ऑपरेशन चक्र-VI: सीबीआई ने 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर छापे मारे, डिजिटल अरेस्ट घोटाले में 3 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 4 सितंबर 2026 को 'ऑपरेशन चक्र-VI' के तहत 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी में लिप्त संगठित गिरोहों के विरुद्ध देशव्यापी अभियान छेड़ते हुए 20 राज्यों के 89 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में हरियाणा और कोलकाता से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर धोखाधड़ी की रकम को विभिन्न बैंक खातों में घुमाने का आरोप है।
मुख्य घटनाक्रम
सीबीआई ने तीन अलग-अलग राज्यों में दर्ज 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों की जाँच अपने हाथ में लेकर विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर यह तलाशी अभियान चलाया। छापेमारी के दौरान बैंकिंग दस्तावेज़, खाता-संबंधी रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य महत्त्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए। जब्त सामग्री की फोरेंसिक जाँच जारी है ताकि राज्यों की सीमाओं के पार काम करने वाले इस सिंडिकेट के वित्तीय और तकनीकी ढाँचे की पूरी परत-दर-परत पड़ताल हो सके।
तीन बड़े मामले जिनसे शुरू हुई जाँच
पहला मामला बिट्स पिलानी से जुड़ा है, जहाँ पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर पुलिस अधिकारी बने स्कैमर्स ने ₹7.67 करोड़ की ठगी की। दूसरा मामला गुजरात का है, जहाँ पीड़ित को भी तीन महीने तक डिजिटल कैद में रखकर ₹19.24 करोड़ हड़प लिए गए। तीसरा मामला कर्नाटक का है, जिसमें पीड़ित को एक महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर ₹15.45 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। तीनों मामलों में आरोपियों ने सरकारी अधिकारी या पुलिसकर्मी का रूप धरकर पीड़ितों को मानसिक दबाव में रखा।
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका
हरियाणा के आकाश के बैंक खाते में धोखाधड़ी की रकम में से ₹1.95 करोड़ आए थे। जाँच के अनुसार, उसने यह खाता खुद खोला और उसी दिन पूरी रकम अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी — जो मनी लॉन्ड्रिंग में उसकी कथित सीधी संलिप्तता का संकेत देता है। कोलकाता के राजा करमाकर को कथित तौर पर अपनी फर्म के खाते में ₹1.5 करोड़ मिले थे। तीसरी आरोपी ज्योति रानी ने कथित तौर पर खाते में आई धोखाधड़ी की रकम का एक हिस्सा नकद निकाला और बाकी अन्य खातों में भेज दिया ताकि लेन-देन की पगडंडी मिटाई जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और व्यापक संदर्भ
सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे अपराधों को अंजाम देने वाले और उनमें सहयोग करने वाले बड़े नेटवर्क के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करे। यह ऑपरेशन ऐसे समय में आया है जब देशभर में 'डिजिटल अरेस्ट' के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं — इसमें साइबर अपराधी पुलिस अफ़सर, सीमा शुल्क अधिकारी या प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मचारी बनकर पीड़ितों को वीडियो कॉल पर घंटों-दिनों तक 'कैद' रखते हैं और बड़ी रकम ट्रांसफर करवाते हैं। गौरतलब है कि 'ऑपरेशन चक्र' श्रृंखला के पिछले चरणों में भी सीबीआई ने संगठित साइबर-अपराध नेटवर्क को निशाना बनाया था।
आगे की कार्रवाई
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिशें जारी हैं। एजेंसी का कहना है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी और संगठित साइबर अपराध में शामिल सभी कड़ियों को एक-एक कर उजागर करेगी।