4 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नीरजा भनोट: 'हीरोइन ऑफ हाइजैक' जिसने 5 सितंबर 1986 को 360 जिंदगियाँ बचाकर दी अपनी कुर्बानी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नीरजा भनोट: 'हीरोइन ऑफ हाइजैक' जिसने 5 सितंबर 1986 को 360 जिंदगियाँ बचाकर दी अपनी कुर्बानी

सारांश

अपने जन्मदिन से दो दिन पहले नीरजा भनोट ने कराची हवाई अड्डे पर हाइजैक हुई पैन एम फ्लाइट 73 में 360 यात्रियों को बचाया और खुद तीन बच्चों की जान बचाते हुए आतंकियों की गोलियों का सामना किया। उनकी यह कुर्बानी उन्हें भारत की सबसे युवा अशोक चक्र विजेता और दुनिया की 'हीरोइन ऑफ हाइजैक' बना गई।

मुख्य बातें

नीरजा भनोट ने 5 सितंबर 1986 को पैन एम फ्लाइट 73 के अपहरण के दौरान 360 यात्रियों की जान बचाई।
अबू निदाल ग्रुप के चार आतंकवादियों ने कराची में विमान को 17 घंटे तक बंधक बनाए रखा।
नीरजा ने कॉकपिट क्रू को सतर्क किया, अमेरिकी पासपोर्ट छिपाए और इमरजेंसी दरवाज़ा खोलकर यात्रियों को बाहर निकाला।
तीन बच्चों को बचाते समय आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी; उनका जन्मदिन 7 सितंबर था — शहादत उससे दो दिन पहले।
भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया — वे यह सम्मान पाने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति बनीं।
पाकिस्तान ने तमगा-ए-इंसानियत , अमेरिका ने जस्टिस फॉर क्राइम अवार्ड (2005) और भारत ने 2004 में उनके नाम का डाक टिकट जारी किया।

नीरजा भनोट — पैन एम एयरलाइंस की सीनियर पर्सर — ने 5 सितंबर 1986 को पैन एम फ्लाइट 73 के अपहरण के दौरान असाधारण साहस का परिचय देते हुए 360 यात्रियों की जान बचाई और खुद आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हो गईं। यह घटना उनके 23वें जन्मदिन से महज दो दिन पहले हुई। भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता सम्मान अशोक चक्र से नवाज़ा — यह पुरस्कार पाने वाली वे सबसे कम उम्र की व्यक्ति बनीं।

प्रारंभिक जीवन और करियर

नीरजा का जन्म 7 सितंबर 1963 को चंडीगढ़ में हुआ था। उनके पिता हरीश भनोट मुंबई में पत्रकारिता से जुड़े थे। नीरजा की प्रारंभिक शिक्षा चंडीगढ़ के सैक्रेड हार्ट सीनियर सेकेण्डरी स्कूल में हुई, इसके बाद उन्होंने मुंबई के स्कॉटिश स्कूल और सेंट जेवियर्स कॉलेज में पढ़ाई की।

वर्ष 1985 में उनका विवाह हुआ और वे खाड़ी देश चली गईं, लेकिन दहेज के दबाव के चलते दो महीने के भीतर ही वे वापस मुंबई लौट आईं। इसके बाद उन्होंने पैन एम एयरलाइंस में एयर होस्टेस के रूप में करियर शुरू किया और साथ ही मॉडलिंग तथा एंटी-हाइजैकिंग प्रशिक्षण भी पूरा किया।

अपहरण का वह काला दिन

5 सितंबर 1986 को मुंबई से न्यूयॉर्क जा रही पैन एम फ्लाइट 73 का पहला पड़ाव कराची के जिन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर था। विमान उड़ान भरने की तैयारी में था कि अबू निदाल ग्रुप के चार सशस्त्र आतंकवादियों ने उसे हाइजैक कर लिया। आतंकियों का मकसद अमेरिकी नागरिकों को बंधक बनाकर अमेरिकी जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा कराना था। वे विमान को साइप्रस ले जाना चाहते थे।

नीरजा ने तत्काल सूझबूझ दिखाते हुए कॉकपिट क्रू को सतर्क किया, जिसकी बदौलत पायलट और फ्लाइट इंजीनियर विमान से बाहर निकलने में सफल रहे और विमान उड़ान नहीं भर सका। इसके बाद विमान में सबसे वरिष्ठ विमानकर्मी होने के नाते 380 यात्रियों की जिम्मेदारी नीरजा के कंधों पर आ गई।

साहस की पराकाष्ठा

आतंकवादियों ने विमान को 17 घंटों तक बंधक बनाए रखा। जब उन्होंने अमेरिकी नागरिकों की पहचान के लिए पासपोर्ट माँगे, तो नीरजा ने चतुराई से अमेरिकी पासपोर्ट छिपा दिए, ताकि उन यात्रियों की जान बचाई जा सके। रात होते-होते बिजली आपूर्ति बाधित हुई और आतंकवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी — इससे पहले वे एक भारतीय-अमेरिकी नागरिक को गोली मार चुके थे।

जब आतंकियों ने यात्रियों की हत्या शुरू कर विमान में विस्फोटक लगाने आरंभ किए, तब नीरजा ने विमान का इमरजेंसी दरवाज़ा खोल दिया और यात्रियों को सुरक्षित निकलने का रास्ता दे दिया। वे चाहतीं तो पहले खुद बाहर कूद सकती थीं, लेकिन उन्होंने यात्रियों को प्राथमिकता दी। जब वे तीन बच्चों को बाहर निकाल रही थीं, तभी आतंकवादियों ने उन्हें गोली मार दी। तब तक पाकिस्तानी कमांडो भी विमान में दाखिल हो चुके थे और आतंकियों को काबू में कर लिया था। 380 में से 360 यात्री नीरजा की बदौलत जीवित बचे।

सम्मान और विरासत

भारत सरकार ने नीरजा को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया — वे यह सम्मान पाने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति बनीं। पाकिस्तान ने उन्हें 'तमगा-ए-इंसानियत' और अमेरिका ने भी वीरता पुरस्कार प्रदान किया। वर्ष 2004 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया। वर्ष 2005 में अमेरिका ने उन्हें जस्टिस फॉर क्राइम अवार्ड दिया। 2016 में उनके जीवन पर बनी फिल्म में अभिनेत्री सोनम कपूर ने उनका किरदार निभाया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीरजा भनोट का नाम आज भी 'हीरोइन ऑफ हाइजैक' के रूप में अमर है — एक ऐसी बहादुर महिला जिसने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की।

संपादकीय दृष्टिकोण

संयम और परोपकार की भावना मिलकर सैकड़ों जिंदगियाँ बदल सकती हैं। यह उल्लेखनीय है कि तीन देशों — भारत, पाकिस्तान और अमेरिका — ने उन्हें सम्मानित किया, जो उनकी बहादुरी की सार्वभौमिक स्वीकृति को दर्शाता है। फिर भी यह सवाल बना रहता है कि विमानन सुरक्षा प्रशिक्षण में 'एंटी-हाइजैकिंग' की वह तैयारी, जो नीरजा ने की थी, आज के दौर में कितनी व्यापक और अनिवार्य है। उनकी विरासत सिर्फ एक फिल्म या डाक टिकट तक सीमित नहीं होनी चाहिए — यह नागरिक साहस और कर्तव्यबोध की स्थायी पाठशाला है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीरजा भनोट कौन थीं और उन्हें 'हीरोइन ऑफ हाइजैक' क्यों कहा जाता है?
नीरजा भनोट पैन एम एयरलाइंस की सीनियर पर्सर थीं, जिन्होंने 5 सितंबर 1986 को कराची में हाइजैक हुई पैन एम फ्लाइट 73 के दौरान 360 यात्रियों की जान बचाई और खुद शहीद हो गईं। तीन देशों द्वारा सम्मानित इस साहसी महिला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'हीरोइन ऑफ हाइजैक' के नाम से जाना जाता है।
पैन एम फ्लाइट 73 का अपहरण कैसे हुआ था?
5 सितंबर 1986 को मुंबई से न्यूयॉर्क जा रही पैन एम फ्लाइट 73 जब कराची के जिन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रुकी, तब अबू निदाल ग्रुप के चार सशस्त्र आतंकवादियों ने उसे हाइजैक कर लिया। आतंकियों ने 17 घंटे तक 380 यात्रियों को बंधक बनाए रखा और अमेरिकी जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा कराने की माँग की।
नीरजा भनोट ने अपहरण के दौरान क्या-क्या किया?
नीरजा ने सबसे पहले कॉकपिट क्रू को सतर्क किया, जिससे पायलट और फ्लाइट इंजीनियर भागने में सफल रहे। इसके बाद उन्होंने अमेरिकी पासपोर्ट छिपाए और अंत में इमरजेंसी दरवाज़ा खोलकर यात्रियों को बाहर निकाला — तीन बच्चों को बचाते समय आतंकियों की गोलियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी जान दे दी।
नीरजा भनोट को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार 'अशोक चक्र' दिया — वे इसे पाने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति बनीं। पाकिस्तान ने 'तमगा-ए-इंसानियत' और अमेरिका ने 2005 में 'जस्टिस फॉर क्राइम अवार्ड' प्रदान किया। 2004 में भारत ने उनके नाम का डाक टिकट भी जारी किया।
नीरजा भनोट पर बनी फिल्म कब आई और उनका किरदार किसने निभाया?
नीरजा भनोट के जीवन पर आधारित फिल्म 'नीरजा' वर्ष 2016 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में नीरजा का किरदार अभिनेत्री सोनम कपूर ने निभाया और फिल्म को दर्शकों व आलोचकों दोनों की सराहना मिली।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले