मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हर्षिल में किया पोलिंग बूथ निरीक्षण, भारत-चीन सीमा तक पहुँची चुनाव आयोग की नज़र
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार शनिवार, 24 मई 2025 को उत्तराखंड के सीमांत जिले उत्तरकाशी पहुँचे, जहाँ उन्होंने भारत-चीन सीमा से सटे दूरस्थ गाँव हर्षिल में स्थापित पोलिंग बूथ का स्थलीय निरीक्षण किया। यह दौरा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की समीक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों में चुनावी व्यवस्थाओं की ज़मीनी स्थिति जाँचने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
हर्षिल में बूथ निरीक्षण और बीएलओ से संवाद
ज्ञानेश कुमार ने हर्षिल पहुँचकर पोलिंग बूथ का विस्तृत जायज़ा लिया और बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) मिंटू देवी के साथ एसआईआर मैपिंग एवं अन्य चुनावी प्रक्रियाओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बीएलओ मिंटू देवी के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की और एसआईआर की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने के लिए उन्हें बधाई दी। यह दुर्गम और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में ज़मीनी स्तर के चुनाव कर्मियों की सक्रियता का उल्लेखनीय उदाहरण माना जा रहा है।
झाला हेलीपैड पर स्वागत, अधिकारियों की उपस्थिति
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के झाला हेलीपैड पर उतरते ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, एडीएम मुक्ता मिश्र एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने पौधा भेंटकर उनका स्वागत किया। इसके बाद वे अधिकारियों के साथ हर्षिल क्षेत्र की ओर रवाना हुए।
गंगोत्री धाम में पूजा और समीक्षा बैठक
हर्षिल निरीक्षण के पश्चात् ज्ञानेश कुमार गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुए, जहाँ उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने एसआईआर की प्रगति को लेकर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की। अधिकारियों के अनुसार, यह बैठक सीमांत क्षेत्रों में मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी तैयारियों को परखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रही।
हर्षिल: सीमांत गाँव जहाँ लोकतंत्र पहुँचता है पहाड़ों तक
हर्षिल उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी के तट पर बसा एक सुदूर पर्वतीय गाँव है, जो अपने सेब के बागों, देवदार के घने जंगलों और बर्फ़ से ढके शिखरों के कारण 'मिनी स्विट्ज़रलैंड' के नाम से जाना जाता है। यह गंगोत्री धाम के मार्ग पर स्थित है और चारधाम यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव भी है। सर्दियों में भारी हिमपात के दौरान माँ गंगा की प्रतिमा को हर्षिल के निकट स्थित मुखवा गाँव में स्थानांतरित किया जाता है, जहाँ श्रद्धालु पूजा करते हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में लोकतंत्र को मज़बूत करने की दिशा में कदम
चुनाव आयोग के इस दौरे को दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों में भी इस सक्रियता को लेकर उत्साह देखा गया। यह दौरा यह भी रेखांकित करता है कि भारत निर्वाचन आयोग की पहुँच अब केवल शहरी केंद्रों तक सीमित नहीं, बल्कि देश की सबसे दूरस्थ सीमाओं तक फैल चुकी है।