निशिकांत दुबे का बड़ा आरोप: राहुल गांधी का आंदोलन ज्ञानेश कुमार हटाने और बांग्लादेशियों को वोटर बनाने के लिए
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने 4 अक्टूबर 2026 को देवघर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के चल रहे आंदोलन पर सीधा हमला बोला। दुबे ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत का वोटर बनाने की कोशिश का हिस्सा है।
मुख्य आरोप और बयान
निशिकांत दुबे ने कहा, 'यह पूरा आंदोलन ज्ञानेश कुमार को हटाने का आंदोलन है। यह बांग्लादेशियों को भारत का नागरिक बनाने और उन्हें वोटर बनाने का आंदोलन है।' उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'हर क्रिया की उतनी ही और वैसी ही प्रतिक्रिया होगी। राहुल गांधी जितना चाहें विरोध करते रहें।'
दुबे ने असम के नेल्ली नरसंहार का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भारत के नागरिक खड़े होते हैं, तो परिणाम अत्यंत भयावह हो सकते हैं — जिसमें एक ही रात में सैकड़ों लोगों को जिंदा जलाने जैसी त्रासदियाँ हुई थीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति देश को 'गृहयुद्ध की ओर ले जा रही है।'
कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल
दुबे ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) के आंतरिक चुनावों पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 1951 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के विरोध के बावजूद राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन कांग्रेस अध्यक्ष बने थे, जिसके बाद नेहरू ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी से इस्तीफा दे दिया था।
उन्होंने आगे कहा कि जब इंदिरा गांधी अध्यक्ष बनीं, तब एस. निजलिंगप्पा, मोरारजी देसाई और नीलम संजीव रेड्डी जैसे नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया और एक अलग 'इंदिरा कांग्रेस' बना ली गई। दुबे ने कहा, '1969 के बाद से आज तक कांग्रेस (आई) में कौन-सा चुनाव हुआ है? एक ही परिवार से अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष आता है।'
उन्होंने यही आरोप समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर भी लगाया, कहते हुए कि 'जो लोग अपनी पार्टी में चुनाव नहीं करा सकते, वे देश में लोकतंत्र की बात करते हैं।'
संथाल परगना में जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा
दुबे ने बांग्लादेशियों को बसाने के 'षड्यंत्र' का आरोप दोहराते हुए संथाल परगना क्षेत्र का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि 1951 में यहाँ आदिवासियों की जनसंख्या 45 प्रतिशत थी, जो 2011 तक घटकर 25-26 प्रतिशत रह गई। उनके अनुसार, यह जनसांख्यिकीय परिवर्तन सुनियोजित घुसपैठ का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि वे सरदार पटेल के पदचिन्हों पर चलते हुए जब भी किसी मुद्दे का जवाब देना होता है, संथाल परगना आते हैं — ठीक वैसे जैसे आजादी की लड़ाई में सत्याग्रह के ज़रिए जवाब दिया जाता था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय में आया है जब राहुल गांधी चुनाव आयोग और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन चला रहे हैं। गौरतलब है कि झारखंड का संथाल परगना क्षेत्र घुसपैठ और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है।
आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इन आरोपों का जवाब आने की संभावना है, और यह विवाद संसद और जनसभाओं दोनों मंचों पर और तीखा हो सकता है।