राहुल गांधी की PM मोदी-अमित शाह पर टिप्पणी: NDA नेताओं का तीखा पलटवार, माफी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद 20 मई को राजनीतिक विवाद तेज हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेताओं ने एकजुट होकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। NDA नेताओं ने राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के प्रति इस प्रकार की भाषा लोकतांत्रिक मर्यादा के विरुद्ध है।
मुख्य घटनाक्रम
BJP के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे 'हताशा और कुंठा' में डूबकर देश, भारतीय सेना और सनातन संस्कृति के विरुद्ध बयान देते रहते हैं। चुघ ने कहा कि राहुल गांधी 'भारत विरोधी सोच के आदतन अपराधी' बन चुके हैं और देश की जनता उनकी 'राष्ट्रविरोधी हरकतों' को कभी माफ नहीं करेगी।
BJP सांसद और प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी की टिप्पणी को कांग्रेस की 'कुंठित राजनीति' का नमूना बताया। उन्होंने कहा कि जिस नेतृत्व ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई और आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई की, उसके विरुद्ध इस प्रकार की भाषा 'राजनीतिक हताशा' को दर्शाती है। त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की।
सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी की टिप्पणी को 'लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ' बताया। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री देश की 140 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके लिए 'अभद्र भाषा का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।' पासवान ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह 'गद्दार नहीं, खुद्दार' हैं। मांझी ने आरोप लगाया कि 5 में से 4 राज्यों के चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद राहुल गांधी 'अनाप-शनाप भाषा' का सहारा ले रहे हैं, और यही कारण है कि 'कांग्रेस देश से विलुप्त हो रही है।'
दिल्ली और उत्तर प्रदेश के मंत्रियों का रुख
दिल्ली सरकार के मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल राहुल गांधी की 'राजनीतिक हताशा' को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब किसी नेता के पास ठोस मुद्दे नहीं होते, तो वह व्यक्तिगत टिप्पणियों का सहारा लेने लगता है।
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि वे 'बिन पानी की मछली' की तरह सत्ता के बिना तड़पते हैं और राहुल गांधी की बयानबाजी उसी 'छटपटाहट का नतीजा' है।
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने राहुल गांधी को 'एक्सीडेंटल नेता' बताते हुए कहा कि वे अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में जाकर विकास पर चर्चा करने के बजाय प्रधानमंत्री के लिए 'अपशब्द' बोल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगली बार जब राहुल गांधी रायबरेली आएंगे तो उन्हें 'अनुकूल जवाब' दिया जाएगा।
क्षेत्रीय BJP नेताओं की आवाज़
जम्मू-कश्मीर के BJP नेता रविंदर रैना ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि देश को विभाजित करने, जम्मू-कश्मीर को अलग व्यवस्था देने और 'सिखों के नरसंहार' की जिम्मेदारी कांग्रेस पर है। रैना ने आरोप लगाया कि 'असली गद्दार' कांग्रेस ही है।
पंजाब के BJP नेता अविनाश राय खन्ना ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह ने अपने कार्यों से 'भारत का नाम दुनिया भर में रोशन किया है' और उनके प्रति इस प्रकार की भाषा 'संकीर्ण मानसिकता' को दर्शाती है।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब संसद का सत्र नजदीक है और विपक्ष सरकार पर कई मुद्दों पर दबाव बनाने की कोशिश में है। गौरतलब है कि राहुल गांधी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या माफी नहीं आई है। NDA नेताओं की यह एकजुट प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक तापमान बढ़ा सकती है।