मानसून सत्र में विपक्ष ने चर्चा से किया परहेज़: BJP सांसद जगदंबिका पाल का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल ने 3 अगस्त को संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सदन में हर विषय पर बहस के लिए पर्याप्त समय और अवसर उपलब्ध कराए गए, फिर भी विपक्षी दल चर्चा में भाग लेने से बचते रहे। उनका यह बयान संसद के लगातार तीसरे सप्ताह में भी जारी व्यवधान की पृष्ठभूमि में आया है।
मुख्य घटनाक्रम
पाल ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी विषय पर चर्चा के लिए प्रस्ताव लाया जा सकता है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का सीधा आरोप लगाया। पाल के अनुसार, नीट परीक्षा से जुड़े कानून पर दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा हुई थी और राहुल गांधी को अपनी बात रखने के लिए 50 मिनट का समय भी दिया गया था।
सनातन परंपरा पर विवाद
BJP सांसद मयंक नायक ने पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने संतों और साधुओं की तरह गेरुए वस्त्र पहनकर सनातन धर्म और संत परंपरा को बदनाम करने का प्रयास किया। नायक ने इसे धार्मिक परंपराओं का अपमान बताते हुए कड़ा विरोध जताया। पाल ने भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस देश के संतों का मज़ाक उड़ाकर सनातन और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे हैं।
झारखंड पेपर लीक और छात्र आंदोलन
BJP सांसद संजय सेठ ने झारखंड लोक सेवा आयोग पेपर लीक मामले और छात्रों के आंदोलन पर राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों से हज़ारों छात्र रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन झारखंड सरकार पूरी तरह उदासीन बनी हुई है। सेठ ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री आवास विरोध स्थल से महज़ एक किलोमीटर दूर होने के बावजूद सरकार का कोई प्रतिनिधि छात्रों से मिलने नहीं पहुँचा।
सेठ के अनुसार, छात्रों को टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी गई और बारिश के दौरान इस्तेमाल की जा रही प्लास्टिक शीट भी हटा दी गईं। BJP सांसद आदित्य साहू ने भी इस मुद्दे पर आवाज़ उठाते हुए कहा कि छात्रों के पास भोजन और बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है, जबकि कांग्रेस झारखंड सरकार का समर्थन कर रही है।
समान नागरिक संहिता पर BJP का रुख
बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन के बयान के संदर्भ में BJP सांसद दर्शन सिंह चौधरी और राहुल सिन्हा ने समान नागरिक संहिता (UCC) का समर्थन किया। चौधरी ने तर्क दिया कि जब देश में एक संविधान और एक कानून है, तो शिक्षा व्यवस्था में भी समानता होनी चाहिए।
आगे की स्थिति
मानसून सत्र में व्यवधान का यह सिलसिला संसद की उत्पादकता पर सवाल खड़े कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन की प्रतीक्षा सूची में हैं। सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों पक्ष एक-दूसरे पर बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि आम जनता के मुद्दे संसद के पटल पर चर्चा के लिए इंतज़ार में हैं।