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डिजिटल अरेस्ट स्कैम: सीबीआई ने ओडिशा-राजस्थान से तीन आरोपी दबोचे, ₹2.07 करोड़ की ठगी का मामला

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डिजिटल अरेस्ट स्कैम: सीबीआई ने ओडिशा-राजस्थान से तीन आरोपी दबोचे, ₹2.07 करोड़ की ठगी का मामला

सारांश

सीबीआई ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम में एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी से ₹2.07 करोड़ ठगने के मामले में ओडिशा के बालासोर और राजस्थान के नागौर से तीन आरोपी दबोचे। ट्रस्ट खाते के ज़रिए रकम की लेयरिंग और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही यह जांच साइबर ठगी के बढ़ते नेटवर्क को उजागर करती है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 30 जून 2025 को ओडिशा और राजस्थान में सात ठिकानों पर छापे मारे और तीन आरोपी गिरफ्तार किए।
मामला 25 मार्च 2025 को दर्ज हुआ था; एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी से ₹2.07 करोड़ की ठगी की गई।
बालासोर (ओडिशा) से दो और नागौर (राजस्थान) से एक आरोपी पकड़ा गया; ठगी की रकम ट्रस्ट के बैंक खाते में भेजी गई थी।
जांच पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश पर चल रही है।
तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त; फोरेंसिक जांच जारी।
सीबीआई ने नागरिकों से साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने की अपील की।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के एक बड़े मामले में 30 जून 2025 को ओडिशा और राजस्थान में सात ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस मामले में एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी से ₹2.07 करोड़ की ठगी की गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

सीबीआई ने यह मामला 25 मार्च 2025 को दर्ज किया था। जांच पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। आरोपियों ने पीड़ित — एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी — को डिजिटल अरेस्ट की झूठी धमकी देकर डराया और ₹2.07 करोड़ अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है।

गिरफ्तारी और जब्ती का ब्यौरा

ओडिशा के बालासोर से दो आरोपियों को और राजस्थान के नागौर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जांच से सामने आया कि ठगी की रकम को एक ट्रस्ट के नाम पर खोले गए बैंक खाते में स्थानांतरित किया गया था। इसके बाद आरोपियों ने उस रकम को कई खातों के ज़रिए लेयरिंग तकनीक से घुमाया, ताकि धन का पता लगाना मुश्किल हो सके।

तलाशी अभियान के दौरान आरोपियों के ठिकानों से कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच जारी है।

सीबीआई का संकल्प

सीबीआई ने इस कार्रवाई के साथ स्पष्ट किया है कि जो लोग या संस्थाएँ बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का दुरुपयोग करके साइबर अपराधियों की मदद करते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी ट्रस्ट के खाते का उपयोग साइबर ठगी की रकम छिपाने के लिए किया गया हो — जांच एजेंसियों ने इस प्रवृत्ति को पहले भी रेखांकित किया है।

आम जनता के लिए चेतावनी

सीबीआई ने नागरिकों को सचेत किया है कि वे फर्जी निवेश योजनाओं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर आने वाली धमकी भरी कॉल और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी काल्पनिक अवधारणाओं से सावधान रहें। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वैध सरकारी या जांच एजेंसी किसी को फोन या वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती।

किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930), नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या नज़दीकी कानून प्रवर्तन एजेंसी को दी जानी चाहिए। आगे की जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की तलाश भी की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो ट्रस्ट खातों और लेयरिंग तकनीक का इस्तेमाल करता है। सीबीआई की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर ट्रस्ट खाते खुले कैसे और बैंकों की KYC प्रक्रिया कहाँ चूकी। जब तक बैंकिंग निगरानी तंत्र में खामियाँ बनी रहेंगी, गिरफ्तारियाँ केवल हिमशैल की नोक को छूती रहेंगी।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?
डिजिटल अरेस्ट एक साइबर ठगी है जिसमें जालसाज़ खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को 'गिरफ्तार' होने का डर दिखाते हैं और रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं। वास्तव में कोई भी वैध सरकारी एजेंसी इस तरह 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती।
सीबीआई ने इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया और कहाँ से?
सीबीआई ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया — दो ओडिशा के बालासोर से और एक राजस्थान के नागौर से। यह गिरफ्तारी 30 जून 2025 को सात ठिकानों पर एक साथ चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान हुई।
इस मामले में पीड़ित के साथ क्या हुआ था?
एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर ₹2.07 करोड़ ट्रांसफर करने पर मजबूर किया गया। ठगी की यह रकम एक ट्रस्ट के नाम पर खोले गए बैंक खाते में भेजी गई और फिर कई खातों के ज़रिए लेयरिंग की गई।
यह जांच किसके आदेश पर हो रही है?
यह जांच पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत सीबीआई द्वारा की जा रही है। मामला 25 मार्च 2025 को दर्ज किया गया था।
साइबर ठगी का शिकार होने पर क्या करें?
किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि या ठगी की सूचना तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दें। घबराएँ नहीं और किसी भी अज्ञात कॉल पर रकम ट्रांसफर न करें।
राष्ट्र प्रेस
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