राहुल गांधी बांग्लादेशी वोटरों के समर्थन में चुनाव आयोग के खिलाफ देश गुमराह कर रहे: निशिकांत दुबे
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने 2 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे बांग्लादेशी वोटरों के समर्थन में चुनाव आयोग के खिलाफ देश को गुमराह कर रहे हैं। देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद के बीच यह बयान आया है, जो राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ गया है।
निशिकांत दुबे का एक्स पोस्ट और 1983 नेल्ली नरसंहार का संदर्भ
निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पुराने दस्तावेज़ साझा करते हुए कहा कि 1983 में असम में हुए नेल्ली नरसंहार में एक ही रात में लगभग 5,000 बांग्लादेशी मुसलमान मारे गए थे, हजारों घायल और लापता हुए थे। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त शकधर लगातार कहते रहे थे कि 1980 लोकसभा चुनाव के बाद बिना SIR के असम में चुनाव नहीं कराए जा सकते।
दुबे ने अपनी पोस्ट में लिखा — इंदिरा गांधी ने कथित तौर पर मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर जबरदस्ती 1983 का चुनाव कराया और उसका परिणाम दंगों के रूप में सामने आया। उनके अनुसार, आज राहुल गांधी उसी बांग्लादेशी वोटरों के समर्थन में चुनाव आयोग के खिलाफ देश को गुमराह कर 'गृह युद्ध' कराना चाहते हैं। यह दुबे का अपना राजनीतिक आरोप है और इसे उनके बयान के रूप में ही समझा जाना चाहिए।
नेहरू-चीन विवाद पर भी निशाना
इससे एक दिन पहले, 1 अक्टूबर को निशिकांत दुबे ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में जवाहरलाल नेहरू पर भी हमला बोला था। उन्होंने दावा किया कि 1 अक्टूबर 1952 को चीन ने पहली बार भारतीय भूभाग अक्साई चीन पर कब्जा किया, जिसकी जानकारी भारतीय सेना को मिली और उसने मेजर जनरल राजेन्द्र नाथ (तत्कालीन कैप्टन) को जाँच के लिए भेजा।
दुबे के अनुसार, राजेन्द्र नाथ ने अपनी पुस्तक 'स्ट्रैटेजिक लद्दाख' में 90 वर्ष की आयु में यह कहानी लिखी, जिसमें उन्होंने बताया कि चीन ने तिब्बत से लद्दाख तक अत्याधुनिक सड़क, हवाई अड्डा और लगभग पूरे अक्साई चीन पर नियंत्रण कर लिया था। दुबे का आरोप है कि नेहरू ने इस रिपोर्ट को 'रद्दी की टोकरी में फेंक दिया।'
एसआईआर विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने हैं। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया मतदाता सूचियों में अनुचित छंटनी का ज़रिया बन रही है, जबकि BJP और चुनाव आयोग की दलील है कि यह मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखने की ज़रूरी प्रक्रिया है। यह पहली बार नहीं है जब SIR को लेकर संसद से सड़क तक बहस छिड़ी हो — पिछले कई वर्षों में यह विषय बार-बार राजनीतिक टकराव का केंद्र बना है।
राजनीतिक असर और आगे की राह
निशिकांत दुबे के इस बयान को SIR विवाद में BJP की आक्रामक काउंटर-नैरेटिव रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब यह देखना होगा कि कांग्रेस और राहुल गांधी इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह विवाद संसद के अगले सत्र में भी गूँजेगा। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इस नई बहस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।