14 अगस्त 2026
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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर राजनाथ सिंह की श्रद्धांजलि: 'यह संघर्ष, साहस और त्याग की याद है'

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर राजनाथ सिंह की श्रद्धांजलि: 'यह संघर्ष, साहस और त्याग की याद है'

सारांश

14 अगस्त को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर 1947 के विभाजन में जान गंवाने वाले और विस्थापित हुए लाखों परिवारों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने इस दिन को इतिहास से सीख लेकर एकता और सामाजिक सद्भाव को मज़बूत करने की प्रेरणा का अवसर बताया।

मुख्य बातें

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 14 अगस्त 2026 को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर 1947 के विभाजन के पीड़ितों और विस्थापितों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि यह दिवस केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेने का भी अवसर है।
रक्षामंत्री ने एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनशीलता को मज़बूत करने का आह्वान किया।
उन्होंने मज़बूत, समरस और संवेदनशील भारत बनाने का संकल्प दोहराया, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न दोहराई जाए।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस प्रतिवर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 2021 में हुई थी।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 14 अगस्त 2026 को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर उन लाखों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1947 के भारत विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाए या विस्थापन की असहनीय पीड़ा सही। उन्होंने कहा कि यह दिवस उस भयावह त्रासदी की याद दिलाता है, जिसने लाखों परिवारों के जीवन को गहरे दुख, विस्थापन और अनिश्चितता से भर दिया था।

विभाजन: केवल इतिहास नहीं, जीवित स्मृति

रक्षामंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का विभाजन महज इतिहास का एक पीड़ादायक अध्याय नहीं है। उनके अनुसार, यह उन अनगिनत लोगों के संघर्ष, साहस, त्याग और धैर्य की जीवंत स्मृति भी है, जिन्होंने उस कठिन दौर में अपना घर-परिवार, संपत्ति और अपने प्रियजनों को खो दिया। इसके बावजूद उन्होंने अपने जीवन को दोबारा संवारने और आगे बढ़ने का संकल्प नहीं छोड़ा।

विस्थापितों का संघर्ष और राष्ट्र-निर्माण में योगदान

राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया कि विभाजन की त्रासदी में विस्थापित हुए लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। अपनी जन्मभूमि से दूर जाकर उन्हें नए सिरे से जीवन शुरू करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अनेक परिवारों ने अपनों को खोया, लेकिन विपरीत हालात में भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और देश के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

रक्षामंत्री ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा, 'देश के विभाजन की विभीषिका में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात लोगों तथा अपनी जन्मभूमि और जड़ों से विस्थापित होने वाले अनगिनत परिवारों के प्रति मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।'

इतिहास से सीख: एक मज़बूत और समरस भारत का संकल्प

राजनाथ सिंह ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि इतिहास से सीख लेने का भी दिन है। उनके अनुसार, इतिहास की पीड़ाओं को केवल स्मृति में संजोकर रखना पर्याप्त नहीं — उनसे सबक लेकर एक ऐसा मज़बूत, समरस और संवेदनशील भारत बनाना ज़रूरी है, जहाँ भविष्य में किसी समाज को विभाजन जैसी त्रासदी का दंश दोबारा न झेलना पड़े।

एकता और सामाजिक सद्भाव का आह्वान

रक्षामंत्री ने देशवासियों से इस दुखद अध्याय को याद करते हुए एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनशीलता को और मज़बूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करना वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को यह समझने में मदद करता है कि देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखना कितना अनिवार्य है।

यह दिवस भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है, जहाँ विविधताओं के बावजूद समाज में आपसी विश्वास, भाईचारा और एकता कायम रहे। गौरतलब है कि 14 अगस्त को प्रतिवर्ष विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की परंपरा 2021 में शुरू हुई थी, जिससे विभाजन की पीड़ा को राष्ट्रीय स्मृति का स्थायी हिस्सा बनाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी सार्थकता तभी पूरी होती है जब स्मृति नीति में बदले। रक्षामंत्री का 'मज़बूत और समरस भारत' का आह्वान प्रेरणादायक है, परंतु आलोचकों का कहना है कि विभाजन की पीड़ा को राजनीतिक विमर्श से अलग रखकर ही इसे वास्तविक राष्ट्रीय स्मृति का दर्जा मिल सकता है। यह दिवस 2021 में घोषित हुआ, लेकिन विभाजन-पीड़ितों के पुनर्वास और उनके दस्तावेज़ीकरण पर ठोस नीतिगत कदम अभी भी सीमित हैं। स्मृति और जवाबदेही के बीच की यह खाई ही इस दिवस की असली परीक्षा है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस क्या है और यह कब मनाया जाता है?
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस प्रतिवर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है, जो 1947 के भारत विभाजन में जान गंवाने वाले और विस्थापित हुए लाखों लोगों की स्मृति को समर्पित है। इसकी शुरुआत 2021 में हुई थी।
राजनाथ सिंह ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर क्या कहा?
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह दिवस केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेने का अवसर है। उन्होंने विभाजन के सभी ज्ञात-अज्ञात पीड़ितों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की और एकता व सामाजिक सद्भाव को मज़बूत करने का आह्वान किया।
1947 के विभाजन का भारतीय परिवारों पर क्या असर पड़ा था?
1947 के विभाजन में लाखों परिवार अपने घर, संपत्ति और प्रियजनों से बिछड़ गए थे। विस्थापितों को नई जगह पर शून्य से जीवन शुरू करना पड़ा, और अनेक लोगों ने इस त्रासदी में अपने प्राण गंवाए।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का उद्देश्य क्या है?
इस दिवस का उद्देश्य विभाजन की पीड़ा को राष्ट्रीय स्मृति में जीवित रखना और वर्तमान व भावी पीढ़ियों को देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के महत्व का बोध कराना है। यह दिन एक ऐसे भारत के निर्माण की प्रेरणा देता है जहाँ ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
विभाजन में विस्थापित लोगों ने भारत के पुनर्निर्माण में क्या भूमिका निभाई?
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, विभाजन में विस्थापित हुए अनगिनत परिवारों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं छोड़ी और देश के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका संघर्ष और साहस भारतीय इतिहास का अभिन्न हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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