पप्पू यादव के भगवा वस्त्र पर संसद में बवाल, भाजपा बोली — 'सनातन का अपमान'
सारांश
मुख्य बातें
संसद परिसर में 31 जुलाई को उस समय तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया जब पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में दान-राशि की कथित हेराफेरी के विरोध में गेरुआ वस्त्र पहनकर प्रदर्शन किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस कदम को सनातन धर्म का अपमान करार देते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और समाजवादी पार्टी (SP) पर इसमें सहभागिता का आरोप लगाया। विपक्ष ने पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि दान-चोरी के मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
भाजपा नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने कहा, 'देश की आज़ादी से लेकर आज तक, कांग्रेस और अब प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और पूरे विपक्ष ने लगातार संतों, भगवा और सनातन का अपमान किया है। जिस तरह से उन्होंने अपने विरोध-प्रदर्शन में भगवान राम और चंदे का ज़िक्र करके और 'कालनेमि' जैसा व्यवहार करके सनातन का अपमान करने की कोशिश की... देश की जनता यह सब देख रही है और अगले चुनाव में उन्हें सबक सिखाएगी।'
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने पप्पू यादव को 'साधु के भेष' में तैयार किया और उन्हें 'चंदा चोर' की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि वोटों के लिए सनातन को बदनाम करना एक ऐसा अपराध है जिसे माफ नहीं किया जाएगा।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि भगवा कपड़े पहनने पर कोई आपत्ति नहीं है, किंतु संत के वेश में यह आरोप लगाना कि संत पैसे चुराते हैं, परंपरा का अपमान है। उन्होंने कहा, 'इस तरह का गलत बर्ताव संसद में नहीं हो सकता।' भाजपा सांसद बृज लाल ने भी इसे संतों, ऋषियों और हिंदू समाज का अपमान बताते हुए चेतावनी दी कि संत समाज पप्पू यादव को माफ नहीं करेगा।
विपक्ष का पलटवार
समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने पप्पू यादव का बचाव करते हुए कहा कि वे राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य की हैसियत से प्रदर्शन में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों द्वारा चढ़ावे की चोरी के आरोपों के बावजूद मुख्य आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने के विरोध में यह प्रदर्शन किया गया।
SP सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा, 'हमने कभी किसी का अपमान करने की कोशिश नहीं की, न ही हमारा ऐसा कोई इरादा था और न ही कभी ऐसा हो सकता है। हम सभी के दिलों में भगवान श्री राम के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा है।' उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि दान-चोरी का मामला सामने आए लगभग दो महीने बीत जाने के बाद भी क्या कार्रवाई हुई है।
कांग्रेस का आरोप
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा और आरएसएस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ाई गई दान-राशि का दुरुपयोग किया गया, पवित्र स्थल की भूमि के लिए आवंटित धन का गबन हुआ और मंदिर निर्माण में 40 प्रतिशत कमीशन लिया गया। उन्होंने कहा, 'भाजपा भगवान राम के नाम पर सत्ता में आई और फिर उसी पैसे का गलत इस्तेमाल किया जो भगवान राम को चढ़ाया गया था।'
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दान-प्रबंधन में अनियमितता के आरोप पिछले कुछ महीनों में सामने आए हैं। विपक्ष इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर लगातार उठाता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब 2026 के राज्य चुनावों से पहले हिंदुत्व और सनातन धर्म से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति में केंद्रीय स्थान बनाए हुए हैं। भाजपा और विपक्ष दोनों इस विवाद को अपने-अपने राजनीतिक आख्यान के अनुकूल इस्तेमाल करने की कोशिश में हैं।
आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष दान-चोरी के आरोपों पर सरकार से जवाब माँगता रहेगा और भाजपा सनातन-अपमान के मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।