मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बडगाम के बीएलओ से मुलाकात की, चुनावी पारदर्शिता पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 29 जून 2026 को जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से सीधी बातचीत की और उन्हें लोकतंत्र की रीढ़ बताते हुए उनके समर्पण की सराहना की। यह मुलाकात उनके केंद्र शासित प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन हुई, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारियों का जायजा लेना और मतदाता जागरूकता को बल देना है।
मुख्य घटनाक्रम
मीडिया से बातचीत में सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'मैं जम्मू-कश्मीर के वोटरों से लोकतंत्र में हिस्सा लेने की अपील करना चाहता हूँ। हमने बडगाम में बूथ लेवल ऑफिसर्स से बातचीत की है, जो लोकतंत्र के स्तंभ हैं।' उन्होंने बीएलओ की लगन और कड़ी मेहनत की खुलकर प्रशंसा की।
सीईसी ने इस दौरान मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों, चुनावों की पारदर्शिता और राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों द्वारा की जाने वाली मतगणना ऑडिटिंग की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की।
दौरे का उद्देश्य और कार्यक्रम
यह दौरा भारत निर्वाचन आयोग की उन निरंतर कोशिशों का हिस्सा है, जिनका मकसद मतदाताओं और चुनावी हितधारकों के साथ जुड़ाव को मजबूत करना, जमीनी तैयारी को बेहतर बनाना और लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। घाटी में सीईसी कई कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं — जिनमें बीएलओ से संवाद, चुनावी हितधारकों से भेंट और जमीनी चुनाव मशीनरी की समीक्षा शामिल है।
स्वागत और प्रशासनिक समन्वय
इससे पहले रविवार को शेख-उल-आलम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजीव वर्मा, बडगाम के डिप्टी कमिश्नर अतहर आमिर खान और प्रशासन व चुनाव विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीईसी का स्वागत किया। दौरे के दौरान जमीनी स्तर पर चल रही कई चुनावी पहलों की भी समीक्षा की गई।
ज्ञानेश कुमार: पद और पृष्ठभूमि
ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी को भारत के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में पदभार संभाला। इस शीर्ष पद पर आने से पहले वे 15 मार्च 2024 से निर्वाचन आयुक्त के रूप में कार्यरत थे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब जम्मू-कश्मीर में चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान केंद्रित है।
आगे की राह
सीईसी के इस दौरे से जम्मू-कश्मीर में चुनावी तंत्र को और सुदृढ़ करने की दिशा में संकेत मिलते हैं। बीएलओ के साथ सीधे संवाद और पारदर्शिता पर बल देने से मतदाता भागीदारी बढ़ाने की कोशिशों को नई गति मिलने की उम्मीद है।