पप्पू यादव का पलटवार: 'भगवा पहनना अपमान नहीं', जान से मारने की मिल रही हैं अंतरराष्ट्रीय धमकियाँ
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सोमवार, 4 अगस्त 2025 को संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए उन आरोपों को सिरे से खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि भगवा वस्त्र पहनकर किए गए नाटकीय विरोध-प्रदर्शन के दौरान उन्होंने संतों या सनातन धर्म का अपमान किया। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि विवाद के बाद से उन्हें अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल के ज़रिए जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं।
विवाद की जड़: संसद में हुआ नाटक
यह पूरा विवाद शुक्रवार को संसद परिसर के मकर द्वार के सामने हुए एक विरोध-प्रदर्शन से उपजा है। इस नाटक का उद्देश्य अयोध्या के राम मंदिर के लिए एकत्र किए गए दान में कथित हेराफेरी को उजागर करना था।
नाटक के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी सांसदों को दान पेटी में पैसे डालते देखा गया। गेरुआ वस्त्र धारण किए पप्पू यादव ने कथित चोरी को दर्शाने के लिए प्रतीकात्मक रूप से पैसे अपनी जेब में डाले। फैजाबाद (अयोध्या) से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
पप्पू यादव का बचाव: 'किसी का नाम नहीं लिया'
यादव ने तर्क दिया कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान न तो किसी संत का नाम लिया, न किसी राजनीतिक दल का। उन्होंने कहा, 'इसमें अपमान की क्या बात है? मैंने न तो किसी को अपशब्द कहे और न ही किसी के खिलाफ कुछ बोला। जब मैंने भाजपा या आरएसएस का नाम ही नहीं लिया, तो पप्पू यादव ने क्या गलती की?'
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पूरा विपक्ष सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर एकजुट है, तब उन्हें अकेले निशाना बनाने के पीछे क्या मंशा है।
जान से मारने की धमकियाँ और आवास पर हमला
सांसद ने बताया कि विवाद के बाद से उन्हें खुलेआम धमकियाँ दी जा रही हैं। उनके शब्दों में, 'मुझे जान से मारने की धमकी देने वाली अंतरराष्ट्रीय कॉल आ रही हैं। वे बार-बार कह रहे हैं कि वे मुझे मार डालेंगे।'
उन्होंने यह भी कहा कि दो रात पहले एक ऐसे घर पर हमला हुआ जहाँ बच्चे मौजूद थे। इस संदर्भ में दिल्ली पुलिस ने रविवार को पप्पू यादव के आवास पर हुई एक घटना के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 221, 121(1), 132 और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार जाँच जारी है।
एफआईआर और कानूनी पेचीदगियाँ
प्रदर्शन के अगले दिन शनिवार को वाराणसी के कोतवाली पुलिस स्टेशन में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। वाराणसी पुलिस के अनुसार, यह शिकायत कई साधुओं ने दर्ज कराई, जिन्होंने आरोप लगाया कि नाटक से सनातन धर्म का अपमान हुआ और धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं।
पुलिस उपायुक्त (काशी जोन) गौरव बंसवाल ने बताया कि यह एफआईआर BNS की धाराओं 196, 299, 302 और 3(5) के तहत दर्ज की गई है।
देशभर में प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
इस विवाद की आँच कई शहरों तक पहुँची। भोपाल में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और व्यापमं चौराहे से लिंक रोड तक मार्च करने का प्रयास किया। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च रोका और धक्का-मुक्की भी हुई।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। दोनों पक्षों में कानूनी और राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।