1947 का विभाजन भूमि नहीं, मानवता का बँटवारा था: मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 14 अगस्त 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन महज भूमि का बँटवारा नहीं था, बल्कि एक ऐसी मानवीय त्रासदी थी जिसने लाखों लोगों को पीड़ा, विस्थापन और जान-माल की अपूरणीय क्षति दी। वे इंफाल स्थित पैलेस ऑडिटोरियम, मणिपुर स्टेट फिल्म डेवलपमेंट सोसाइटी में आयोजित 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम
राज्यपाल भल्ला ने अपने संबोधन में कहा कि देश के इतिहास में कुछ क्षण उत्सव के होते हैं, तो कुछ ऐसे भी होते हैं जब रुककर अतीत को याद करना और उससे सीख लेना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत सरकार ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' घोषित किया था, ताकि विभाजन के दौरान झेली गई पीड़ा, बलिदान और विस्थापन की स्मृतियाँ राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न हिस्सा बनी रहें।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा कि विभाजन के कारण अनगिनत लोगों की जानें गईं और संपत्ति का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। उन्होंने विभाजन के बाद जीवन को पुनः खड़ा करने वाले लोगों के साहस की सराहना की। कार्यक्रम में दिखाई गई डॉक्यूमेंट्री 'ए न्यू पोस्टबॉक्स: टेल्स फ्रॉम द पार्टिशन' का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उसमें एक महत्त्वपूर्ण संदेश था — 'हमारी आँखें सिर के पीछे नहीं, सामने होती हैं, जो हमें अतीत में अटकने के बजाय आगे देखने की प्रेरणा देती हैं।'
आंतरिक विस्थापितों की पीड़ा से जोड़ा संदर्भ
मुख्यमंत्री ने चुराचांदपुर जिले की सीमा से लगे हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की स्थिति का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ये लोग केवल दिन के समय ही अपने घर लौट पाते हैं, क्योंकि रात में वहाँ रहने का भरोसा उन्हें नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय संघर्ष की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी भी संकट में लोगों का दर्द एक जैसा होता है।
आम जनता पर असर
मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता से शांति और सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने की अपील की। गौरतलब है कि यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ जब मणिपुर के कुछ हिस्सों में विस्थापित परिवार अभी भी अपने मूल स्थानों पर पूरी तरह वापस नहीं लौट पाए हैं। कार्यक्रम के अंत में विभाजन से प्रभावित सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।
क्या होगा आगे
यह स्मृति दिवस हर वर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को विभाजन की विभीषिका से अवगत कराना है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों के संबोधन में वर्तमान मणिपुर के संदर्भ में शांति और पुनर्निर्माण का आह्वान स्पष्ट रूप से झलका।