विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: टोक्यो में भारतीय दूतावास ने दी 1947 के शहीदों को श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास ने 14 अगस्त 2026 को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर एक गरिमापूर्ण समारोह आयोजित किया, जिसमें 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन में जान गंवाने वाले लाखों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जापान में भारत की राजदूत नगमा मलिक ने प्रार्थना का दीप प्रज्वलित किया और उन सभी पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की जिन्होंने विभाजन की त्रासदी में अपना सब कुछ खो दिया।
समारोह का मुख्य घटनाक्रम
दूतावास परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विभाजन के प्रत्यक्षदर्शियों की यादों और जीवन-कहानियों पर केंद्रित एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य उन लोगों के अदम्य साहस को रेखांकित करना था जिन्होंने विस्थापन और असीम पीड़ा के बावजूद अपना जीवन नए सिरे से खड़ा किया। दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हमने उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने अपनी जान गंवाई। राजदूत मलिक ने प्रार्थना का दीप जलाया और विभाजन के कारण कठिनाइयां झेलने और जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की।'
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का महत्व
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन 1947 में हुए भारत विभाजन से जुड़ी पीड़ा, विस्थापन और जान-माल के नुकसान की स्मृति को जीवित रखने के लिए समर्पित है। गौरतलब है कि विभाजन के कारण आधुनिक इतिहास में सबसे बड़े पैमाने पर मानव-प्रवासन हुआ था — लाखों लोग नवगठित देशों की सीमाएं पार करने को मजबूर हुए और व्यापक सांप्रदायिक हिंसा ने अनगिनत परिवारों को तहस-नहस कर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विभाजन-पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, 'आज हम विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मना रहे हैं। हम उन सभी लोगों के साहस को याद करते हैं जो विभाजन से प्रभावित हुए थे। यह इतिहास का वह दौर था जिसने कई जिंदगियां तहस-नहस कर दीं, परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खो दिया और भारी पीड़ा सही।' उन्होंने आगे कहा कि इन मुश्किलों से उबरते हुए लोगों ने शून्य से अपनी जिंदगी फिर से बनाई और देश की प्रगति में बड़ा योगदान दिया।
विदेश मंत्री जयशंकर का संदेश
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी इस अवसर पर विभाजन की मानवीय और भू-राजनीतिक विरासत को याद किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'विभाजन विभीषिका दिवस पर, बंटवारे के कारण हुई भारी मानवीय तकलीफों और दूरगामी भूराजनीतिक नतीजों को पहचानें। उन लोगों की हिम्मत को सलाम जिन्होंने अपनी जिंदगी फिर से शुरू की, लेकिन हमें अपने इतिहास के इस दौर से मिले दर्दनाक सबक भी याद रखने चाहिए।'
आगे की राह
यह इस दिवस का एक और वर्ष है जब विदेशों में भारतीय दूतावास सक्रिय रूप से इस स्मृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जीवित रख रहे हैं — यह संकेत है कि विभाजन की पीड़ा केवल उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक भारतीय समुदाय की सामूहिक चेतना का हिस्सा बन चुकी है।