राहुल गांधी के बयान पर भाजपा का तीखा पलटवार: 'अमित शाह से देशद्रोही ताकतें डरती हैं'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए आरोपों के जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई सांसदों ने 30 जुलाई को एकजुट होकर तीखा पलटवार किया। भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार करार देते हुए उनकी संसदीय भाषा, राजनीतिक रवैये और विपक्ष की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।
निशिकांत दुबे का पलटवार: 'देशद्रोही ताकतें डरती हैं अमित शाह से'
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि अमित शाह किसी से डरने वाले नेता नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'अमित शाह डरते नहीं हैं, बल्कि आप उनसे डरते हैं। अमित शाह ऐसे व्यक्ति हैं जिनसे देशद्रोही ताकतें, आतंकवादी, नक्सलवादी और देश को टुकड़े-टुकड़े करने की साजिश करने वाले लोग डरते हैं। अगर कोई डर रहा है तो वह राहुल गांधी हैं।'
दुबे ने आगे कहा कि अमित शाह को जनता के जनादेश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास के आधार पर गृह मंत्री बनाया गया है, और जब तक देश की जनता भाजपा को समर्थन देती रहेगी, तब तक राहुल गांधी के किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।
संजय जायसवाल: संसदीय मर्यादा पर सवाल
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने राहुल गांधी की संसदीय भाषा पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पाँच बार सांसद रहने के बावजूद राहुल गांधी को यह समझ नहीं है कि सदन में किन शब्दों का प्रयोग उचित है। जायसवाल के अनुसार राहुल गांधी ने भाषण की शुरुआत छात्रों के मुद्दे से की, लेकिन बाद में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिनका सदन में विरोध हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जानबूझकर विवादित भाषा का प्रयोग था।
तरुण चुघ और शशांक मणि त्रिपाठी: छात्रों के नाम पर राजनीति का आरोप
भाजपा सांसद तरुण चुघ ने राहुल गांधी पर छात्रों के भविष्य को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में छात्रों की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर कोई ठोस सुझाव नहीं दिया और केवल भ्रम फैलाने का प्रयास किया। चुघ ने इसी दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संत रविदास नगर का नाम बहाल करने के फैसले का स्वागत किया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर संत रविदास के नाम पर रखे गए जिले का नाम बदलने का आरोप लगाया।
भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का दायित्व केवल आरोप लगाना नहीं, बल्कि तथ्यों और विश्लेषण के साथ मुद्दों को उठाना भी है। उनके अनुसार राहुल गांधी के भाषण की शुरुआत से लगा कि वे नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा करेंगे, लेकिन बाद में विषय से भटक गए, जिससे सदन और देश दोनों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
दामोदर अग्रवाल और राहुल सिन्हा: कांग्रेस पर दोहरे मानदंड का आरोप
भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पिछले दो सप्ताह से राहुल गांधी लगातार सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले नीट पर चर्चा की माँग की गई, फिर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की गई और अब अमित शाह पर गोली चलवाने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं।
भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने कांग्रेस पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं और वहाँ प्रश्नपत्र लीक की घटनाएँ हुई हैं, वहाँ कांग्रेस ने कभी संबंधित शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की माँग नहीं की। सिन्हा ने कहा कि देश के छात्रों का विश्वास प्रधानमंत्री मोदी पर है।
कंगना रनौत की माफ़ी की माँग और विवाद की पृष्ठभूमि
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, 'उन्हें माफ़ी मांगनी होगी। आप इस तरह झूठ नहीं फैला सकते और किसी पर इतने गंभीर आरोप नहीं लगा सकते।'
गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की जड़ में राहुल गांधी का वह बयान है जिसमें उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी ने गृह मंत्री के इस्तीफे की माँग की और दावा किया कि दिल्ली पुलिस तथा सुरक्षा बलों ने छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल गृह मंत्री के आदेश पर किया था। भाजपा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और यह विवाद संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह तीखी नोकझोंक का रूप ले चुका है।