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कैंसर-मधुमेह से लड़ाई: डॉ. जितेंद्र सिंह ने माँगा राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन, अस्पतालों से आगे जाने की ज़रूरत

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कैंसर-मधुमेह से लड़ाई: डॉ. जितेंद्र सिंह ने माँगा राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन, अस्पतालों से आगे जाने की ज़रूरत

सारांश

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कैंसर और मधुमेह जैसे गैर-संक्रामक रोगों से लड़ने के लिए अस्पतालों से परे एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन की माँग की। उन्होंने स्वास्थ्य गलत सूचनाओं और युवाओं में बढ़ते जीवनशैली रोगों को गंभीर चेतावनी बताया।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 19 जुलाई 2026 को कैंसर, मधुमेह, मोटापा और गैर-संक्रामक रोगों के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का आह्वान किया।
मंत्री ने कहा कि भारत की स्वास्थ्य रणनीति अस्पतालों से आगे बढ़कर रोकथाम और शीघ्र निदान पर केंद्रित होनी चाहिए।
स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं को उन्होंने 'विकसित भारत' के लक्ष्य की राह में बड़ी बाधा बताया।
कैंसर, फैटी लिवर और चयापचय विकार अब युवा आयु वर्ग को तेज़ी से प्रभावित कर रहे हैं।
निवारक स्वास्थ्य देखभाल — संतुलित पोषण, नियमित व्यायाम, समय-समय पर जाँच — को राष्ट्रीय आदत बनाने पर ज़ोर दिया गया।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 19 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में कैंसर, मधुमेह, मोटापा और अन्य गैर-संक्रामक रोगों के विरुद्ध एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवनशैली से जुड़े रोगों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए भारत की रणनीति केवल अस्पताल-केंद्रित नहीं रह सकती — इसे रोकथाम, शीघ्र निदान और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा पर टिके एक व्यापक सामाजिक अभियान में बदलना होगा।

किस अवसर पर आया यह बयान

मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अखिलेश गुप्ता की पुस्तक 'Unbroken: My Battle with Cancer and the Will to Lead' के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। यह पुस्तक कैंसर से व्यक्तिगत संघर्ष और नेतृत्व की इच्छाशक्ति का विवरण प्रस्तुत करती है।

स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाएँ एक बड़ी चुनौती

डॉ. सिंह ने रेखांकित किया कि भारत इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है — एक ओर गैर-संक्रामक रोगों का बढ़ता बोझ, दूसरी ओर स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं का तेज़ी से फैलाव। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए वैज्ञानिक संचार और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा सलाह पहले से कहीं अधिक अनिवार्य हो गई है।

युवा पीढ़ी पर बढ़ता खतरा

मंत्री ने चिंता जताई कि कैंसर, मधुमेह, मोटापा, फैटी लिवर रोग और अन्य चयापचय संबंधी विकार अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं — ये युवा आयु वर्ग को तेज़ी से अपनी चपेट में ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई कैंसरों का यदि समय पर पता चल जाए, तो उनका उपचार या नियंत्रण संभव है, इसलिए नियमित जाँच और त्वरित चिकित्सा हस्तक्षेप जीवित रहने की दर सुधारने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

निवारक स्वास्थ्य को राष्ट्रीय आदत बनाने की पुकार

बढ़ते मोटापे और अस्वस्थ जीवनशैली पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल को व्यक्तिगत पसंद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आदत बनाना होगा। उनके अनुसार, संतुलित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर स्वास्थ्य जाँच को रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा बनाए बिना जीवनशैली रोगों के बोझ को कम करना संभव नहीं होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में गैर-संक्रामक रोगों की हिस्सेदारी कुल रोग-बोझ में लगातार बढ़ रही है और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ जन-जागरूकता की कमी को एक प्रमुख बाधा मान रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि इसे नीतिगत ढाँचे में कैसे उतारा जाएगा — क्योंकि भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान अक्सर जागरूकता के स्तर पर रुक जाते हैं और क्रियान्वयन तक नहीं पहुँचते। गौरतलब है कि गैर-संक्रामक रोग पहले से ही भारत के कुल रोग-बोझ का आधे से अधिक हिस्सा बन चुके हैं, फिर भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्क्रीनिंग सुविधाएँ अत्यंत असमान हैं। स्वास्थ्य गलत सूचनाओं पर चिंता तब और प्रासंगिक हो जाती है जब सोशल मीडिया पर अप्रमाणित उपचारों का प्रचार तेज़ी से बढ़ रहा है। असली कसौटी यह होगी कि क्या यह आह्वान बजट आवंटन, ज़िला-स्तरीय स्क्रीनिंग लक्ष्यों और मापनीय स्वास्थ्य परिणामों में तब्दील होता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कैंसर और मधुमेह के खिलाफ जन आंदोलन की माँग क्यों की?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जीवनशैली से जुड़े गैर-संक्रामक रोगों का बोझ इतना बड़ा हो चुका है कि केवल अस्पताल-आधारित देखभाल पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार रोकथाम, शीघ्र निदान और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा पर केंद्रित एक व्यापक सामाजिक अभियान ज़रूरी है।
यह बयान किस अवसर पर दिया गया?
यह बयान 19 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अखिलेश गुप्ता की पुस्तक 'Unbroken: My Battle with Cancer and the Will to Lead' के विमोचन समारोह में दिया गया।
गैर-संक्रामक रोग भारत में किन आयु वर्गों को प्रभावित कर रहे हैं?
डॉ. सिंह ने बताया कि कैंसर, मधुमेह, मोटापा, फैटी लिवर और चयापचय संबंधी विकार अब युवा आयु वर्ग को तेज़ी से प्रभावित कर रहे हैं, जो पहले मुख्यतः बुजुर्गों की समस्या मानी जाती थीं।
निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर मंत्री ने क्या सुझाव दिए?
मंत्री ने संतुलित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर स्वास्थ्य जाँच को रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल को व्यक्तिगत पसंद नहीं, राष्ट्रीय आदत बनाना होगा।
स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं को लेकर क्या चिंता जताई गई?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत जागरूकता की कमी के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं की गंभीर चुनौती से भी जूझ रहा है। उनके अनुसार 'विकसित भारत' के लक्ष्य को पाने के लिए वैज्ञानिक संचार और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा सलाह अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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