अगस्त में CPI महंगाई 4.82% पर, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल; RBI नीति पर टिकी नज़रें
सारांश
मुख्य बातें
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई अगस्त 2026 में 4.82 प्रतिशत पर पहुँच गई, जो जुलाई 2026 में 4.5 प्रतिशत थी। केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा के अनुसार, इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं की ऊँची कीमतें हैं और आगे भी मौसम संबंधी जोखिम तथा बाहरी कारक महंगाई के दबाव को बनाए रख सकते हैं।
खाद्य महंगाई के आँकड़े
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा उद्धृत आँकड़ों के अनुसार, खाद्य महंगाई जुलाई के 5.52 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 5.66 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर रही, जहाँ खाद्य महंगाई 6.13 प्रतिशत तक पहुँची।
प्रमुख खाद्य वस्तुओं में अदरक की कीमतों में 73.82 प्रतिशत, प्याज में 48.27 प्रतिशत और लहसुन में 43.60 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई। इसके विपरीत, टमाटर 31.09 प्रतिशत और आलू 13.14 प्रतिशत सस्ते हुए, जिससे आंशिक राहत मिली।
मौसम और आपूर्ति का संकट
रजनी सिन्हा ने बताया कि देर से आए मानसून के कारण प्याज की नई फसल की बुवाई प्रभावित हुई, जिससे बाज़ार में आवक में देरी हुई और कीमतों पर दबाव बढ़ा। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण खपत पहले से ही दबाव में है।
चीनी की कीमतों पर दबाव का कारण गन्ने की अपेक्षा से कम पैदावार और एथेनॉल उत्पादन की ओर बढ़ते रुझान को बताया गया, जिससे घरेलू आपूर्ति सीमित हुई। चावल और खाद्य तेल की कीमतें भी ऊँची बनी हुई हैं।
कोर महंगाई और कीमती धातुएँ
कोर महंगाई जुलाई के 4.2 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 4.4 प्रतिशत हो गई। हालाँकि, कीमती धातुओं को छोड़कर कोर महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रही और 3.3 प्रतिशत पर बनी रही।
व्यक्तिगत देखभाल और विविध वस्तु एवं सेवा श्रेणी में महंगाई 15.21 प्रतिशत के ऊँचे स्तर पर रही। इसका मुख्य कारण वैश्विक बाज़ार में सोने-चाँदी की कीमतों में उछाल रहा — चाँदी के आभूषणों में 107.11 प्रतिशत और सोना, हीरा एवं प्लैटिनम आभूषणों में 35.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
उद्योग और व्यापार पर असर
PHDCCI के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज़ वृद्धि से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, रेस्तरां और संबंधित सेवाओं पर लागत का दबाव और बढ़ सकता है। संगठन के महासचिव एवं CEO रणजीत मेहता ने चेतावनी दी कि कीमती धातुओं की ऊँची कीमतें आगामी त्योहारी और विवाह सीज़न में माँग को प्रभावित कर सकती हैं।
RBI नीति और आगे की राह
केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुँच सकती है और पूरे वित्त वर्ष में इसका औसत लगभग 5 प्रतिशत रह सकता है। रजनी सिन्हा के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) आगे भी आँकड़ों के आधार पर निर्णय लेगी।
सिन्हा ने कहा, 'यदि महंगाई में लगातार बढ़ोतरी बनी रहती है तो आने वाले महीनों में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना मजबूत हो सकती है।' उन्होंने यह भी कहा कि अक्टूबर में होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा पर बाज़ार की विशेष नज़र रहेगी, क्योंकि दुनिया के कई प्रमुख केंद्रीय बैंक पहले ही सख्त मौद्रिक नीति की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। गौरतलब है कि वैश्विक संदर्भ में यह महंगाई की लहर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है — उभरती अर्थव्यवस्थाओं में खाद्य कीमतों का दबाव केंद्रीय बैंकों के लिए एक साझा चुनौती बनता जा रहा है।