पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल: ऑक्सीजन पाइप लगी हालत में भी मरीजों को देते रहे हिम्मत
सारांश
मुख्य बातें
देश के著名 हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. कृष्ण कुमार अग्रवाल ने अपना संपूर्ण जीवन चिकित्सा सेवा और स्वास्थ्य जागरूकता को समर्पित किया। कोरोना महामारी की सबसे कठिन लहर में जब वह स्वयं कोविड-19 पॉजिटिव हो गए, तब भी उनके मन में अपने मरीजों की चिंता बनी रही — यहाँ तक कि ऑक्सीजन पाइप लगी अवस्था में भी वह ऑनलाइन परामर्श देते नजर आए। 17 मई 2021 को उनके निधन के बाद भी उनकी सेवा-गाथा चिकित्सा जगत को प्रेरणा देती है।
जीवन परिचय और शैक्षणिक यात्रा
डॉ. केके अग्रवाल का जन्म 5 सितंबर 1958 को हुआ था। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से एमबीबीएस और उसके बाद एमडी की उपाधि प्राप्त की। दशकों तक चिकित्सा सेवा में सक्रिय रहते हुए उन्होंने नई दिल्ली के मूलचंद मेडिसिटी में वरिष्ठ परामर्शदाता के रूप में कार्य किया। उनकी पहचान केवल एक कुशल हृदय रोग विशेषज्ञ की नहीं, बल्कि एक ऐसे चिकित्सक की थी जो जरूरतमंद मरीजों के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे।
दिल्ली के खेलगांव स्थित उनके कार्यालय के बाहर प्रायः मरीजों और जरूरतमंद लोगों की कतार लगी रहती थी। उनका मानना था कि चिकित्सक और रोगी के बीच केवल बीमारी और उपचार का नहीं, बल्कि भरोसे और संवेदना का रिश्ता होना चाहिए।
कोरोना काल में अनूठी सेवा
जब कोविड-19 महामारी ने देश को अपनी चपेट में लिया, तब डॉ. अग्रवाल ने फेसबुक, ज़ूम और अन्य डिजिटल माध्यमों के ज़रिए लोगों तक पहुँचना शुरू किया। वह संक्रमण के लक्षणों, सावधानियों और उपचार के बारे में जानकारी देते और लोगों का भय कम करने का प्रयास करते। गौरतलब है कि यह वह दौर था जब स्वास्थ्य तंत्र पर भारी दबाव था और सटीक जानकारी का अभाव था।
जब वह स्वयं कोरोना संक्रमित हो गए, तब भी उन्होंने मरीजों से संवाद बंद नहीं किया। ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहते हुए भी वह ऑनलाइन माध्यम से लोगों के सवालों के जवाब देते और उन्हें हौसला बढ़ाते रहे। उनके लिए मरीजों की पीड़ा अपनी तकलीफ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण थी।
भारतीय संस्कृति और मनोविज्ञान का संगम
डॉ. अग्रवाल चिकित्सा विज्ञान के साथ-साथ भारतीय दर्शन और परंपराओं में भी गहरी रुचि रखते थे। वह महाभारत के प्रसंगों को मनोवैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते थे और भगवान कृष्ण को भारत का प्रथम काउंसलर बताते थे। उनकी दृष्टि में मानसिक स्वास्थ्य को समझने के लिए जीवन, भावनाओं और मानवीय व्यवहार को समझना अनिवार्य है।
पुरस्कार और सम्मान
चिकित्सा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए। वर्ष 2005 में उन्हें डॉ. बीसी रॉय पुरस्कार से नवाजा गया — जो भारत में चिकित्सा क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। इसके अतिरिक्त उन्हें राष्ट्रीय विज्ञान संचार पुरस्कार सहित कई अन्य सम्मान भी मिले। वर्ष 2010 में भारत सरकार ने उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मश्री से विभूषित किया।
विरासत और प्रेरणा
डॉ. केके अग्रवाल 17 मई 2021 को कोरोना संक्रमण से जीवन की अंतिम लड़ाई हार गए। किंतु स्वयं बीमार रहते हुए भी दूसरों की सेवा करने की उनकी यह भावना चिकित्सा जगत में एक मिसाल बन गई है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची सेवा परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती — और यही उनकी सबसे बड़ी और अमिट पहचान है।