विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: CM मोहन यादव ने 1947 की त्रासदी को याद कर एकता का संकल्प दिलाया
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 14 अगस्त 2026 को भोपाल के शौर्य स्मारक में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में देशवासियों से 1947 के बंटवारे की पीड़ा को हृदय में बनाए रखने और स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय एकता, भाईचारे तथा देशभक्ति के नए संकल्प के साथ मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बंटवारे का दर्द हमें देश की अखंडता की रक्षा के महत्व की सदा याद दिलाता रहेगा।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री यादव ने शौर्य स्मारक पर भारत माता को पुष्पांजलि अर्पित की और 'प्रवासी सेनानी वीथी' का उद्घाटन किया। यह गैलरी भारतीय प्रवासियों के स्वतंत्रता संग्राम, बलिदान और योगदान को समर्पित है। कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हमें प्रार्थना करनी चाहिए कि देश को फिर कभी ऐसी घटना न देखनी पड़े जिसमें भारत को अपने ही किसी हिस्से से अलग होना पड़े।'
1947 की त्रासदी का स्मरण
1947 के विभाजन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों समेत लाखों लोगों ने असहनीय पीड़ा झेली और अनगिनत परिवारों को अपना घर-बार छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने इस ऐतिहासिक त्रासदी से सीख लेकर एकता और भाईचारे को और मज़बूत करने का आह्वान किया।
हर घर तिरंगा अभियान
मुख्यमंत्री यादव ने 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले 9 से 17 अगस्त तक चलाए जा रहे 'हर घर तिरंगा' अभियान में जनभागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर यह अभियान एक राष्ट्रव्यापी उत्सव बन गया है और हर जिले व शहर में तिरंगा शान से लहरा रहा है। पूरे मध्य प्रदेश में तिरंगा यात्राएँ आयोजित की जा रही हैं जिनमें लोग उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।
विकसित भारत 2047 का संकल्प
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले साढ़े बारह वर्षों में तेज़ गति से प्रगति की है और 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। उन्होंने 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र को भारत की वैश्विक पहचान का आधार बताया।
आगे की राह
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का यह आयोजन हर वर्ष 14 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। मुख्यमंत्री यादव ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस दिन को केवल स्मरण का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता को और सुदृढ़ करने के संकल्प का अवसर मानें।