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ग्रीन एआई और हेल्थकेयर में भारत-जर्मनी साझेदारी: IIT दिल्ली में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

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ग्रीन एआई और हेल्थकेयर में भारत-जर्मनी साझेदारी: IIT दिल्ली में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

सारांश

आईआईटी दिल्ली में भारत और जर्मनी के 30 से अधिक विशेषज्ञों ने मिलकर तय किया कि स्वास्थ्य सेवा में एआई का भविष्य बड़े मॉडलों में नहीं, बल्कि छोटे, ऊर्जा-कुशल और डेटा-सुरक्षित 'ऑन-डिवाइस' सिस्टम में है — और दोनों देश अब इस दिशा में मिलकर काम करेंगे।

मुख्य बातें

आईआईटी दिल्ली में 3-4 सितंबर को 'ग्रीन एआई फॉर हेल्थकेयर एंड मेंटल वेलनेस' विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित हुई।
भारत और जर्मनी के 30 से अधिक विशेषज्ञों ने मेडिकल इमेजिंग, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट और बहुभाषी स्वास्थ्य सेवा में एआई के नए उपयोगों पर विचार-मंथन किया।
विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य के लिए छोटे, ऑन-डिवाइस एआई मॉडल बड़े मॉडलों से अधिक उपयुक्त हैं क्योंकि ये संवेदनशील डेटा को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रखते हैं।
कार्यशाला इंडो-जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर द्वारा प्रायोजित थी — जो भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और जर्मनी के शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त पहल है।
तन्मय चक्रवर्ती (आईआईटी दिल्ली) और प्रो.
इरीना गुरेविच (ट्यू डर्मस्टाड) ने किया; भविष्य में संयुक्त अनुसंधान का रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी।

आईआईटी दिल्ली में 3 और 4 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में भारत और जर्मनी के 30 से अधिक विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवा और मानसिक कल्याण में 'ग्रीन एआई' के अनुप्रयोगों पर विचार-मंथन किया। इंडो-जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर द्वारा प्रायोजित इस आयोजन का उद्देश्य पर्यावरण-अनुकूल एआई तकनीक के ज़रिये स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक टिकाऊ और सुलभ बनाने के रास्ते तलाशना था।

कार्यशाला का केंद्रीय विषय और उद्देश्य

कार्यशाला का मुख्य विषय 'ग्रीन एआई फॉर हेल्थकेयर एंड मेंटल वेलनेस' रहा — यानी ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियाँ विकसित करना जो पर्यावरण पर न्यूनतम बोझ डालें और स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रभावी ढंग से काम कर सकें। विशेषज्ञों ने मेडिकल इमेजिंग, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट, मानसिक स्वास्थ्य और बहुभाषी स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में एआई के नए उपयोगों की संभावनाएँ खंगालीं।

इसके अलावा, विभिन्न स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में एआई से जुड़ी तकनीकी और बुनियादी ढाँचे की चुनौतियों को चिह्नित करना और भविष्य के संयुक्त अनुसंधान का रोडमैप तैयार करना भी इस बैठक के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल था।

विशेषज्ञों की अहम राय

आईआईटी दिल्ली के प्रो. तन्मय चक्रवर्ती ने कहा कि एआई का अगला दौर केवल बड़े मॉडल बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसे सिस्टम विकसित करने होंगे जो टिकाऊ, भरोसेमंद और सुलभ हों। उन्होंने जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा में एआई की सफलता उसकी ऊर्जा दक्षता और व्यापक पहुँच पर निर्भर करेगी।

जर्मनी की ट्यू डर्मस्टाड की प्रो. इरीना गुरेविच ने मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'ग्रीन एआई' का अर्थ केवल ऊर्जा की बचत नहीं है — बड़े और भारी-भरकम कंप्यूटर मॉडलों की बजाय छोटे, ऑन-डिवाइस मॉडल अधिक उपयुक्त हैं, क्योंकि ये मरीजों के संवेदनशील डेटा को स्थानीय स्तर पर पूरी तरह सुरक्षित रखते हैं।

संस्थागत ढाँचा और प्रायोजन

यह कार्यशाला इंडो-जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर द्वारा प्रायोजित थी, जो भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और जर्मनी के शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त पहल है। इसका संचालन प्रो. तन्मय चक्रवर्ती (आईआईटी दिल्ली) और प्रो. इरीना गुरेविच (ट्यू डर्मस्टाड) ने संयुक्त रूप से किया।

केंद्र की निदेशक डॉ. कुसुमिता अरोड़ा ने कहा कि यह पहल दोनों देशों की विशेषज्ञता को एकजुट कर ग्रीन एआई और स्वास्थ्य से जुड़ी साझा चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान निकालेगी।

भविष्य की दिशा

कार्यशाला में इस बात पर सहमति बनी कि आने वाले समय में चिकित्सक, मरीज और एआई को एक समन्वित टीम के रूप में मिलकर काम करना होगा। भारत और जर्मनी के बीच अकादमिक, नैदानिक और उद्योग जगत के त्रिकोणीय सहयोग को मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दिया गया। यह आयोजन दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक संयुक्त अनुसंधान की नींव रखने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह सम्मेलनों तक सीमित रहेगा? भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे की कमज़ोरियों को देखते हुए, ऑन-डिवाइस एआई मॉडल का विचार न केवल तकनीकी बल्कि गोपनीयता और डिजिटल समावेश के नज़रिये से भी प्रासंगिक है। असली परीक्षा यह होगी कि यह रोडमैप अनुसंधान पत्रों से निकलकर ज़िला अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक कब और कैसे पहुँचता है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IIT दिल्ली में आयोजित ग्रीन एआई कार्यशाला क्या थी?
यह 3 और 4 सितंबर को आईआईटी दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला थी, जिसका विषय 'ग्रीन एआई फॉर हेल्थकेयर एंड मेंटल वेलनेस' था। इसमें भारत और जर्मनी के 30 से अधिक विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवा में पर्यावरण-अनुकूल एआई के अनुप्रयोगों पर विचार-मंथन किया।
ग्रीन एआई का स्वास्थ्य सेवा में क्या महत्त्व है?
ग्रीन एआई का अर्थ है ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियाँ जो कम ऊर्जा खपत करें और पर्यावरण पर न्यूनतम बोझ डालें। स्वास्थ्य सेवा में इसका महत्त्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि छोटे, ऑन-डिवाइस मॉडल मरीजों के संवेदनशील डेटा को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रखते हैं और बड़े सर्वर पर निर्भरता कम करते हैं।
इस कार्यशाला का आयोजन किसने किया और इसे किसने प्रायोजित किया?
कार्यशाला का संचालन आईआईटी दिल्ली के प्रो. तन्मय चक्रवर्ती और जर्मनी की ट्यू डर्मस्टाड की प्रो. इरीना गुरेविच ने किया। इसे इंडो-जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर ने प्रायोजित किया, जो भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा जर्मनी के शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त पहल है।
कार्यशाला में मानसिक स्वास्थ्य और एआई पर क्या निष्कर्ष निकले?
विशेषज्ञों ने पाया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़े और संसाधन-गहन एआई मॉडलों की ज़रूरत नहीं है। प्रो. इरीना गुरेविच के अनुसार, छोटे ऑन-डिवाइस मॉडल अधिक उपयुक्त हैं क्योंकि वे मरीजों के डेटा को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रखते हैं और गोपनीयता सुनिश्चित करते हैं।
भारत-जर्मनी के बीच इस सहयोग का अगला कदम क्या होगा?
कार्यशाला में दोनों देशों के बीच अकादमिक, नैदानिक और उद्योग जगत के सहयोग को मज़बूत करने और भविष्य के संयुक्त अनुसंधान का रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी। यह आयोजन दीर्घकालिक द्विपक्षीय अनुसंधान साझेदारी की नींव के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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