विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: हिमंता बिस्वा सरमा बोले — 1947 के बंटवारे के जख्म कभी नहीं भूलेंगे
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 14 अगस्त 2026 को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर 1947 के विभाजन के पीड़ितों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को उस दर्दनाक अध्याय की पीड़ा और बलिदान को कभी विस्मृत नहीं करना चाहिए।
मुख्यमंत्री का संदेश
सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट में सरमा ने लिखा, 'हम मां भारती पर मुस्लिम लीग द्वारा थोपे गए जबरन विभाजन के घावों को कभी नहीं भूलेंगे, जिसमें अनगिनत बेगुनाहों की जान गई।' उन्होंने एक तस्वीर भी साझा की जिसमें अंकित था कि विभाजन के घाव आज भी जिंदा हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ
1947 का विभाजन आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े जन-विस्थापनों में से एक था। सांप्रदायिक हिंसा की आग में लाखों परिवार बिछड़ गए, पैतृक घर छूट गए और नवगठित सीमाओं के दोनों ओर समुदायों को असह्य पीड़ा सहनी पड़ी। यह ऐसे समय में आया है जब देश 78वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर खड़ा था।
राष्ट्रीय एकता की अपील
मुख्यमंत्री सरमा ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे विभाजन के पीड़ितों की स्मृति को जीवित रखें और देश की एकता एवं सुरक्षा को खतरे में डालने वाली शक्तियों के प्रति सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि इस दिवस को मनाने का मूल उद्देश्य उन आम लोगों की पीड़ा को उजागर करना है जिन्हें अपनी जड़ों से उखड़कर नया जीवन शुरू करने पर विवश होना पड़ा।
स्मृति दिवस का महत्व
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस प्रतिवर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है। सरमा ने कहा कि अतीत की त्रासदियों से सीख लेकर ही राष्ट्र एक सुरक्षित और एकजुट भविष्य की ओर बढ़ सकता है। गौरतलब है कि यह दिवस उन करोड़ों लोगों की याद में समर्पित है जिनका जीवन 1947 की उथल-पुथल में हमेशा के लिए बदल गया।