18 अगस्त 2026
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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक: आत्मसम्मान और स्वाभिमान से जीना है सच्चा पुरुषार्थ

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक: आत्मसम्मान और स्वाभिमान से जीना है सच्चा पुरुषार्थ

सारांश

स्वतंत्रता दिवस सप्ताह में प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार तीन दिन संस्कृत सुभाषित साझा किए — 14 अगस्त को विभाजन की पीड़ा से उठने का साहस, सोमवार को एकता का संकल्प, और मंगलवार को आत्मसम्मान के साथ जीने का आह्वान। यह श्रृंखला उनकी सांस्कृतिक संवाद-शैली की झलक है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 18 अगस्त को एक्स पर श्लोक 'उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्' साझा किया, जिसका संदेश है — आत्मसम्मान और स्वाभिमान के साथ जीना।
17 अगस्त (सोमवार) को उन्होंने सामूहिक संकल्प और एकता पर श्लोक 'समानी व आकूतिः' साझा किया था।
14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन्होंने पुरुषार्थ और कर्मठता पर श्लोक 'उद्यमस्य प्रसादेन' साझा किया था।
तीनों श्लोकों का केंद्रीय भाव — साहस, एकता और परिश्रम से ही राष्ट्र और व्यक्ति का उत्थान संभव है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 18 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें आत्मसम्मान, साहस और स्वाभिमान के साथ जीवन जीने का संदेश दिया गया। यह श्लोक ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता दिवस के उत्सव का उत्साह अभी ताज़ा है और प्रधानमंत्री लगातार प्रेरणादायक संदेशों की एक श्रृंखला साझा कर रहे हैं।

मंगलवार का सुभाषित और उसका अर्थ

प्रधानमंत्री मोदी ने 18 अगस्त को एक्स पर श्लोक साझा किया — 'उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्। अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥' — जिसका भाव है कि मनुष्य को सदैव उठकर आगे बढ़ना चाहिए, झुकना नहीं। सच्चा पुरुषार्थ इसी में है कि व्यक्ति किसी भी विपरीत परिस्थिति में अपने सिद्धांतों से समझौता न करे और आत्मगौरव के साथ अपने आदर्शों पर दृढ़ रहे।

सोमवार का सुभाषित: एकता और सामूहिक संकल्प

इससे एक दिन पहले सोमवार को प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा था, 'सामूहिक संकल्प और एकता की शक्ति से ही देश आगे बढ़ता है। यही भावना भारत की प्रगति और समृद्धि की मजबूत नींव है।' उन्होंने श्लोक 'समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः। समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥' भी साझा किया था, जिसका अर्थ है कि सभी के संकल्प एकसमान हों, मन एकता के भाव से जुड़े हों, ताकि परस्पर सहयोग से समाज की उन्नति हो।

14 अगस्त का सुभाषित: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर

14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने उन देशवासियों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने विभाजन की त्रासदी झेलकर भी देश की प्रगति में योगदान दिया। उन्होंने लिखा था, 'उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया।' साथ ही श्लोक 'उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः। कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥' साझा किया, जिसका भाव है कि परिश्रम और पुरुषार्थ से ही विज्ञान, कला और नवाचार विकसित होते हैं — भाग्य पर निर्भर रहने वाले पीछे रह जाते हैं।

सुभाषित-श्रृंखला का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से संस्कृत सुभाषितों और प्राचीन श्लोकों को सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, जो उनके सांस्कृतिक संवाद की एक विशिष्ट शैली बन चुकी है। यह श्रृंखला स्वतंत्रता दिवस सप्ताह के दौरान राष्ट्रीय एकता, साहस और कर्मठता के व्यापक विमर्श से जुड़ती है। आने वाले दिनों में भी इस प्रकार के प्रेरणादायक संदेशों की अपेक्षा की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एकता का संकल्प, और आत्मसम्मान — एक सोची-समझी कथा-रेखा बनाता है। हालांकि इन संदेशों की व्यापक पहुँच और प्रभाव को मापना कठिन है, यह स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर सांस्कृतिक प्रतीकों का यह उपयोग उनकी राजनीतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 18 अगस्त को एक्स पर कौन-सा श्लोक साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 18 अगस्त को एक्स पर 'उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्। अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥' श्लोक साझा किया। इसका अर्थ है कि मनुष्य को सदैव आत्मसम्मान और स्वाभिमान के साथ जीना चाहिए, किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।
मोदी के सोमवार के सुभाषित का क्या संदेश था?
सोमवार, 17 अगस्त को प्रधानमंत्री ने 'समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः' श्लोक साझा किया था। इसका भाव था कि सभी के संकल्प और मन एकता के भाव से जुड़े हों, ताकि परस्पर सहयोग से समाज और देश की उन्नति हो।
14 अगस्त को PM मोदी ने किस विषय पर सुभाषित साझा किया था?
14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने उन देशवासियों को नमन किया जिन्होंने विभाजन की त्रासदी झेलकर देश की प्रगति में योगदान दिया। उन्होंने 'उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः' श्लोक साझा किया, जिसका संदेश था कि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।
PM मोदी नियमित रूप से संस्कृत श्लोक क्यों साझा करते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी संस्कृत सुभाषितों को सोशल मीडिया पर साझा करने की परंपरा लंबे समय से निभाते आ रहे हैं। यह उनकी सांस्कृतिक संवाद-शैली का हिस्सा है, जिसके ज़रिए वे प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक डिजिटल मंच पर प्रासंगिक बनाते हैं।
इन तीनों श्लोकों का साझा संदेश क्या है?
स्वतंत्रता दिवस सप्ताह में साझा किए गए तीनों श्लोकों का केंद्रीय भाव एक ही है — साहस, एकता और निरंतर परिश्रम से ही व्यक्ति और राष्ट्र का उत्थान संभव है। आत्मसम्मान, सामूहिक संकल्प और कर्मठता को इस श्रृंखला की मूल थीम माना जा सकता है।
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