4 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ऑपरेशन चक्र-VI: सीबीआई ने 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर छापे मारे, डिजिटल अरेस्ट घोटाले में 3 गिरफ्तार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ऑपरेशन चक्र-VI: सीबीआई ने 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर छापे मारे, डिजिटल अरेस्ट घोटाले में 3 गिरफ्तार

सारांश

सीबीआई के 'ऑपरेशन चक्र-VI' ने एक साथ 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर छापे मारे और डिजिटल अरेस्ट घोटाले में 3 आरोपियों को दबोचा। तीन पीड़ितों से कुल ₹42 करोड़ से अधिक की ठगी के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर यह कार्रवाई हुई।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 4 सितंबर 2026 को 'ऑपरेशन चक्र-VI' के तहत 20 राज्यों के 89 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
हरियाणा के आकाश (₹ 1.95 करोड़ ), कोलकाता के राजा करमाकर (₹ 1.5 करोड़ ) और ज्योति रानी को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
तीन मामलों में कुल मिलाकर ₹42.36 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी — बिट्स पिलानी (₹ 7.67 करोड़ ), गुजरात (₹ 19.24 करोड़ ), कर्नाटक (₹ 15.45 करोड़ )।
पीड़ितों को कथित तौर पर एक से तीन महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई ने यह कार्रवाई की; जब्त डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जाँच जारी।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 4 सितंबर 2026 को 'ऑपरेशन चक्र-VI' के तहत 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी में लिप्त संगठित गिरोहों के विरुद्ध देशव्यापी अभियान छेड़ते हुए 20 राज्यों के 89 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में हरियाणा और कोलकाता से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर धोखाधड़ी की रकम को विभिन्न बैंक खातों में घुमाने का आरोप है।

मुख्य घटनाक्रम

सीबीआई ने तीन अलग-अलग राज्यों में दर्ज 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों की जाँच अपने हाथ में लेकर विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर यह तलाशी अभियान चलाया। छापेमारी के दौरान बैंकिंग दस्तावेज़, खाता-संबंधी रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य महत्त्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए। जब्त सामग्री की फोरेंसिक जाँच जारी है ताकि राज्यों की सीमाओं के पार काम करने वाले इस सिंडिकेट के वित्तीय और तकनीकी ढाँचे की पूरी परत-दर-परत पड़ताल हो सके।

तीन बड़े मामले जिनसे शुरू हुई जाँच

पहला मामला बिट्स पिलानी से जुड़ा है, जहाँ पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर पुलिस अधिकारी बने स्कैमर्स ने ₹7.67 करोड़ की ठगी की। दूसरा मामला गुजरात का है, जहाँ पीड़ित को भी तीन महीने तक डिजिटल कैद में रखकर ₹19.24 करोड़ हड़प लिए गए। तीसरा मामला कर्नाटक का है, जिसमें पीड़ित को एक महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर ₹15.45 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। तीनों मामलों में आरोपियों ने सरकारी अधिकारी या पुलिसकर्मी का रूप धरकर पीड़ितों को मानसिक दबाव में रखा।

गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका

हरियाणा के आकाश के बैंक खाते में धोखाधड़ी की रकम में से ₹1.95 करोड़ आए थे। जाँच के अनुसार, उसने यह खाता खुद खोला और उसी दिन पूरी रकम अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी — जो मनी लॉन्ड्रिंग में उसकी कथित सीधी संलिप्तता का संकेत देता है। कोलकाता के राजा करमाकर को कथित तौर पर अपनी फर्म के खाते में ₹1.5 करोड़ मिले थे। तीसरी आरोपी ज्योति रानी ने कथित तौर पर खाते में आई धोखाधड़ी की रकम का एक हिस्सा नकद निकाला और बाकी अन्य खातों में भेज दिया ताकि लेन-देन की पगडंडी मिटाई जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और व्यापक संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे अपराधों को अंजाम देने वाले और उनमें सहयोग करने वाले बड़े नेटवर्क के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करे। यह ऑपरेशन ऐसे समय में आया है जब देशभर में 'डिजिटल अरेस्ट' के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं — इसमें साइबर अपराधी पुलिस अफ़सर, सीमा शुल्क अधिकारी या प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मचारी बनकर पीड़ितों को वीडियो कॉल पर घंटों-दिनों तक 'कैद' रखते हैं और बड़ी रकम ट्रांसफर करवाते हैं। गौरतलब है कि 'ऑपरेशन चक्र' श्रृंखला के पिछले चरणों में भी सीबीआई ने संगठित साइबर-अपराध नेटवर्क को निशाना बनाया था।

आगे की कार्रवाई

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिशें जारी हैं। एजेंसी का कहना है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी और संगठित साइबर अपराध में शामिल सभी कड़ियों को एक-एक कर उजागर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

89 ठिकाने — यह बताती है कि 'डिजिटल अरेस्ट' अब छिटपुट अपराध नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित अंतरराज्यीय सिंडिकेट बन चुका है। असली सवाल यह है कि तीन मनी म्यूल्स की गिरफ्तारी के बाद क्या असली संचालक — जो पीड़ितों को वीडियो कॉल पर 'कैद' रखते हैं — भी पकड़ में आएंगे, या यह कार्रवाई निचली कड़ी तक ही सीमित रहेगी। सर्वोच्च न्यायालय की सक्रिय निगरानी एक सकारात्मक दबाव है, लेकिन जब तक टेलीकॉम और बैंकिंग नियामक 'तत्काल खाता-फ्रीज़' तंत्र को मज़बूत नहीं करते, पीड़ित रकम गँवाने के बाद ही न्याय का इंतज़ार करते रहेंगे।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन चक्र-VI क्या है?
यह सीबीआई का देशव्यापी साइबर-अपराध विरोधी अभियान है, जिसके तहत 4 सितंबर 2026 को 20 राज्यों के 89 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इसका उद्देश्य 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी में शामिल संगठित गिरोहों और उनके मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को तोड़ना है।
'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी कैसे काम करती है?
इसमें साइबर अपराधी पुलिस अधिकारी, सीमा शुल्क अफ़सर या प्रवर्तन एजेंसी के कर्मचारी बनकर पीड़ितों को वीडियो कॉल पर घंटों या कई दिनों तक 'डिजिटल कैद' में रखते हैं। डर और मानसिक दबाव का इस्तेमाल कर वे पीड़ितों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवाते हैं।
इस ऑपरेशन में कितने और किन लोगों को गिरफ्तार किया गया?
तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया — हरियाणा के आकाश (जिनके खाते में ₹1.95 करोड़ आए), कोलकाता के राजा करमाकर (जिनकी फर्म को ₹1.5 करोड़ मिले) और ज्योति रानी, जिन्होंने कथित तौर पर रकम नकद निकाली और अन्य खातों में भेजी।
इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय की क्या भूमिका है?
सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह 'डिजिटल अरेस्ट' अपराधों और उनसे जुड़े बड़े नेटवर्क के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे। ऑपरेशन चक्र-VI इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में चलाया गया है।
इस ऑपरेशन में किन मामलों की जाँच की जा रही है?
तीन प्रमुख मामलों की जाँच हो रही है — बिट्स पिलानी (₹7.67 करोड़, तीन महीने की डिजिटल कैद), गुजरात (₹19.24 करोड़, तीन महीने) और कर्नाटक (₹15.45 करोड़, एक महीने)। तीनों में पीड़ितों को नकली पुलिस अधिकारी बने स्कैमर्स ने निशाना बनाया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले