राहुल गांधी के खिलाफ 15 विशेषाधिकार प्रस्ताव लंबित: निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने 31 जुलाई को माँग की कि लोकसभा अध्यक्ष नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विरुद्ध लंबित 15 विशेषाधिकार प्रस्तावों पर तत्काल कार्रवाई करें। दुबे ने यह बयान अनुराग ठाकुर द्वारा राहुल गांधी को भेजे गए विशेषाधिकार हनन नोटिस की पृष्ठभूमि में दिया।
मुख्य आरोप और माँग
दुबे ने कहा, 'राहुल गांधी को भेजे गए नोटिस के बारे में अनुराग ठाकुर ही बेहतर बता पाएंगे, क्योंकि मैंने खुद उसे नहीं पढ़ा है। हालांकि, मैंने आज के अखबारों में इसके बारे में पढ़ा और देखा कि उन्होंने कैसी भाषा का इस्तेमाल किया है।' उन्होंने आगे कहा कि जब से राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष बने हैं, तब से कम-से-कम 15 विशेषाधिकार प्रस्ताव लंबित हैं और लोकसभा अध्यक्ष को इन पर कार्रवाई करनी चाहिए।
कांग्रेस पर तीखा प्रहार
दुबे ने कहा, 'राहुल गांधी ने जिन अपशब्दों का उपयोग किया है और उन्होंने जिस तरीके की परंपरा शुरू की है, वे बेतुके बयान देते रहे हैं। वे 12 साल से सत्ता से बाहर हैं और सत्ता के बिना कांग्रेस के लोगों का दिमाग शून्य हो जाता है।' उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि नेता प्रतिपक्ष की ऐसी भाषा पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो अन्य सांसद भी इसी राह पर चल सकते हैं।
रेवंत रेड्डी के बयान पर प्रतिक्रिया
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की 'इंजीनियरिंग ग्रेजुएट क्रिमिनल वेस्ट हैं' टिप्पणी पर दुबे ने कहा कि रेड्डी राहुल गांधी के कहने पर बयान देते हैं। उन्होंने रेड्डी के साथ अपने पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया और कहा, 'तेलंगाना के मुख्यमंत्री एक अच्छे इंसान और हमारे बहुत पुराने दोस्त हैं।'
साझा राजनीतिक अतीत का संदर्भ
दुबे ने बताया कि 1995 में उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच की ओर से सेवाग्राम से आलमपुर तक लगभग 750 किलोमीटर की पदयात्रा की थी, जिसमें रेवंत रेड्डी ने सक्रिय रूप से भाग लिया था। उन्होंने कहा कि रेड्डी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की पृष्ठभूमि से आते हैं, इसलिए उनकी मूल सोच सही है।
आगे क्या
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से इन 15 लंबित विशेषाधिकार प्रस्तावों पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद संसद के आगामी सत्रों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव को और गहरा कर सकता है।