सीईसी ज्ञानेश कुमार की भूटान यात्रा: राजा और PM से मुलाकात, राष्ट्रीय मतदाता दिवस में मुख्य अतिथि
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने 14 सितंबर 2026 को भूटान की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा शुरू की, जिसका उद्देश्य भारत और भूटान के बीच चुनावी संस्थागत सहयोग को मजबूत करना है। इस यात्रा के दौरान वह भूटान के राजा और प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे तथा देश के राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
यात्रा का कार्यक्रम
आधिकारिक बयान के अनुसार, मंगलवार को पारो स्थित जिग्मे सिंग्ये वांगचुक स्कूल ऑफ लॉ में भूटान का राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाएगा, जहाँ सीईसी ज्ञानेश कुमार मुख्य अतिथि की भूमिका निभाएंगे। बुधवार को वह थिम्पू में भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग टोबगे से द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
यात्रा के दौरान ज्ञानेश कुमार भूटान के वरिष्ठ सिविल सेवकों के साथ भी संवाद करेंगे। इस दौरे के अंतर्गत थिम्पू में भूटान के राजा से भी मुलाकात निर्धारित है।
संस्थागत सहयोग को मिलेगी गति
भारत का चुनाव आयोग (ECI) लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और चुनाव प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से विभिन्न देशों के साथ जुड़ता रहा है। यह यात्रा भारत-भूटान के बीच चल रहे आपसी सहयोग की कड़ी में एक और कदम है। गौरतलब है कि दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण से जुड़ा साझेदारी का इतिहास रहा है।
IEVP 2026 और EVM डेमो
इस यात्रा से पहले, इंटरनेशनल इलेक्शन विजिटर्स प्रोग्राम 2026 (IEVP 2026) के तहत 23 देशों के 43 प्रतिनिधियों को नई दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) का लाइव डेमो और मॉक पोल दिखाया गया। इन प्रतिनिधियों में दिल्ली स्थित पाँच विदेशी मिशनों के राजनयिक भी शामिल थे।
कार्यक्रम के पहले चरण में प्रतिनिधियों ने 8-9 अप्रैल को असम, केरल और पुडुचेरी का दौरा कर मतदान प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा। भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं चुनाव प्रबंधन संस्थान (IIIDEM) में इस डेमो का आयोजन किया गया।
विशेषज्ञ का बयान
IIIDEM के महानिदेशक राकेश कुमार वर्मा ने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए चुनावी ईमानदारी, समावेशिता और संस्थागत उत्कृष्टता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत का तकनीक-आधारित और पारदर्शी चुनावी ढाँचा अन्य लोकतंत्रों के लिए एक उपयोगी संदर्भ बन सकता है।
आगे की राह
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत वैश्विक स्तर पर अपनी चुनावी साख को और सुदृढ़ करने की दिशा में सक्रिय है। भविष्य में दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच और अधिक तकनीकी आदान-प्रदान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।