थोक खरीद से संभव हुई।
हीमोफीलिया क्या है और यह इतनी गंभीर बीमारी क्यों है?
हीमोफीलिया एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है जिसमें शरीर में क्लॉटिंग फैक्टर 7, 8 या 9 की कमी होती है, जिससे रक्त सामान्य रूप से नहीं जम पाता। मामूली चोट पर भी लंबे समय तक रक्तस्राव या शरीर के भीतर स्वतः रक्तस्राव हो सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
क्या यह मुफ्त इलाज केवल अहमदाबाद में उपलब्ध है?
नहीं, स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया के अनुसार यह सुविधा अहमदाबाद सिविल अस्पताल तक सीमित नहीं है। गुजरात के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में भी जरूरतमंद हीमोफीलिया मरीजों को क्लॉटिंग फैक्टर इंजेक्शन निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
GMERSCL की भूमिका इस योजना में क्या है?
गुजरात मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GMERSCL) ने इन महंगे क्लॉटिंग फैक्टर इंजेक्शनों की बड़े पैमाने पर थोक खरीद की है। इस केंद्रीकृत खरीद प्रणाली से प्रति इंजेक्शन लागत में कमी आई और सरकार के लिए इन्हें मुफ्त वितरित करना संभव हुआ।
इस कार्यक्रम से किन परिवारों को सबसे अधिक फायदा हुआ है?
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों को मिला है, जो बाज़ार में उपलब्ध महंगे क्लॉटिंग फैक्टर इंजेक्शन स्वयं खरीदने में असमर्थ थे। सरकारी सहायता से इन परिवारों पर इलाज का वित्तीय बोझ पूरी तरह समाप्त हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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