राम मंदिर चढ़ावा विवाद: भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने पप्पू यादव से माँगी माफी, मोदी के वीडियो की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने 1 अगस्त को नोएडा में पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के संसद में भगवा वेश धारण कर किए गए विरोध प्रदर्शन की कड़ी निंदा की और उनसे सार्वजनिक माफी की माँग की। यह विवाद अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर उठे विपक्षी प्रदर्शन से जुड़ा है।
मुख्य घटनाक्रम
शुक्रवार को संसद में पप्पू यादव भगवा कपड़े पहनकर पहुँचे और राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मुद्दा उठाया। इस सांकेतिक विरोध के तहत विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई सांसदों को दान पेटी में पैसे डालते देखा गया, जबकि पप्पू यादव ने सांकेतिक रूप से चढ़ावे की राशि अपनी जेब में डालने का प्रदर्शन किया। विपक्ष के कई सांसदों ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की माँग की।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने इस प्रदर्शन को 'निंदनीय, दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण' करार देते हुए कहा, "जिन्होंने भगवान राम के अस्तित्व को नकारा, जिन्होंने उनके जन्मस्थान पर भव्य राम मंदिर के निर्माण में बाधाएँ खड़ी कीं, जिन्होंने मंदिर के बजाय वहाँ अस्पताल बनाने का सुझाव दिया — उनसे और किसी चीज की उम्मीद भी नहीं की जा सकती।" उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश और दुनिया के हिंदू इस प्रदर्शन से आहत हैं।
आस्था और आलोचना का सवाल
गुरु प्रकाश ने स्पष्ट किया कि BJP संस्कार और संविधान के अनुसार स्वस्थ आलोचना का स्वागत करती है, किंतु धार्मिक आस्था का अपमान स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पप्पू यादव से सार्वजनिक माफी माँगने की अपील की।
पीएम मोदी के वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया
जंतर-मंतर विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश की सराहना करते हुए गुरु प्रकाश ने कहा, "प्रधानमंत्री बहुत बड़े दिल वाले इंसान हैं। दशकों से उन्होंने सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन में त्याग, तपस्या और बलिदान की भावना दिखाई है। यह वीडियो साफ तौर पर दिखाता है कि कैसे गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ इस पूरे मामले का दीर्घकालिक समाधान निकाला जा सकता है।"
क्या होगा आगे
यह विवाद संसद के मानसून सत्र के दौरान राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकता है। राम मंदिर चढ़ावे की कथित चोरी का मामला पहले से ही जाँच के दायरे में बताया जा रहा है। विपक्ष की माँग है कि इस पर संसद में विस्तृत चर्चा हो, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे आस्था के अपमान के रूप में देख रहा है।