4 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

निशिकांत दुबे का बड़ा आरोप: राहुल गांधी का आंदोलन ज्ञानेश कुमार हटाने और बांग्लादेशियों को वोटर बनाने के लिए

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
निशिकांत दुबे का बड़ा आरोप: राहुल गांधी का आंदोलन ज्ञानेश कुमार हटाने और बांग्लादेशियों को वोटर बनाने के लिए

सारांश

BJP सांसद निशिकांत दुबे ने देवघर में राहुल गांधी के आंदोलन को ज्ञानेश कुमार को हटाने और बांग्लादेशियों को वोटर बनाने की कोशिश करार दिया। संथाल परगना में आदिवासी जनसंख्या 1951 की 45% से 2011 में 25-26% पर आने का हवाला देते हुए उन्होंने सुनियोजित घुसपैठ का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

BJP सांसद निशिकांत दुबे ने 4 अक्टूबर 2026 को देवघर में राहुल गांधी के आंदोलन पर निशाना साधा।
दुबे का आरोप — आंदोलन का असली मकसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाना और बांग्लादेशियों को भारत का वोटर बनाना है।
संथाल परगना में आदिवासी जनसंख्या 1951 की 45% से घटकर 2011 में 25-26% पर आने का उल्लेख किया।
कांग्रेस पर 1969 के बाद से आंतरिक चुनाव न कराने का आरोप; समाजवादी पार्टी और RJD पर भी यही निशाना।
नेल्ली नरसंहार का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि यह राजनीति देश को 'गृहयुद्ध की ओर' ले जा सकती है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने 4 अक्टूबर 2026 को देवघर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के चल रहे आंदोलन पर सीधा हमला बोला। दुबे ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत का वोटर बनाने की कोशिश का हिस्सा है।

मुख्य आरोप और बयान

निशिकांत दुबे ने कहा, 'यह पूरा आंदोलन ज्ञानेश कुमार को हटाने का आंदोलन है। यह बांग्लादेशियों को भारत का नागरिक बनाने और उन्हें वोटर बनाने का आंदोलन है।' उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'हर क्रिया की उतनी ही और वैसी ही प्रतिक्रिया होगी। राहुल गांधी जितना चाहें विरोध करते रहें।'

दुबे ने असम के नेल्ली नरसंहार का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भारत के नागरिक खड़े होते हैं, तो परिणाम अत्यंत भयावह हो सकते हैं — जिसमें एक ही रात में सैकड़ों लोगों को जिंदा जलाने जैसी त्रासदियाँ हुई थीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति देश को 'गृहयुद्ध की ओर ले जा रही है।'

कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल

दुबे ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) के आंतरिक चुनावों पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 1951 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के विरोध के बावजूद राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन कांग्रेस अध्यक्ष बने थे, जिसके बाद नेहरू ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी से इस्तीफा दे दिया था।

उन्होंने आगे कहा कि जब इंदिरा गांधी अध्यक्ष बनीं, तब एस. निजलिंगप्पा, मोरारजी देसाई और नीलम संजीव रेड्डी जैसे नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया और एक अलग 'इंदिरा कांग्रेस' बना ली गई। दुबे ने कहा, '1969 के बाद से आज तक कांग्रेस (आई) में कौन-सा चुनाव हुआ है? एक ही परिवार से अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष आता है।'

उन्होंने यही आरोप समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर भी लगाया, कहते हुए कि 'जो लोग अपनी पार्टी में चुनाव नहीं करा सकते, वे देश में लोकतंत्र की बात करते हैं।'

संथाल परगना में जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा

दुबे ने बांग्लादेशियों को बसाने के 'षड्यंत्र' का आरोप दोहराते हुए संथाल परगना क्षेत्र का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि 1951 में यहाँ आदिवासियों की जनसंख्या 45 प्रतिशत थी, जो 2011 तक घटकर 25-26 प्रतिशत रह गई। उनके अनुसार, यह जनसांख्यिकीय परिवर्तन सुनियोजित घुसपैठ का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि वे सरदार पटेल के पदचिन्हों पर चलते हुए जब भी किसी मुद्दे का जवाब देना होता है, संथाल परगना आते हैं — ठीक वैसे जैसे आजादी की लड़ाई में सत्याग्रह के ज़रिए जवाब दिया जाता था।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह बयान ऐसे समय में आया है जब राहुल गांधी चुनाव आयोग और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन चला रहे हैं। गौरतलब है कि झारखंड का संथाल परगना क्षेत्र घुसपैठ और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है।

आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इन आरोपों का जवाब आने की संभावना है, और यह विवाद संसद और जनसभाओं दोनों मंचों पर और तीखा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस गिरावट के पीछे के बहुआयामी कारणों — पलायन, आर्थिक हाशियाकरण, शहरीकरण — को बयान में जगह नहीं मिली। नेल्ली नरसंहार जैसी त्रासदी का राजनीतिक भाषण में उल्लेख, बिना संदर्भ के, सांप्रदायिक स्मृति को उकसाने का जोखिम उठाता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन बयानों को केवल 'आरोप-प्रत्यारोप' के रूप में दिखाती है — असली सवाल यह है कि क्या ये आरोप सत्यापन योग्य साक्ष्य पर आधारित हैं या केवल चुनावी आख्यान।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के आंदोलन पर क्या आरोप लगाए?
BJP सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और बांग्लादेशियों को भारत का नागरिक व वोटर बनाने के लिए है। उन्होंने यह बयान 4 अक्टूबर 2026 को देवघर में दिया।
संथाल परगना में आदिवासी जनसंख्या में गिरावट के बारे में दुबे ने क्या कहा?
दुबे ने कहा कि 1951 में संथाल परगना में आदिवासियों की जनसंख्या 45 प्रतिशत थी, जो 2011 तक घटकर 25-26 प्रतिशत रह गई। उनके अनुसार यह गिरावट बांग्लादेशी घुसपैठ का परिणाम है।
दुबे ने कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र पर क्या कहा?
दुबे ने कहा कि 1969 के बाद से कांग्रेस (आई) में कोई वास्तविक आंतरिक चुनाव नहीं हुआ और एक ही परिवार से अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष नियुक्त होते हैं। उन्होंने यही आरोप समाजवादी पार्टी और RJD पर भी लगाया।
नेल्ली नरसंहार का उल्लेख दुबे ने किस संदर्भ में किया?
दुबे ने असम के नेल्ली नरसंहार का उल्लेख यह कहते हुए किया कि जब भारत के नागरिक खड़े होते हैं, तो परिणाम भयावह होते हैं — उस घटना में बांग्लादेशियों से जुड़े आरोपों के बीच एक रात में सैकड़ों लोग मारे गए थे। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा राजनीति देश को 'गृहयुद्ध की ओर' ले जा सकती है।
ज्ञानेश कुमार कौन हैं और यह विवाद क्यों अहम है?
ज्ञानेश कुमार भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। राहुल गांधी और विपक्ष चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जिसे BJP ने संस्था को कमज़ोर करने की कोशिश बताया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले