डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी: CBI ने ओडिशा-राजस्थान में छापे मारे, ₹2.07 करोड़ मामले में तीन गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने ₹2.07 करोड़ के 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी मामले में 30 जून 2026 को ओडिशा और राजस्थान के सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देश पर 25 मार्च को दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर की गई।
मामले का घटनाक्रम
जाँच के अनुसार, साइबर ठगों ने खुद को कानून प्रवर्तन और नियामक एजेंसियों का अधिकारी बताकर एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को निशाना बनाया। आरोपियों ने फर्जी कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर पीड़ित से ₹2.07 करोड़ अलग-अलग लेनदेन के जरिए अपने खातों में स्थानांतरित करा लिए। 'डिजिटल अरेस्ट' एक उभरता हुआ साइबर अपराध है जिसमें ठग वीडियो कॉल के ज़रिए पीड़ित को घंटों तक मनोवैज्ञानिक दबाव में रखते हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
CBI ने तीन आरोपियों की पहचान की है — ओडिशा के बालासोर निवासी बिबेकानंद दीक्षित और जयंत कुमार आचार्य, तथा राजस्थान के नागौर निवासी कन्हैया लाल। तीनों पर ठगी की रकम को कई बैंक खातों के माध्यम से 'लेयरिंग' करने का आरोप है।
धन के लेन-देन का जाल
जाँच में सामने आया है कि आरोपियों ने साइबर ठगी से अर्जित रकम की वास्तविक उत्पत्ति छिपाने के लिए जटिल वित्तीय लेनदेन की श्रृंखला बनाई। CBI के अनुसार, ठगी की पूरी धनराशि अंततः एक ट्रस्ट के नाम पर खोले गए बैंक खाते में पहुँचाई गई, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके। गौरतलब है कि ट्रस्ट के नाम पर खाते खोलकर धन शोधन की यह प्रवृत्ति हाल के साइबर अपराध मामलों में बार-बार देखी जा रही है।
बरामदगी और जाँच की स्थिति
छापेमारी के दौरान CBI ने आरोपियों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं। एजेंसी का मानना है कि इन साक्ष्यों से साइबर ठगी के व्यापक नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुँचने में मदद मिलेगी। मामले की जाँच जारी है और इस ठगी से जुड़े अन्य लाभार्थियों तथा सहयोगियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
आम नागरिकों के लिए CBI की चेतावनी
CBI ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि फर्जी निवेश योजनाओं, कानून प्रवर्तन या सरकारी एजेंसियों के नाम पर आने वाली कॉल और 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकियों से सावधान रहें — किसी भी दबाव में आकर धनराशि ट्रांसफर न करें। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है।