14 अगस्त 2026
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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: जेपी नड्डा, जयशंकर और कई मुख्यमंत्रियों ने 1947 के पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: जेपी नड्डा, जयशंकर और कई मुख्यमंत्रियों ने 1947 के पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि

सारांश

14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर जेपी नड्डा, एस. जयशंकर, मनोज सिन्हा, हिमंता बिस्वा सरमा, विष्णु देव साय और देवेंद्र फडणवीस समेत कई नेताओं ने 1947 के बंटवारे में जान गंवाने वाले और विस्थापित हुए लाखों लोगों को श्रद्धांजलि दी और राष्ट्रीय एकता का संकल्प दोहराया।

मुख्य बातें

14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर देशभर के नेताओं ने 1947 के बंटवारे के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी।
केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि धर्म के नाम पर हुए बंटवारे ने रक्तपात और विस्थापन के ज़रिए समाज को गहरी चोट पहुँचाई।
जयशंकर ने बंटवारे की मानवीय पीड़ा और उसके दूरगामी भू-राजनीतिक नतीजों को याद करने का आह्वान किया।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा , असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा , छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
यह दिवस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2021 में घोषित किया गया था।

14 अगस्त को मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने 1947 के बंटवारे में हुई हिंसा, रक्तपात और विस्थापन के पीड़ितों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने एकमत से कहा कि यह दिन राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को सर्वोपरि रखने का संकल्प दिलाता है।

जेपी नड्डा का संदेश

केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस, हमें उन अनगिनत पीड़ाओं और संघर्षों की याद दिलाता है, जिन्हें विभाजन के दौरान विस्थापन के भयानक दंश सहने पड़े। भारत का विभाजन एक ऐसी त्रासदी थी, जिसकी पीड़ा आज भी अनेक आंखों में झलकती है।' उन्होंने आगे कहा कि राजनैतिक आकांक्षाओं और संकीर्ण विचारधाराओं के चलते धर्म के नाम पर हुए बंटवारे ने रक्तपात, नफरत और अनगणित विस्थापनों के ज़रिए समाज को गहरी चोट पहुँचाई।

नड्डा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस स्मृति दिवस की स्थापना से उन सभी पीड़ितों की यातनाओं और त्यागों की याद ताज़ा होती है, जिन्होंने अमानवीय परिस्थितियों में नया जीवन बनाया। उन्होंने उन तमाम परिवारों को नमन किया जिन्होंने अपनी ज़मीन और अपनों को खोकर भी देश के पुनर्निर्माण में योगदान दिया।

विदेश मंत्री जयशंकर की श्रद्धांजलि

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर बंटवारे से हुई भारी मानवीय पीड़ा और उसके दूरगामी भू-राजनीतिक नतीजों को याद करना ज़रूरी है। उन्होंने उन लोगों के साहस और हिम्मत को सलाम किया जिन्होंने अपनी जिंदगी को फिर से संवारा, साथ ही कहा कि इतिहास के इस दर्दनाक दौर से मिले सबक को भुलाया नहीं जाना चाहिए।

राज्यों के मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर पोस्ट कर उन सभी लोगों को विनम्र श्रद्धांजलि दी जिन्होंने विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाई और हिंसा व विस्थापन का दर्द सहा। उन्होंने कहा कि उनका साहस, धैर्य और बलिदान देश की स्मृति में सदैव अंकित रहेगा।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा कि जबरदस्ती किए गए बंटवारे के जख्मों को कभी नहीं भुलाया जा सकता, जिसमें अनगिनत बेगुनाह लोगों की जान चली गई। उन्होंने संकल्प लिया कि देश को फिर कभी ऐसी पीड़ा नहीं सहने दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर कहा कि यह दिन इतिहास की पीड़ा को स्मरण करने के साथ-साथ भविष्य का संकल्प लेने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि एकता और सामाजिक सद्भाव ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए एक विकसित, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प लेना चाहिए।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक्स पर पोस्ट कर उन अनगिनत बेगुनाह लोगों और उजड़े परिवारों को याद किया जिन्होंने बंटवारे में जान गंवाई। उन्होंने कहा कि यह इतिहास का एक दर्दनाक अध्याय है जिसने कई पीढ़ियों पर गहरे जख्म छोड़े।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का महत्त्व

गौरतलब है कि 14 अगस्त 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में घोषित किया था, ताकि 1947 के बंटवारे में जान गंवाने वाले और विस्थापित होने वाले लाखों लोगों की पीड़ा को राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाया जा सके। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब देश अपनी स्वतंत्रता की वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर एकता के संकल्प को दोहराता है। इस वर्ष भी देशभर में नेताओं और नागरिकों ने इस दिन को गंभीरता और श्रद्धा के साथ मनाया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह स्मरण केवल सोशल मीडिया पोस्टों तक सीमित है या इसका कोई नीतिगत आयाम भी है। नेताओं के बयान भावनात्मक रूप से सशक्त हैं, पर विभाजन पीड़ितों के पुनर्वास, उनके अभिलेखीकरण या उनकी अगली पीढ़ियों के लिए किसी ठोस कदम का उल्लेख नदारद है। इतिहास की पीड़ा को राजनीतिक एकजुटता के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करने और उसे वास्तविक सामाजिक उपचार में बदलने के बीच की खाई को पाटना अभी बाकी है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस क्या है?
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हर वर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में घोषित किया था, ताकि 1947 के भारत-पाकिस्तान बंटवारे में जान गंवाने वाले और विस्थापित हुए लाखों लोगों की स्मृति को राष्ट्रीय सम्मान मिले।
इस वर्ष किन नेताओं ने विभाजन पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी?
इस वर्ष केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई नेताओं ने एक्स पर पोस्ट कर श्रद्धांजलि दी।
जेपी नड्डा ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर क्या कहा?
जेपी नड्डा ने कहा कि भारत का विभाजन एक ऐसी त्रासदी थी जिसकी पीड़ा आज भी अनेक आंखों में झलकती है। उन्होंने उन परिवारों को नमन किया जिन्होंने अपनी ज़मीन और अपनों को खोकर भी देश के पुनर्निर्माण में योगदान दिया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस दिन क्या संदेश दिया?
एस. जयशंकर ने कहा कि बंटवारे की भारी मानवीय पीड़ा और उसके दूरगामी भू-राजनीतिक नतीजों को याद रखना ज़रूरी है। उन्होंने उन लोगों के साहस को सलाम किया जिन्होंने विस्थापन के बाद अपनी जिंदगी को नए सिरे से संवारा।
यह स्मृति दिवस 14 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है?
14 अगस्त वह तारीख है जब 1947 में पाकिस्तान का गठन हुआ और भारत-पाकिस्तान विभाजन की प्रक्रिया पूरी हुई। स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की पूर्व संध्या पर इस दिन को चुनकर सरकार ने आज़ादी की खुशी के साथ-साथ बंटवारे की त्रासदी को भी राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाया।
राष्ट्र प्रेस
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