विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर योगी का कांग्रेस पर हमला: 'सत्ता की लिप्सा में सनातन राष्ट्र के टुकड़े किए गए'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 अगस्त 2026 को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 1947 के विभाजन के पीछे सत्ता की अंधी लालसा थी, जिसके चलते एक सनातन राष्ट्र के टुकड़े कर दिए गए। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों हिंदुओं को अपनी ही मातृभूमि से विस्थापित होना पड़ा और लाखों हिंदू, बौद्ध, सिख तथा जैन लोगों का कत्लेआम हुआ।
मुख्यमंत्री के तीखे सवाल
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि गहन आत्मचिंतन का क्षण है। उन्होंने सवाल उठाया — 'यह समस्या क्यों पैदा हुई, किन लोगों के कारण पैदा हुई, इसके कितने दोषियों को सजा दी गई और आखिर कब तक यह हिंदुस्तान इसकी कीमत चुकाता रहेगा?' — और कहा कि ये प्रश्न आज भी उसी मजबूती के साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि इतिहास केवल परीक्षा का पाठ्यक्रम नहीं होता — वह गौरवशाली क्षणों पर गर्व करने और अतीत की गलतियों के परिमार्जन का अवसर भी देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी भावना के साथ इस स्मृति दिवस की स्थापना की थी।
विभाजन के कारणों पर विश्लेषण
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश की गुलामी के पीछे दो बड़े कारण थे — आपसी अंतर्विरोध और जाति तथा क्षेत्र के आधार पर विभाजन। उन्होंने कहा कि इन अंतर्विरोधों के साथ षड्यंत्र भी जुड़े और उसका परिणाम देश की गुलामी के रूप में सामने आया।
उन्होंने कहा कि समाज इस सोच के साथ एकजुट नहीं हो पाया कि 'हमला किसी दूसरे पर हो रहा है, हम क्यों बोलें' — और इसी सोच का दुष्परिणाम यह हुआ कि सनातन काल से एक रहे भारत के टुकड़े कर दिए गए। उन्होंने स्मरण दिलाया कि स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद और रानी लक्ष्मीबाई जैसे महान सेनानियों ने संघर्ष किया था — फिर भी देश को विभाजन की भारी कीमत चुकानी पड़ी।
विपक्ष पर सीधा निशाना
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 1947 में जो लोग मौन थे, उनकी नजरें सत्ता पर टिकी थीं और वे देश की कीमत पर सत्ता हासिल करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि आज भी कुछ राजनीतिक दल अपने निहित स्वार्थों के लिए समाज को जाति और क्षेत्र के आधार पर बाँटने का काम करते हैं।
योगी ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दल वोट बैंक खिसकने के डर से ऐसे मामलों पर भी मौन रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग सत्ता को निजी संपत्ति और पारिवारिक विरासत मानते हैं, वे देश के साथ विश्वासघात करते हैं।
मौन पदयात्रा और श्रद्धांजलि
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हजरतगंज चौराहा स्थित सरदार पटेल की प्रतिमा से लोकभवन तक करीब आधा किलोमीटर की मौन पदयात्रा निकाली। इस पदयात्रा के माध्यम से विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों को श्रद्धांजलि दी गई।
लोकभवन पहुँचने के बाद मुख्यमंत्री ने विभाजन की त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी और लघु फिल्म देखी। उन्होंने कलाकारों की लाइव पेंटिंग भी देखी और विभाजन के दौरान भारत आए विस्थापित परिवारों के सदस्यों से मुलाकात की, जिन्होंने अपनी पीड़ा और अनुभव साझा किए।
आगे क्या
यह दिवस हर वर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है — स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर — ताकि विभाजन की त्रासदी को राष्ट्रीय स्मृति में जीवित रखा जा सके। मुख्यमंत्री के इस संबोधन ने स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राजनीतिक विमर्श को एक बार फिर विभाजन की जिम्मेदारी और वर्तमान राजनीति के इर्द-गिर्द केंद्रित कर दिया है।