3 जुलाई 2026
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डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी: CBI ने ओडिशा-राजस्थान में छापे मारे, ₹2.07 करोड़ मामले में तीन गिरफ्तार

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डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी: CBI ने ओडिशा-राजस्थान में छापे मारे, ₹2.07 करोड़ मामले में तीन गिरफ्तार

सारांश

CBI ने ₹2.07 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट मामले में ओडिशा और राजस्थान में सात ठिकानों पर एक साथ छापा मारा और तीन आरोपियों को दबोचा। ठगों ने एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को फर्जी कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर ट्रस्ट खाते के ज़रिए रकम हड़पी।

मुख्य बातें

CBI ने 30 जून 2026 को ओडिशा और राजस्थान के 7 ठिकानों पर छापेमारी की।
गिरफ्तार आरोपी: बिबेकानंद दीक्षित और जयंत कुमार आचार्य (बालासोर, ओडिशा) तथा कन्हैया लाल (नागौर, राजस्थान)।
ठगों ने एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से ₹2.07 करोड़ विभिन्न लेनदेन के ज़रिए हड़पे।
पूरी ठगी की रकम एक ट्रस्ट के नाम पर खोले गए बैंक खाते में पहुँचाई गई।
मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देश पर 25 मार्च को दर्ज FIR के आधार पर है।
CBI ने डिजिटल उपकरण, दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए; जाँच जारी।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने ₹2.07 करोड़ के 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी मामले में 30 जून 2026 को ओडिशा और राजस्थान के सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देश पर 25 मार्च को दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर की गई।

मामले का घटनाक्रम

जाँच के अनुसार, साइबर ठगों ने खुद को कानून प्रवर्तन और नियामक एजेंसियों का अधिकारी बताकर एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को निशाना बनाया। आरोपियों ने फर्जी कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर पीड़ित से ₹2.07 करोड़ अलग-अलग लेनदेन के जरिए अपने खातों में स्थानांतरित करा लिए। 'डिजिटल अरेस्ट' एक उभरता हुआ साइबर अपराध है जिसमें ठग वीडियो कॉल के ज़रिए पीड़ित को घंटों तक मनोवैज्ञानिक दबाव में रखते हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

CBI ने तीन आरोपियों की पहचान की है — ओडिशा के बालासोर निवासी बिबेकानंद दीक्षित और जयंत कुमार आचार्य, तथा राजस्थान के नागौर निवासी कन्हैया लाल। तीनों पर ठगी की रकम को कई बैंक खातों के माध्यम से 'लेयरिंग' करने का आरोप है।

धन के लेन-देन का जाल

जाँच में सामने आया है कि आरोपियों ने साइबर ठगी से अर्जित रकम की वास्तविक उत्पत्ति छिपाने के लिए जटिल वित्तीय लेनदेन की श्रृंखला बनाई। CBI के अनुसार, ठगी की पूरी धनराशि अंततः एक ट्रस्ट के नाम पर खोले गए बैंक खाते में पहुँचाई गई, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके। गौरतलब है कि ट्रस्ट के नाम पर खाते खोलकर धन शोधन की यह प्रवृत्ति हाल के साइबर अपराध मामलों में बार-बार देखी जा रही है।

बरामदगी और जाँच की स्थिति

छापेमारी के दौरान CBI ने आरोपियों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं। एजेंसी का मानना है कि इन साक्ष्यों से साइबर ठगी के व्यापक नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुँचने में मदद मिलेगी। मामले की जाँच जारी है और इस ठगी से जुड़े अन्य लाभार्थियों तथा सहयोगियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।

आम नागरिकों के लिए CBI की चेतावनी

CBI ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि फर्जी निवेश योजनाओं, कानून प्रवर्तन या सरकारी एजेंसियों के नाम पर आने वाली कॉल और 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकियों से सावधान रहें — किसी भी दबाव में आकर धनराशि ट्रांसफर न करें। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रहे — ओडिशा के बालासोर और राजस्थान के नागौर जैसे छोटे शहरों तक इनके नेटवर्क फैल चुके हैं। ट्रस्ट के नाम पर खाते खोलकर धन शोधन की रणनीति यह दर्शाती है कि साइबर अपराधी अब पेशेवर वित्तीय संरचनाओं का उपयोग कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब तक उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप न हो, क्या नियमित जाँच एजेंसियाँ इन मामलों में पर्याप्त तत्परता दिखाती हैं? पीड़ितों में सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों जैसे कमज़ोर वर्गों की बढ़ती संख्या यह भी बताती है कि साइबर जागरूकता अभियान अभी तक उन तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुँचे हैं।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी क्या होती है?
डिजिटल अरेस्ट एक साइबर अपराध है जिसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के ज़रिए पीड़ित को घंटों तक मनोवैज्ञानिक दबाव में रखते हैं और फर्जी कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर धनराशि ट्रांसफर करा लेते हैं। इस मामले में एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से ₹2.07 करोड़ इसी तरह ठगे गए।
CBI ने इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया और कहाँ से?
CBI ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया — ओडिशा के बालासोर से बिबेकानंद दीक्षित और जयंत कुमार आचार्य, तथा राजस्थान के नागौर से कन्हैया लाल। 30 जून 2026 को ओडिशा और राजस्थान के सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई।
यह मामला CBI तक कैसे पहुँचा?
यह मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देश पर CBI को सौंपा गया था। एजेंसी ने 25 मार्च 2026 को FIR दर्ज की और उसके बाद जाँच शुरू की।
आरोपियों ने ठगी की रकम कैसे छिपाई?
आरोपियों ने ठगी की ₹2.07 करोड़ की रकम को कई बैंक खातों के ज़रिए 'लेयरिंग' करके छिपाया। अंततः यह पूरी धनराशि एक ट्रस्ट के नाम पर खोले गए बैंक खाते में पहुँचाई गई, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके।
डिजिटल अरेस्ट की धमकी मिलने पर क्या करें?
CBI ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वैध सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती। ऐसी कोई भी कॉल आने पर तुरंत काट दें, किसी भी दबाव में धनराशि ट्रांसफर न करें और नज़दीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएँ।
राष्ट्र प्रेस
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