ग्रामीण भारत में मधुमेह का बढ़ता संकट, डॉ. जितेंद्र सिंह ने की राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की पुरज़ोर माँग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 17 अगस्त 2025 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि मधुमेह की रोकथाम को अब राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए, क्योंकि ग्रामीण भारत इस बीमारी की चपेट में तेज़ी से आ रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि इस चुनौती से निपटने के लिए समुदाय-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम और डेटा-संचालित रणनीति अपरिहार्य है।
मुख्य घटनाक्रम
रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (RSSDI) के ग्रामीण मधुमेह आउटरीच डिजिटल पोर्टल के उद्घाटन और मधुमेह जागरूकता वीडियो लाइब्रेरी 'विश्वास' के शुभारंभ के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि मधुमेह और उसकी जटिलताओं के बढ़ते बोझ को नियंत्रित करने के लिए रोकथाम, शीघ्र पहचान, समय पर हस्तक्षेप और निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई — ये चारों स्तंभ एक साथ काम करने चाहिए।
उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम आयु की है, और इस युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य व उत्पादक क्षमता की सुरक्षा किए बिना 'इंडिया-2047' का विजन साकार नहीं हो सकता।
RSSDI की ग्रामीण पहल
RSSDI के ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रम के अंतर्गत मधुमेह जागरूकता, स्क्रीनिंग, उपचार और दीर्घकालिक अनुवर्ती देखभाल के लिए एक संरचित प्रणाली बनाने हेतु गाँवों को गोद लिया जा रहा है। यह कार्यक्रम अब तक कई राज्यों के लगभग 30 गाँवों तक पहुँच चुका है और आने वाले वर्षों में इसके व्यापक विस्तार की योजना है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब शहरी स्वास्थ्य ढाँचे पर पहले से दबाव है और ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमेह के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जो पहले मुख्यतः शहरी बीमारी मानी जाती थी।
डिजिटल पोर्टल और 'विश्वास' लाइब्रेरी का महत्व
नव-उद्घाटित डिजिटल पोर्टल व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण, रोगी देखभाल की निरंतरता, परिणामों की निगरानी और भविष्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए साक्ष्य संग्रह में सक्षम बनाएगा। डॉ. सिंह के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा को वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण से जोड़ने पर ग्रामीण भारत से वास्तविक डेटा प्राप्त होगा, जो शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं को रोग के पैटर्न समझने और भारतीय आबादी के अनुकूल साक्ष्य-आधारित समाधान विकसित करने में सहायक होगा।
सरकार की प्रतिक्रिया और समन्वय का आह्वान
डॉ. सिंह ने सरकारी एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों, प्रौद्योगिकी भागीदारों, निजी संगठनों और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों के बीच व्यापक सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि RSSDI जैसे पेशेवर चिकित्सा संगठन विशेषज्ञता को समुदायों के करीब लाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रयासों को प्रभावी ढंग से पूरक बना सकते हैं।
क्या होगा आगे
RSSDI के ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रम का विस्तार आने वाले वर्षों में और अधिक राज्यों एवं गाँवों तक किए जाने की योजना है। डिजिटल पोर्टल से एकत्रित डेटा भविष्य में राष्ट्रीय मधुमेह नीति को दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।