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CCHFW की 16वीं बैठक में गुजरात के मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने उठाए एम्स राजकोट, AMR और मिलावट के अहम मुद्दे

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CCHFW की 16वीं बैठक में गुजरात के मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने उठाए एम्स राजकोट, AMR और मिलावट के अहम मुद्दे

सारांश

केंद्रीय स्वास्थ्य परिषद की 16वीं बैठक में गुजरात ने तीन बड़े मुद्दे उठाए — एम्स राजकोट में ऑर्गन ट्रांसप्लांट सुविधा, खाद्य मिलावट पर कड़ा कानून और AMR के खिलाफ राष्ट्रीय नीति। पश्चिमी गुजरात के हज़ारों मरीजों की पहुँच और जनस्वास्थ्य सुरक्षा इन माँगों के केंद्र में है।

मुख्य बातें

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने 30 जून 2026 को नई दिल्ली में CCHFW की 16वीं बैठक में गुजरात का प्रतिनिधित्व किया।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने की; आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत नए डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म और 'एनीमिया मुक्त भारत' दिशानिर्देश लॉन्च हुए।
पानशेरिया ने एम्स, राजकोट में पूर्ण ऑर्गन ट्रांसप्लांट सुविधा की माँग की, जिससे सौराष्ट्र और कच्छ के हज़ारों मरीजों को लाभ मिलेगा।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 में संशोधन कर मिलावट पर कड़े कानूनी प्रावधान लागू करने का सुझाव दिया।
एंटीबायोटिक के अनियंत्रित उपयोग से उत्पन्न AMR समस्या पर राष्ट्रीय नीति बनाने और सख्ती से लागू करने की अपील की।

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने 30 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में आयोजित स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण केंद्रीय परिषद (CCHFW) की 16वीं बैठक में गुजरात का प्रतिनिधित्व किया। बैठक में उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए कई ठोस सिफारिशें केंद्र सरकार के सामने रखीं।

बैठक में लॉन्च हुईं नई डिजिटल स्वास्थ्य पहलें

इस बैठक में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत कई डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए, जिनका उद्देश्य देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को गति देना है। साथ ही 'एनीमिया मुक्त भारत' अभियान के संचालन संबंधी दिशानिर्देश भी जारी किए गए। बैठक में इन पहलों को कुपोषण उन्मूलन और स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

एम्स राजकोट में ऑर्गन ट्रांसप्लांट सुविधा की माँग

पानशेरिया ने सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र के मरीजों की जरूरतों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से एम्स, राजकोट में पूर्ण अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) सुविधा विकसित करने की माँग की। उनका तर्क था कि इस सुविधा के अभाव में पश्चिमी गुजरात के हज़ारों मरीजों को उन्नत इलाज के लिए दूरदराज़ के केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय पर उपचार बाधित होता है।

खाद्य मिलावट पर सख्त कानून की अपील

खाद्य पदार्थों और दवाओं में मिलावट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए पानशेरिया ने केंद्र सरकार से खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 में संशोधन कर कड़े कानूनी प्रावधान लागू करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना अनिवार्य है, ताकि मिलावट के अपराधों पर वास्तविक रोक लगाई जा सके।

एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस पर नीतिगत कदम की ज़रूरत

स्वास्थ्य मंत्री ने एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित उपयोग से उत्पन्न एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने सुझाया कि देशभर में एंटीबायोटिक दवाओं के जिम्मेदार और नियंत्रित उपयोग के लिए एक प्रभावी राष्ट्रीय नीति तैयार कर उसे सख्ती से लागू किया जाए। गौरतलब है कि AMR को वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञ आने वाले दशकों की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक मानते हैं।

गुजरात-केंद्र समन्वय पर जोर

पानशेरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के स्वास्थ्य ढाँचे को और मजबूत बनाने के लिए गुजरात सरकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करती रहेगी। आगामी बैठकों में इन सुझावों पर केंद्र की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी प्रिस्क्रिप्शन नियंत्रण कमज़ोर बना हुआ है। असली परीक्षा यह है कि ये सुझाव बैठक की कार्यवाही से आगे बढ़कर नीतिगत कार्रवाई में तब्दील होते हैं या नहीं।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CCHFW की 16वीं बैठक में क्या हुआ?
30 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में CCHFW की 16वीं बैठक हुई, जिसमें आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत नए डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म और 'एनीमिया मुक्त भारत' के दिशानिर्देश लॉन्च किए गए। गुजरात सहित विभिन्न राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों ने अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
प्रफुल पानशेरिया ने एम्स राजकोट के बारे में क्या माँग की?
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने एम्स, राजकोट में पूर्ण ऑर्गन ट्रांसप्लांट सुविधा विकसित करने की माँग की, ताकि सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र के मरीजों को उन्नत अंग प्रत्यारोपण सेवाएँ समय पर मिल सकें। फिलहाल इस क्षेत्र के मरीजों को इलाज के लिए दूरदराज़ के केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है।
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) क्या है और इस पर गुजरात ने क्या सुझाव दिया?
AMR वह स्थिति है जब बैक्टीरिया, वायरस या अन्य सूक्ष्मजीव एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, जिससे इलाज कठिन हो जाता है। पानशेरिया ने सुझाया कि देशभर में एंटीबायोटिक के जिम्मेदार और नियंत्रित उपयोग के लिए एक प्रभावी राष्ट्रीय नीति बनाई जाए और उसे सख्ती से लागू किया जाए।
खाद्य मिलावट पर गुजरात ने केंद्र से क्या अपील की?
पानशेरिया ने केंद्र सरकार से खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 में संशोधन कर कड़े कानूनी प्रावधान लागू करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि मिलावट के अपराधों पर प्रभावी रोक के लिए दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।
'एनीमिया मुक्त भारत' अभियान क्या है?
'एनीमिया मुक्त भारत' केंद्र सरकार का एक अभियान है जिसका लक्ष्य देश में एनीमिया (खून की कमी) की दर को कम करना है। CCHFW की 16वीं बैठक में इस अभियान के संचालन संबंधी नए दिशानिर्देश जारी किए गए, जिन्हें कुपोषण उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
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