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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: ज्ञानी और सज्जन परस्पर सम्मान से पाते हैं सुख

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: ज्ञानी और सज्जन परस्पर सम्मान से पाते हैं सुख

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी की तीन दिवसीय सुभाषित-श्रृंखला — करुणा, सत्संगति और परस्पर सम्मान — संस्कृत की नैतिक विरासत को डिजिटल मंच पर जीवित रखने का प्रयास है। सोमवार से बुधवार तक के तीन श्लोक व्यक्तिगत आचरण और सामाजिक सद्भाव का एक सुसंगत संदेश देते हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को एक्स पर संस्कृत श्लोक 'ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति...' साझा किया, जो परस्पर सम्मान और सेवा का संदेश देता है।
25 अगस्त को साझा श्लोक का भाव था — उत्तम संगति, विद्वानों से सत्संवाद और निर्लोभी मित्रता से व्यक्ति कभी दुःखी नहीं होता।
24 अगस्त के श्लोक में करुणा से आत्म-सम्मान, संतोष से तृष्णा पर विजय और पुरुषार्थ से आलस्य पर जीत का संदेश था।
यह मोदी की नियमित सुभाषित-श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें संस्कृत नीतिवचन हिंदी अर्थ सहित डिजिटल मंच पर प्रस्तुत किए जाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 26 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें ज्ञान, सेवा और सद्भाव को जीवन में उन्नति का आधार बताया गया। यह उनकी उस नियमित श्रृंखला का हिस्सा है जिसमें वे संस्कृत के नीतिवचनों को हिंदी अर्थ सहित प्रस्तुत करते हैं।

बुधवार का सुभाषित: परस्पर सम्मान और सेवा

मोदी ने 26 अगस्त को संस्कृत श्लोक साझा किया — 'ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्। विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥' — जिसका भाव है कि ज्ञानी और सज्जन व्यक्ति परस्पर सम्मान, सेवा और सद्भाव का व्यवहार करते हैं। वे व्यक्तिगत लाभ की आकांक्षा से मुक्त होकर एक-दूसरे की प्रशंसा और सेवा करते हुए जीवन में सुखपूर्वक उन्नति प्राप्त करते हैं।

मंगलवार का सुभाषित: सत्संगति और मित्रता

मंगलवार, 25 अगस्त को प्रधानमंत्री ने श्लोक — 'उत्तमैः सह साङ्गत्यं पण्डितैः सह सत्कथाम्‌। अलुब्धैः सह मित्रत्वं कुर्वाणो नावसीदति॥' — साझा किया था। इसका अर्थ है कि उत्तम व्यक्तियों की संगति, विद्वानों के साथ सत्संवाद और निःस्वार्थ-निर्लोभी व्यक्तियों के साथ मित्रता करने वाला व्यक्ति कभी दुःखी नहीं होता।

सोमवार का सुभाषित: करुणा, संतोष और पुरुषार्थ

सोमवार, 24 अगस्त को मोदी ने श्लोक — 'कारुण्येनात्मनो मानं तृष्णां च परितोषतः। उत्थानेन जयेत्तन्द्रीं वितर्कं निश्चयाज्जयेत्॥' — के साथ लिखा कि करुणा से आत्म-सम्मान और संतोष से सच्ची खुशी मिलती है। इसी भाव से समाज में सहयोग और सद्भाव की डोर और सशक्त होती है। श्लोक का भाव है कि दूसरों के प्रति करुणा से आत्म-सम्मान, संतोषी होने से तृष्णा पर विजय और पुरुषार्थ से आलस्य तथा आधारहीन आशंकाओं पर निश्चित रूप से विजय प्राप्त होती है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर नकारात्मकता और वैचारिक टकराव की चर्चा आम है। प्रधानमंत्री की यह सुभाषित-श्रृंखला संस्कृत साहित्य की नैतिक विरासत को डिजिटल मंच पर लाने का प्रयास मानी जा रही है। गौरतलब है कि मोदी नियमित रूप से एक्स पर ऐसे नीतिवचन साझा करते हैं, जो व्यक्तिगत आचरण और सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित होते हैं।

क्या होगा आगे

प्रधानमंत्री की यह दैनिक सुभाषित-श्रृंखला जारी रहने की संभावना है, जो संस्कृत के प्राचीन ज्ञान को समकालीन संदर्भ में प्रासंगिक बनाने की उनकी व्यापक सांस्कृतिक पहल का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि क्या ये नैतिक संदेश सरकारी नीतियों और जमीनी आचरण में भी परिलक्षित होते हैं। सोशल मीडिया पर प्राचीन ज्ञान का यह प्रसार सांस्कृतिक गर्व को तो जगाता है, लेकिन इसकी वास्तविक सामाजिक प्रभावशीलता का मापन कठिन है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 26 अगस्त को एक्स पर कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
मोदी ने 'ज्ञानवृद्धाः प्रशंसन्ति शुश्रूषन्तः परस्परम्। विनिवृत्ताभिसन्धानाः सुखमेधन्ति सर्वशः॥' श्लोक साझा किया, जिसका अर्थ है कि ज्ञानी और सज्जन व्यक्ति परस्पर सम्मान, सेवा और सद्भाव से जीवन में सुखपूर्वक उन्नति पाते हैं।
मोदी की सुभाषित-श्रृंखला में इस सप्ताह कितने श्लोक साझा किए गए?
सोमवार 24 अगस्त से बुधवार 26 अगस्त तक तीन संस्कृत श्लोक साझा किए गए — करुणा और पुरुषार्थ, सत्संगति और मित्रता, तथा परस्पर सम्मान और सेवा पर।
25 अगस्त को साझा किए गए संस्कृत श्लोक का क्या अर्थ है?
'उत्तमैः सह साङ्गत्यं पण्डितैः सह सत्कथाम्‌। अलुब्धैः सह मित्रत्वं कुर्वाणो नावसीदति॥' का अर्थ है कि उत्तम व्यक्तियों की संगति, विद्वानों से सत्संवाद और निःस्वार्थ-निर्लोभी मित्रों के साथ रहने वाला व्यक्ति कभी दुःखी नहीं होता।
PM मोदी नियमित रूप से एक्स पर संस्कृत श्लोक क्यों साझा करते हैं?
यह उनकी एक सांस्कृतिक पहल का हिस्सा है जिसमें वे संस्कृत साहित्य के नैतिक और दार्शनिक वचनों को हिंदी अर्थ सहित डिजिटल मंच पर प्रस्तुत करते हैं, ताकि प्राचीन ज्ञान आधुनिक पीढ़ी तक पहुँचे।
24 अगस्त के सुभाषित में PM मोदी ने क्या संदेश दिया?
मोदी ने लिखा कि करुणा से आत्म-सम्मान और संतोष से सच्ची खुशी मिलती है। श्लोक 'कारुण्येनात्मनो मानं...' का भाव है कि करुणा, संतोष और पुरुषार्थ से आलस्य तथा आधारहीन आशंकाओं पर विजय प्राप्त होती है।
राष्ट्र प्रेस
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