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अगस्त में CPI महंगाई 4.82% पर, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल; RBI नीति पर टिकी नज़रें

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अगस्त में CPI महंगाई 4.82% पर, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल; RBI नीति पर टिकी नज़रें

सारांश

अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82% पर पहुँच गई — प्याज 48%, अदरक 74% महँगा हुआ, ग्रामीण खाद्य महंगाई 6.13% तक गई। केयरएज रेटिंग्स की चेतावनी: मौसम और वैश्विक ऊर्जा जोखिम बरकरार हैं, और अक्टूबर की RBI बैठक दरों की दिशा तय करेगी।

मुख्य बातें

CPI महंगाई अगस्त 2026 में 4.82 प्रतिशत पर पहुँची, जो जुलाई में 4.5 प्रतिशत थी।
खाद्य महंगाई 5.66 प्रतिशत ; ग्रामीण क्षेत्रों में 6.13 प्रतिशत दर्ज।
अदरक 73.82% , प्याज 48.27% और लहसुन 43.60% महँगे हुए; टमाटर 31.09% और आलू 13.14% सस्ते।
चाँदी के आभूषणों में 107.11% और सोना-हीरा-प्लैटिनम में 35.53% की बढ़ोतरी।
केयरएज रेटिंग्स का अनुमान: वित्त वर्ष 2026-27 में औसत महंगाई लगभग 5 प्रतिशत रह सकती है।
RBI की अक्टूबर मौद्रिक नीति समीक्षा पर बाज़ार की विशेष नज़र; ब्याज दर वृद्धि की संभावना बढ़ी।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई अगस्त 2026 में 4.82 प्रतिशत पर पहुँच गई, जो जुलाई 2026 में 4.5 प्रतिशत थी। केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा के अनुसार, इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं की ऊँची कीमतें हैं और आगे भी मौसम संबंधी जोखिम तथा बाहरी कारक महंगाई के दबाव को बनाए रख सकते हैं।

खाद्य महंगाई के आँकड़े

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा उद्धृत आँकड़ों के अनुसार, खाद्य महंगाई जुलाई के 5.52 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 5.66 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर रही, जहाँ खाद्य महंगाई 6.13 प्रतिशत तक पहुँची।

प्रमुख खाद्य वस्तुओं में अदरक की कीमतों में 73.82 प्रतिशत, प्याज में 48.27 प्रतिशत और लहसुन में 43.60 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई। इसके विपरीत, टमाटर 31.09 प्रतिशत और आलू 13.14 प्रतिशत सस्ते हुए, जिससे आंशिक राहत मिली।

मौसम और आपूर्ति का संकट

रजनी सिन्हा ने बताया कि देर से आए मानसून के कारण प्याज की नई फसल की बुवाई प्रभावित हुई, जिससे बाज़ार में आवक में देरी हुई और कीमतों पर दबाव बढ़ा। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण खपत पहले से ही दबाव में है।

चीनी की कीमतों पर दबाव का कारण गन्ने की अपेक्षा से कम पैदावार और एथेनॉल उत्पादन की ओर बढ़ते रुझान को बताया गया, जिससे घरेलू आपूर्ति सीमित हुई। चावल और खाद्य तेल की कीमतें भी ऊँची बनी हुई हैं।

कोर महंगाई और कीमती धातुएँ

कोर महंगाई जुलाई के 4.2 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 4.4 प्रतिशत हो गई। हालाँकि, कीमती धातुओं को छोड़कर कोर महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रही और 3.3 प्रतिशत पर बनी रही।

व्यक्तिगत देखभाल और विविध वस्तु एवं सेवा श्रेणी में महंगाई 15.21 प्रतिशत के ऊँचे स्तर पर रही। इसका मुख्य कारण वैश्विक बाज़ार में सोने-चाँदी की कीमतों में उछाल रहा — चाँदी के आभूषणों में 107.11 प्रतिशत और सोना, हीरा एवं प्लैटिनम आभूषणों में 35.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

उद्योग और व्यापार पर असर

PHDCCI के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज़ वृद्धि से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, रेस्तरां और संबंधित सेवाओं पर लागत का दबाव और बढ़ सकता है। संगठन के महासचिव एवं CEO रणजीत मेहता ने चेतावनी दी कि कीमती धातुओं की ऊँची कीमतें आगामी त्योहारी और विवाह सीज़न में माँग को प्रभावित कर सकती हैं।

RBI नीति और आगे की राह

केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुँच सकती है और पूरे वित्त वर्ष में इसका औसत लगभग 5 प्रतिशत रह सकता है। रजनी सिन्हा के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) आगे भी आँकड़ों के आधार पर निर्णय लेगी।

सिन्हा ने कहा, 'यदि महंगाई में लगातार बढ़ोतरी बनी रहती है तो आने वाले महीनों में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना मजबूत हो सकती है।' उन्होंने यह भी कहा कि अक्टूबर में होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा पर बाज़ार की विशेष नज़र रहेगी, क्योंकि दुनिया के कई प्रमुख केंद्रीय बैंक पहले ही सख्त मौद्रिक नीति की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। गौरतलब है कि वैश्विक संदर्भ में यह महंगाई की लहर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है — उभरती अर्थव्यवस्थाओं में खाद्य कीमतों का दबाव केंद्रीय बैंकों के लिए एक साझा चुनौती बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी संरचना परेशान करने वाली है — प्याज, अदरक और लहसुन जैसी बुनियादी रसोई सामग्री का महँगा होना ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्ग को सबसे ज़्यादा मारता है, जहाँ खाद्य खर्च का हिस्सा आय में सबसे बड़ा होता है। कीमती धातुओं को 'कोर' से अलग करके 3.3 प्रतिशत दिखाना तकनीकी रूप से सही है, लेकिन त्योहारी सीज़न में सोने-चाँदी की 35-107 प्रतिशत महंगाई आम उपभोक्ता के लिए कोई राहत नहीं। असली सवाल यह है कि क्या RBI महंगाई के इस मिश्रित स्वरूप — जिसमें आपूर्ति-जनित खाद्य दबाव और माँग-जनित कोर दबाव दोनों हैं — पर ब्याज दर बढ़ाकर सही जवाब दे पाएगा, या यह दवा बीमारी से ज़्यादा नुकसानदेह होगी।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगस्त 2026 में CPI महंगाई कितनी रही?
अगस्त 2026 में CPI आधारित खुदरा महंगाई 4.82 प्रतिशत रही, जो जुलाई 2026 के 4.5 प्रतिशत से अधिक है। इसका मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं — विशेषकर प्याज, अदरक, लहसुन और चीनी — की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है।
अगस्त में कौन-सी खाद्य वस्तुएँ सबसे अधिक महँगी हुईं?
अदरक की कीमतों में 73.82 प्रतिशत, प्याज में 48.27 प्रतिशत और लहसुन में 43.60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके विपरीत, टमाटर 31.09 प्रतिशत और आलू 13.14 प्रतिशत सस्ते हुए।
प्याज और चीनी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा के अनुसार, देर से आए मानसून ने प्याज की नई फसल की बुवाई को प्रभावित किया, जिससे बाज़ार में आवक घटी। चीनी के मामले में गन्ने की कम पैदावार और एथेनॉल उत्पादन की ओर बढ़ते रुझान से घरेलू उपलब्धता कम हुई है।
RBI अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में क्या कर सकता है?
केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, यदि महंगाई में लगातार बढ़ोतरी बनी रही तो आने वाले महीनों में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना मज़बूत हो सकती है। अक्टूबर की RBI मौद्रिक नीति समीक्षा पर बाज़ार की विशेष नज़र रहेगी, क्योंकि वैश्विक केंद्रीय बैंक पहले ही सख्त नीति की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं।
पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई का अनुमान क्या है?
केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुँच सकती है और पूरे वित्त वर्ष में औसत महंगाई लगभग 5 प्रतिशत रह सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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