साधु वेश में संसद पहुंचे पप्पू यादव पर भाजपा का हमला, दिनेश शर्मा बोले — 'संत परंपरा का अपमान'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के 31 जुलाई को साधु वेश धारण कर संसद पहुँचने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ सांसदों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राम मंदिर चढ़ावा अनियमितता मामले के विरोध में किए गए इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन को BJP नेताओं ने संत परंपरा और सनातन धर्म का अपमान बताया है।
दिनेश शर्मा की प्रतिक्रिया
BJP सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, 'भगवा कपड़े पहनने में कोई ऐतराज नहीं है। अगर कोई सम्मानित सांसद है, तो वह सम्मान का हकदार है, लेकिन अगर आप संत का वेश बनाकर यह कहते फिरते हैं कि संत पैसे या दान चुराते हैं तो यह संत परंपरा का अपमान है।' उन्होंने आगे कहा कि ऐसे सांसदों को संसद की मर्यादा का पालन करना चाहिए और किसी को उत्तेजित करने का काम नहीं करना चाहिए।
शर्मा ने यह भी जोड़ा, 'सनातनी सहनशील हैं, इसका यह मतलब नहीं कि रोज-रोज उनको बदनाम किया जाए।' उन्होंने पप्पू यादव के इस कदम को कांग्रेस के साथ खड़े होने का संकेत बताया।
साक्षी महाराज का बयान
BJP सांसद साक्षी महाराज ने इस प्रदर्शन को ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए कहा, 'देश की आजादी से लेकर बंटवारे तक और बंटवारे से लेकर आज तक कांग्रेस और अब प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और पूरे विपक्ष ने लगातार संतों, भगवा और सनातन का अपमान किया है।' उन्होंने पप्पू यादव की तुलना 'कालनेमि' से करते हुए उनके विरोध प्रदर्शन को निंदनीय बताया।
अन्य BJP नेताओं की राय
BJP सांसद कमलजीत सेहरावत ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि नीट पेपर लीक मामले में छात्रों की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों ने आपत्तिजनक हरकतें कीं, जो स्वीकार्य नहीं हैं। उनका कहना था कि विपक्ष की राजनीतिक मंशा को देश भली-भाँति समझ रहा है।
BJP सांसद अशोक मित्तल ने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। उनके अनुसार, 'सरकार ने छात्रों की माँगें मान लीं, इसलिए मामला खत्म हो गया है। अब विपक्ष जानबूझकर बेबुनियाद मुद्दे उठाकर संसद की कार्यवाही में रुकावट डाल रहा है।'
विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में हुआ है जब संसद का सत्र पहले से ही विपक्षी प्रदर्शनों और व्यवधानों के कारण प्रभावित रहा है। पप्पू यादव ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर यह प्रतीकात्मक विरोध किया था। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी सांसद के प्रतीकात्मक वेश ने संसदीय परिसर में राजनीतिक विवाद खड़ा किया हो।
आगे देखना होगा कि इस विवाद का संसद की कार्यवाही पर क्या असर पड़ता है और क्या पप्पू यादव इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहते हैं।