11 अगस्त 2026
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पीएम मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: बुद्धि, वीरता और उपकार से प्रकाशमान होता है जीवन

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पीएम मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: बुद्धि, वीरता और उपकार से प्रकाशमान होता है जीवन

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 11 अगस्त को एक्स पर संस्कृत श्लोक 'अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति' साझा कर बुद्धि, सदाचार, संयम, ज्ञान, वीरता, वाणी, दान और कृतज्ञता को मनुष्य जीवन को प्रकाशमान करने वाले आठ गुण बताया। यह उनकी नियमित सुभाषित श्रृंखला का हिस्सा है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अगस्त को एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा किया।
श्लोक 'अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति' में बुद्धि, सदाचार, संयम, ज्ञान, वीरता, वाणी-कुशलता, दान और कृतज्ञता — आठ गुणों का उल्लेख है।
10 अगस्त को भी मोदी ने 'भद्रं कर्णेभिः' श्लोक साझा कर लोकहित में जीवन समर्पित करने का संदेश दिया था।
7 अगस्त को चंद्रमा की उपमा वाला श्लोक साझा कर निःस्वार्थ परोपकार का भाव प्रस्तुत किया गया था।
यह प्रधानमंत्री की भारतीय शास्त्रीय ज्ञान को डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने की नियमित श्रृंखला का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 11 अगस्त को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए मनुष्य जीवन को प्रकाशित करने वाले आठ प्रमुख गुणों का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि बुद्धि, सदाचार, संयम, ज्ञान, वीरता, वाणी की कुशलता, सामर्थ्यानुसार दान और उपकार के प्रति कृतज्ञता — ये आठ गुण किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व को पूर्णता की ओर ले जाते हैं।

साझा किया गया संस्कृत श्लोक

प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में संस्कृत श्लोक उद्धृत किया — 'अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च। पराक्रमश्च बहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च।।' — और उसका सरल हिंदी भावार्थ भी प्रस्तुत किया। उन्होंने समझाया कि बुद्धि मार्ग को स्पष्ट करती है, सदाचार आचरण को पवित्र बनाता है और संयम अनुशासन देता है। ज्ञान विवेक प्रदान करता है, वीरता विपरीत परिस्थितियों में अडिग रखती है और वाणी की कुशलता समाज में सम्मान दिलाती है।

पिछले दिनों के सुभाषित

गौरतलब है कि सोमवार, 10 अगस्त को भी प्रधानमंत्री ने एक्स पर संस्कृत श्लोक — 'भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः॥' — साझा किया था, जिसका भाव था कि हम शुभ और ज्ञानवर्धक वचन सुनें, कल्याणकारी विचारों को अपनाएं और स्वस्थ शरीर व उत्तम आचरण के साथ जीवन को लोकहित में समर्पित करें।

इससे पहले 7 अगस्त को प्रधानमंत्री ने श्लोक — 'किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्।' — पोस्ट किया था। इस श्लोक का भाव था कि जिस प्रकार चंद्रमा बिना किसी अपेक्षा के कुमुदिनी को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार उदार हृदय वाले सज्जन बिना स्वार्थ के परोपकार करते हैं।

क्रमिक सुभाषित श्रृंखला का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नियमित रूप से संस्कृत साहित्य और भारतीय दर्शन से जुड़े संदेश सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सुभाषित भारतीय सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने का एक प्रयास है। यह श्रृंखला सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और सेवाभाव के महत्व को रेखांकित करती है।

आगे की दिशा

प्रधानमंत्री मोदी का यह क्रम दर्शाता है कि वे भारतीय शास्त्रीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल माध्यमों से जन-जन तक पहुँचाने के प्रति सजग हैं। आने वाले दिनों में भी इस श्रृंखला के जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित सांस्कृतिक कूटनीति भी है — जो भारतीय शास्त्रीय परंपरा को आधुनिक डिजिटल पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास करती है। यह उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें राजनीतिक नेतृत्व 'सॉफ्ट पावर' के रूप में सांस्कृतिक पहचान को उभारता है। हालाँकि, आलोचक यह भी पूछते हैं कि क्या इन नैतिक संदेशों का नीतिगत निर्णयों से कोई ठोस संबंध है। सुभाषित की गहराई तभी सार्थक होगी जब शासन में भी बुद्धि, संयम और उपकार के ये मूल्य परिलक्षित हों।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने 11 अगस्त को कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 'अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च। पराक्रमश्च बहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च।।' श्लोक साझा किया। इसमें बुद्धि, सदाचार, संयम, ज्ञान, वीरता, वाणी-कुशलता, दान और कृतज्ञता को मनुष्य जीवन को प्रकाशित करने वाले आठ गुण बताया गया है।
इस श्लोक का हिंदी में क्या अर्थ है?
इस श्लोक का भाव है कि बुद्धि जीवन का मार्ग स्पष्ट करती है, सदाचार आचरण को पवित्र बनाता है और संयम अनुशासन देता है। ज्ञान विवेक प्रदान करता है, वीरता कठिन परिस्थितियों में अडिग रखती है, वाणी की कुशलता समाज में सम्मान दिलाती है और सामर्थ्यानुसार दान व कृतज्ञता व्यक्तित्व को पूर्णता देते हैं।
पीएम मोदी ने इससे पहले कौन-से सुभाषित साझा किए थे?
10 अगस्त को मोदी ने 'भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा' श्लोक साझा किया था, जिसका भाव लोकहित में जीवन समर्पित करने से था। 7 अगस्त को उन्होंने चंद्रमा की उपमा वाला श्लोक पोस्ट किया था, जो निःस्वार्थ परोपकार का संदेश देता है।
पीएम मोदी नियमित रूप से संस्कृत सुभाषित क्यों साझा करते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी भारतीय शास्त्रीय ज्ञान परंपरा और नैतिक मूल्यों को डिजिटल माध्यमों से व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने के उद्देश्य से नियमित रूप से सुभाषित साझा करते हैं। यह उनकी सांस्कृतिक जागरूकता अभियान का हिस्सा माना जाता है।
इन श्लोकों में किन मूल्यों पर ज़ोर दिया गया है?
इन श्लोकों में नैतिकता, परोपकार, आत्मानुशासन और ज्ञान जैसे जीवन-मूल्यों पर ज़ोर दिया गया है। विशेष रूप से निःस्वार्थ सेवा, सत्य और लोकहित के प्रति समर्पण को केंद्रीय भाव के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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