विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर राजनाथ सिंह की श्रद्धांजलि: 'यह संघर्ष, साहस और त्याग की याद है'
सारांश
मुख्य बातें
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 14 अगस्त 2026 को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर उन लाखों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1947 के भारत विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाए या विस्थापन की असहनीय पीड़ा सही। उन्होंने कहा कि यह दिवस उस भयावह त्रासदी की याद दिलाता है, जिसने लाखों परिवारों के जीवन को गहरे दुख, विस्थापन और अनिश्चितता से भर दिया था।
विभाजन: केवल इतिहास नहीं, जीवित स्मृति
रक्षामंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का विभाजन महज इतिहास का एक पीड़ादायक अध्याय नहीं है। उनके अनुसार, यह उन अनगिनत लोगों के संघर्ष, साहस, त्याग और धैर्य की जीवंत स्मृति भी है, जिन्होंने उस कठिन दौर में अपना घर-परिवार, संपत्ति और अपने प्रियजनों को खो दिया। इसके बावजूद उन्होंने अपने जीवन को दोबारा संवारने और आगे बढ़ने का संकल्प नहीं छोड़ा।
विस्थापितों का संघर्ष और राष्ट्र-निर्माण में योगदान
राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया कि विभाजन की त्रासदी में विस्थापित हुए लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। अपनी जन्मभूमि से दूर जाकर उन्हें नए सिरे से जीवन शुरू करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अनेक परिवारों ने अपनों को खोया, लेकिन विपरीत हालात में भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और देश के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रक्षामंत्री ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा, 'देश के विभाजन की विभीषिका में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात लोगों तथा अपनी जन्मभूमि और जड़ों से विस्थापित होने वाले अनगिनत परिवारों के प्रति मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।'
इतिहास से सीख: एक मज़बूत और समरस भारत का संकल्प
राजनाथ सिंह ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि इतिहास से सीख लेने का भी दिन है। उनके अनुसार, इतिहास की पीड़ाओं को केवल स्मृति में संजोकर रखना पर्याप्त नहीं — उनसे सबक लेकर एक ऐसा मज़बूत, समरस और संवेदनशील भारत बनाना ज़रूरी है, जहाँ भविष्य में किसी समाज को विभाजन जैसी त्रासदी का दंश दोबारा न झेलना पड़े।
एकता और सामाजिक सद्भाव का आह्वान
रक्षामंत्री ने देशवासियों से इस दुखद अध्याय को याद करते हुए एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनशीलता को और मज़बूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करना वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को यह समझने में मदद करता है कि देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखना कितना अनिवार्य है।
यह दिवस भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है, जहाँ विविधताओं के बावजूद समाज में आपसी विश्वास, भाईचारा और एकता कायम रहे। गौरतलब है कि 14 अगस्त को प्रतिवर्ष विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की परंपरा 2021 में शुरू हुई थी, जिससे विभाजन की पीड़ा को राष्ट्रीय स्मृति का स्थायी हिस्सा बनाया जा सके।