डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी: CBI ने राजकोट से करनाल निवासी आरोपी को दबोचा, ₹25.65 लाख की धोखाधड़ी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 30 जून 2026 को गुजरात के राजकोट से हरियाणा के करनाल निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जो 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर एक वरिष्ठ नागरिक से ₹25.65 लाख की साइबर ठगी के मामले में वांछित था। तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों की पड़ताल के बाद एजेंसी ने आरोपी की पहचान कर उसे दूसरे राज्य से पकड़ा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला मूल रूप से मध्य प्रदेश पुलिस की राज्य साइबर अपराध शाखा, भोपाल के पास दर्ज था। सर्वोच्च न्यायालय के 1 दिसंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में इसकी जांच CBI को स्थानांतरित की गई। इसके बाद CBI ने 11 अप्रैल 2026 को अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध नया मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
ठगी का तरीका
जांच एजेंसी के अनुसार, पीड़ित वरिष्ठ नागरिक को अज्ञात लोगों ने फोन किया और खुद को सुरक्षा एवं आतंकवाद-रोधी एजेंसियों का अधिकारी बताया। कॉल करने वालों ने दावा किया कि पीड़ित के बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों में हुआ है और निर्देशों का पालन न करने पर गिरफ्तारी व संपत्ति जब्ती की धमकी दी।
आरोपियों ने अपने झूठे दावों को विश्वसनीय बनाने के लिए पीड़ित को एक फर्जी संपत्ति कुर्की आदेश भी भेजा। लगातार मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने दो अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹25.65 लाख स्थानांतरित कर दिए।
CBI की जांच और गिरफ्तारी
CBI ने तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की और उसे राजकोट, गुजरात से गिरफ्तार किया। गौरतलब है कि सक्षम अदालत की अनुमति प्राप्त करने के बाद एजेंसी ने पीड़ित को ठगी गई राशि में से ₹2.65 लाख वापस दिलाने में भी सफलता हासिल की।
जांच की आगे की दिशा
CBI के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल थे और ठगी की रकम का किस प्रकार उपयोग किया गया।
नागरिकों के लिए CBI की सलाह
CBI ने नागरिकों से अपील की है कि वे 'डिजिटल अरेस्ट', फर्जी निवेश योजनाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर आने वाले नकली कॉल से सतर्क रहें। किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी या अन्य गोपनीय वित्तीय विवरण साझा न करें। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या निकटतम पुलिस स्टेशन को दें।