17 अगस्त 2026
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ग्रामीण भारत में मधुमेह का बढ़ता संकट, डॉ. जितेंद्र सिंह ने की राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की पुरज़ोर माँग

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ग्रामीण भारत में मधुमेह का बढ़ता संकट, डॉ. जितेंद्र सिंह ने की राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की पुरज़ोर माँग

सारांश

ग्रामीण भारत अब मधुमेह महामारी से अछूता नहीं — यह चेतावनी दी केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने। RSSDI के डिजिटल पोर्टल और 'विश्वास' लाइब्रेरी के शुभारंभ पर उन्होंने मधुमेह रोकथाम को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की माँग की, जब यह कार्यक्रम 30 गाँवों तक पहुँच चुका है।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने मधुमेह रोकथाम को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया।
RSSDI का ग्रामीण मधुमेह आउटरीच डिजिटल पोर्टल और जागरूकता वीडियो लाइब्रेरी 'विश्वास' लॉन्च हुई।
कार्यक्रम अब तक कई राज्यों के लगभग 30 गाँवों तक पहुँच चुका है।
भारत की 70% से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम आयु की है — युवा पीढ़ी का स्वास्थ्य 'इंडिया-2047' के लिए अहम।
डिजिटल पोर्टल रोगी डेटा, परिणाम निगरानी और साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण में सहायक होगा।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 17 अगस्त 2025 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि मधुमेह की रोकथाम को अब राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए, क्योंकि ग्रामीण भारत इस बीमारी की चपेट में तेज़ी से आ रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि इस चुनौती से निपटने के लिए समुदाय-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम और डेटा-संचालित रणनीति अपरिहार्य है।

मुख्य घटनाक्रम

रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (RSSDI) के ग्रामीण मधुमेह आउटरीच डिजिटल पोर्टल के उद्घाटन और मधुमेह जागरूकता वीडियो लाइब्रेरी 'विश्वास' के शुभारंभ के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि मधुमेह और उसकी जटिलताओं के बढ़ते बोझ को नियंत्रित करने के लिए रोकथाम, शीघ्र पहचान, समय पर हस्तक्षेप और निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई — ये चारों स्तंभ एक साथ काम करने चाहिए।

उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम आयु की है, और इस युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य व उत्पादक क्षमता की सुरक्षा किए बिना 'इंडिया-2047' का विजन साकार नहीं हो सकता।

RSSDI की ग्रामीण पहल

RSSDI के ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रम के अंतर्गत मधुमेह जागरूकता, स्क्रीनिंग, उपचार और दीर्घकालिक अनुवर्ती देखभाल के लिए एक संरचित प्रणाली बनाने हेतु गाँवों को गोद लिया जा रहा है। यह कार्यक्रम अब तक कई राज्यों के लगभग 30 गाँवों तक पहुँच चुका है और आने वाले वर्षों में इसके व्यापक विस्तार की योजना है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब शहरी स्वास्थ्य ढाँचे पर पहले से दबाव है और ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमेह के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जो पहले मुख्यतः शहरी बीमारी मानी जाती थी।

डिजिटल पोर्टल और 'विश्वास' लाइब्रेरी का महत्व

नव-उद्घाटित डिजिटल पोर्टल व्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण, रोगी देखभाल की निरंतरता, परिणामों की निगरानी और भविष्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए साक्ष्य संग्रह में सक्षम बनाएगा। डॉ. सिंह के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा को वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण से जोड़ने पर ग्रामीण भारत से वास्तविक डेटा प्राप्त होगा, जो शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं को रोग के पैटर्न समझने और भारतीय आबादी के अनुकूल साक्ष्य-आधारित समाधान विकसित करने में सहायक होगा।

सरकार की प्रतिक्रिया और समन्वय का आह्वान

डॉ. सिंह ने सरकारी एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों, प्रौद्योगिकी भागीदारों, निजी संगठनों और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों के बीच व्यापक सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि RSSDI जैसे पेशेवर चिकित्सा संगठन विशेषज्ञता को समुदायों के करीब लाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रयासों को प्रभावी ढंग से पूरक बना सकते हैं।

क्या होगा आगे

RSSDI के ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रम का विस्तार आने वाले वर्षों में और अधिक राज्यों एवं गाँवों तक किए जाने की योजना है। डिजिटल पोर्टल से एकत्रित डेटा भविष्य में राष्ट्रीय मधुमेह नीति को दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नीतिगत प्रतिक्रिया अब तक शहरी-केंद्रित रही है। RSSDI का 30-गाँव मॉडल सराहनीय है, परंतु इसका पैमाना उस संकट के सामने बेहद सीमित है जिसकी ओर मंत्री स्वयं इशारा कर रहे हैं। असली सवाल यह है कि डिजिटल पोर्टल से एकत्रित डेटा केंद्र और राज्य सरकारों की बजट प्राथमिकताओं को कब और कैसे प्रभावित करेगा — बिना इस जवाबदेही तंत्र के, यह पहल एक और सुविचारित पायलट बनकर रह सकती है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रामीण भारत में मधुमेह की स्थिति कितनी गंभीर है?
ग्रामीण भारत अब मधुमेह की महामारी से अछूता नहीं रहा — यह बीमारी जो पहले मुख्यतः शहरी समस्या मानी जाती थी, अब गाँवों में भी तेज़ी से फैल रही है। डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, इसके लिए समुदाय-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम और डेटा-संचालित प्रतिक्रिया की तत्काल आवश्यकता है।
RSSDI का ग्रामीण मधुमेह आउटरीच डिजिटल पोर्टल क्या है?
यह रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (RSSDI) द्वारा शुरू किया गया एक डिजिटल मंच है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमेह स्क्रीनिंग, रोगी देखभाल, परिणाम निगरानी और नीति-निर्माण के लिए साक्ष्य संग्रह को व्यवस्थित करेगा। यह पोर्टल नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा उद्घाटित किया गया।
'विश्वास' वीडियो लाइब्रेरी क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
'विश्वास' RSSDI द्वारा शुरू की गई एक मधुमेह जागरूकता वीडियो लाइब्रेरी है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण समुदायों तक मधुमेह से जुड़ी सरल और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना है। यह पहल ग्रामीण स्वास्थ्य साक्षरता बढ़ाने और शीघ्र निदान को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है।
RSSDI का ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रम अब तक कहाँ-कहाँ पहुँचा है?
यह कार्यक्रम अब तक कई राज्यों के लगभग 30 गाँवों तक पहुँच चुका है। इन गाँवों को गोद लेकर मधुमेह जागरूकता, स्क्रीनिंग, उपचार और दीर्घकालिक अनुवर्ती देखभाल की संरचित प्रणाली तैयार की जा रही है, और आने वाले वर्षों में इसके विस्तार की योजना है।
भारत की युवा आबादी और मधुमेह के बीच क्या संबंध है?
भारत की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम आयु की है, जिससे युवाओं में मधुमेह का बढ़ता जोखिम देश की उत्पादक क्षमता पर सीधा असर डालता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य की रक्षा किए बिना 'इंडिया-2047' का विजन अधूरा रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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