विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर PM मोदी का आह्वान: 'सद्भावना और एकजुटता की भावना को सशक्त करें'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त 2026 को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर देशवासियों को संबोधित करते हुए 1947 के विभाजन की त्रासदी में जीवन उजड़ने वाले लोगों के साहस और संकल्प को नमन किया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कई पोस्ट के ज़रिये राष्ट्रीय एकता और 'विकसित भारत' के निर्माण का आह्वान किया।
मुख्य संदेश
मोदी ने लिखा, 'आज हम विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मना रहे हैं। हम उन सभी लोगों के साहस को याद करते हैं जो विभाजन से प्रभावित हुए थे। यह इतिहास का वह दौर था जिसने कई जिंदगियां तहस-नहस कर दीं, परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खो दिया और भारी पीड़ा सही।' उन्होंने इस दिन को केवल स्मरण तक सीमित न रखते हुए इसे सामूहिक संकल्प का अवसर बताया।
पुनर्निर्माण की गाथा
प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों की जीवन-यात्रा को मानवीय जिजीविषा का प्रतीक बताया। उनके शब्दों में, 'इन मुश्किलों से उबरते हुए लोगों ने शून्य से अपनी जिंदगी फिर से बनाई, चुनौतियों को कामयाबी में बदला और देश की प्रगति में बड़ा योगदान दिया। उनकी जीवन-यात्राएं हमें इंसानी जज्बे की ताकत की याद दिलाती हैं।' यह स्मरण ऐसे समय में आया है जब देश 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर था।
एकजुटता और सद्भावना का आह्वान
एक अन्य पोस्ट में मोदी ने लिखा, 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।' उन्होंने प्रार्थना की कि यह दिन आपसी सद्भाव और भाईचारे के संकल्प को और मज़बूत करे।
संस्कृत सुभाषितम् का संदेश
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया — 'उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः। कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति।' इसका भावार्थ देते हुए उन्होंने लिखा कि परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल और नवाचार विकसित होते हैं। मनुष्य को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि साहस और निरंतर प्रयास के साथ लक्ष्य की ओर अग्रसर रहना चाहिए — क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का संदर्भ
14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत 2021 में हुई थी, जब केंद्र सरकार ने 1947 के विभाजन में विस्थापित हुए और जान गँवाने वाले लाखों लोगों की स्मृति को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का निर्णय लिया। यह दिन स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आता है, जो इसे ऐतिहासिक दृष्टि से और भी महत्त्वपूर्ण बनाता है। गौरतलब है कि विभाजन के दौरान अनुमानित 1 से 2 करोड़ लोग विस्थापित हुए थे और लाखों की जानें गईं।