राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा का पलटवार: 'प्रमाण दें या सदन में माफी मांगें'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की संसद में की गई टिप्पणियों को लेकर 29 जुलाई को सियासी संग्राम और गहरा हो गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ सांसदों ने एक स्वर में मांग की कि कांग्रेस नेता या तो अपने आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य सदन के समक्ष रखें, अथवा सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी पर संसदीय परंपराओं के उल्लंघन, बिना तथ्यों के गंभीर आरोप लगाने और सदन की गरिमा को आघात पहुँचाने का आरोप लगाया।
बिप्लब देब का हमला: 'संसदीय मर्यादा की अनदेखी'
भाजपा सांसद बिप्लब देब ने राहुल गांधी की टिप्पणी को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार देते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को न तो संसदीय परंपराओं का ध्यान है और न ही संवैधानिक व्यवस्था में उनका विश्वास दिखता है। देब के अनुसार, जिस विधेयक पर चर्चा चल रही थी, राहुल गांधी उसका नाम तक सही ढंग से नहीं बता सके और विषय पर केंद्रित हुए बिना आरोप लगाते रहे।
देब ने यह भी कहा कि संसद में किसी भी मंत्री या सांसद पर आरोप लगाने के लिए तथ्यों और प्रमाणों का होना अनिवार्य है। उनके अनुसार, केवल सुर्खियाँ बटोरने के उद्देश्य से सदन में बयान देना लोकतांत्रिक राजनीति की मूल भावना के विरुद्ध है।
किरेन रिजिजू की माफी की मांग
देब ने आगे बताया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में यह स्पष्ट कर दिया है कि राहुल गांधी को पहले अपने बयान के लिए माफी माँगनी होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि बार-बार इस प्रकार के आचरण को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे देश की नई पीढ़ी के बीच संसद की कार्यप्रणाली को लेकर गलत संदेश जाता है।
हर्ष मल्होत्रा: 'अराजकतावादी आचरण'
भाजपा सांसद हर्ष मल्होत्रा ने राहुल गांधी के व्यवहार को सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह 'अराजकतावादी' बताया। मल्होत्रा ने कहा कि राहुल गांधी सभापति के बार-बार टोकने के बावजूद असंसदीय भाषा का प्रयोग करते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्री अमित शाह पर बिना किसी प्रमाण के गंभीर आरोप लगाना पूरी तरह अनुचित है और राहुल गांधी को या तो आरोप प्रमाणित करने चाहिए या सदन में माफी माँगनी चाहिए।
जगदंबिका पाल: 'पूर्व नियोजित था हंगामा'
भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने आरोप लगाया कि संसद में हुआ हंगामा पूर्व नियोजित था। उन्होंने कहा कि सदन में पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए महत्वपूर्ण विधेयक पर गंभीर चर्चा चल रही थी, लेकिन राहुल गांधी ने नया विवाद खड़ा कर दिया।
पाल ने यह भी बताया कि संसद के नियमों के तहत यदि कोई सदस्य किसी मंत्री या अन्य सदस्य पर आरोप लगाना चाहता है, तो उसे पहले लिखित रूप में स्पीकर और संबंधित मंत्री को सूचित करना होता है, ताकि आरोपों का उचित जवाब दिया जा सके। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने राहुल गांधी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि गृह मंत्री द्वारा कथित रूप से गोली चलाने का आदेश देने का कोई दस्तावेज़ या प्रमाण है या नहीं।
विपक्ष की रणनीति पर सवाल
जगदंबिका पाल ने यह भी रेखांकित किया कि इससे पहले विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहा था, लेकिन अब अचानक गृह मंत्री पर नए आरोप लगाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, यह रुख स्पष्ट करता है कि विपक्ष विधेयक पर सार्थक चर्चा नहीं, बल्कि सदन में व्यवधान उत्पन्न करना चाहता है। यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र पहले से ही कई विवादों के कारण बाधित रहा है। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या राहुल गांधी सदन में अपना पक्ष रखते हैं या विवाद और गहरा होता है।