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ऑपरेशन चक्र-VI: सीबीआई ने 16 राज्यों में 80 ठिकानों पर छापा, डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क के 2 गिरफ्तार

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ऑपरेशन चक्र-VI: सीबीआई ने 16 राज्यों में 80 ठिकानों पर छापा, डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क के 2 गिरफ्तार

सारांश

सीबीआई ने ऑपरेशन चक्र-VI में 60 टीमें उतारकर 16 राज्यों के 80+ ठिकानों पर एक साथ दबिश दी — 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के 200 से अधिक मामलों में शामिल नेटवर्क को तोड़ने की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई। सर्वोच्च न्यायालय की फर्जी वेबसाइट और जाली अदालती आदेशों का खुलासा इस स्कैम की खतरनाक परिष्कृतता को उजागर करता है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 25 जून 2025 को 'ऑपरेशन चक्र-VI' के तहत 16 राज्यों में 80 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
अभियान के लिए 60 विशेष टीमें गठित की गईं; 200 से अधिक 'डिजिटल अरेस्ट' मामलों से जुड़े नेटवर्क को निशाना बनाया गया।
चेन्नई और कोलकाता से दो आरोपी गिरफ्तार; शेल कंपनियों और म्यूल खातों के जरिए कथित तौर पर ₹2 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप।
सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट और जाली अदालती आदेशों का भंडाफोड़।
जांच में अंतरराष्ट्रीय कड़ियाँ मिली हैं; संबंधित देशों की एजेंसियों को सूचित किया जा रहा है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 25 जून 2025 को 'ऑपरेशन चक्र-VI' के तहत देशव्यापी छापेमारी अभियान चलाते हुए 16 राज्यों में 80 से अधिक ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। यह अभियान 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम को संचालित करने वाले साइबर अपराध नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से चलाया गया, जिसमें 200 से अधिक मामले दर्ज हैं। इस कार्रवाई में चेन्नई और कोलकाता से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।

ऑपरेशन का दायरा और कार्रवाई

सीबीआई ने इस अभियान के लिए 60 विशेष टीमें गठित कीं, जिन्होंने पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा में एक साथ दबिश दी। छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन और बैंक लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है।

गिरफ्तारी और आरोप

चेन्नई और कोलकाता से गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों पर शेल कंपनियाँ बनाने और 'म्यूल' बैंक खाते खोलने व संचालित करने का आरोप है। जांच के अनुसार, इन खातों का उपयोग अपराध से जुड़ी कथित तौर पर लगभग ₹2 करोड़ की संदिग्ध राशि को लॉन्डर करने के लिए किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट का भंडाफोड़

जांच के दौरान सीबीआई ने एक फर्जी वेबसाइट का पर्दाफाश किया, जिसका URL भारत के सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट से मिलता-जुलता था। आरोपियों ने कथित तौर पर इस नकली डोमेन का इस्तेमाल पीड़ितों को 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर भयभीत कर ठगने के लिए किया। सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री की शिकायत पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। गौरतलब है कि अपराधियों ने अदालतों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के जाली आदेश भी अपलोड किए थे, ताकि धोखाधड़ी को विश्वसनीय दिखाया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय कड़ियाँ

जांच से मिले साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि इस नेटवर्क ने भारतीय नागरिकों के अलावा कई अन्य देशों के नागरिकों को भी निशाना बनाया हो सकता है। सीबीआई ने बताया कि संबंधित देशों की कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को उचित माध्यमों से सूचित किया जा रहा है। एडवांस्ड फॉरेंसिक उपकरणों की मदद से भारत और विदेश में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क के प्रमुख हिस्सों की पहचान की गई है।

आगे की कार्रवाई

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम सहित साइबर धोखाधड़ी के सभी पीड़ितों को न्याय दिलाने और इस नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। जब्त डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच से और गिरफ्तारियाँ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सर्वोच्च न्यायालय की नकली वेबसाइट इसकी सबसे चिंताजनक मिसाल है। 80 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी सीबीआई की क्षमता दर्शाती है, लेकिन असली सवाल यह है कि केवल दो गिरफ्तारियाँ 200 से अधिक मामलों वाले नेटवर्क के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। अंतरराष्ट्रीय कड़ियों का खुलासा यह भी बताता है कि यह नेटवर्क म्यांमार या कंबोडिया जैसे साइबर-क्राइम हब से जुड़ा हो सकता है — जो जांच को और जटिल बनाता है। जब तक म्यूल अकाउंट के सरगनाओं और विदेशी संचालकों तक पहुँच नहीं होती, यह कार्रवाई नेटवर्क की जड़ें काटने के बजाय शाखाएँ छाँटने जैसी रहेगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई का 'ऑपरेशन चक्र-VI' क्या है?
'ऑपरेशन चक्र-VI' सीबीआई का एक देशव्यापी साइबर-अपराध विरोधी अभियान है, जिसके तहत 25 जून 2025 को 16 राज्यों में 80 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इसका मकसद 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के 200 से अधिक मामलों में शामिल नेटवर्क को ध्वस्त करना था।
'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम क्या होता है?
'डिजिटल अरेस्ट' एक साइबर धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी पुलिस, सीबीआई या अदालत के अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को 'गिरफ्तारी' का डर दिखाते हैं और पैसे ऐंठते हैं। इस मामले में अपराधियों ने सर्वोच्च न्यायालय की फर्जी वेबसाइट और जाली अदालती आदेशों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी को विश्वसनीय दिखाया।
इस छापेमारी में किन्हें गिरफ्तार किया गया और उन पर क्या आरोप हैं?
चेन्नई और कोलकाता से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। उन पर शेल कंपनियाँ बनाने, म्यूल बैंक खाते खोलने और संचालित करने तथा अपराध से जुड़ी कथित तौर पर ₹2 करोड़ की राशि लॉन्डर करने का आरोप है।
सर्वोच्च न्यायालय की फर्जी वेबसाइट का मामला कैसे सामने आया?
सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री ने सीबीआई को शिकायत दी कि एक फर्जी वेबसाइट उनकी आधिकारिक वेबसाइट जैसे URL के साथ संचालित हो रही है। इस शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू हुई, जो अंततः ऑपरेशन चक्र-VI तक पहुँची।
क्या इस नेटवर्क के विदेशी संबंध भी हैं?
जांच में मिले साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि इस नेटवर्क ने भारतीय नागरिकों के अलावा अन्य देशों के नागरिकों को भी ठगा हो सकता है। सीबीआई ने बताया कि संबंधित देशों की कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को उचित माध्यमों से सूचित किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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