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पीएम मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: विनम्रता और क्षमाशीलता हैं व्यक्तित्व के सच्चे आभूषण

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पीएम मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: विनम्रता और क्षमाशीलता हैं व्यक्तित्व के सच्चे आभूषण

सारांश

पीएम मोदी ने एक्स पर लगातार तीन दिनों तक संस्कृत सुभाषित साझा किए — विनम्रता, ज्ञान-पराक्रम और दृढ़ संकल्प के संदेशों के साथ। यह सुभाषित-श्रृंखला विकसित भारत के संकल्प को सांस्कृतिक आधार देने की उनकी सुनियोजित सार्वजनिक पहल का हिस्सा मानी जा रही है।

मुख्य बातें

पीएम नरेंद्र मोदी ने 29 मई को एक्स पर संस्कृत श्लोक साझा करते हुए विनम्रता और क्षमाशीलता को व्यक्तित्व के सच्चे आभूषण बताया।
साझा किया गया श्लोक — 'तेजः क्षमा धृतिः शौचम्...' — दैवी संपदा के लक्षणों का वर्णन करता है।
गुरुवार को वीर सावरकर जयंती पर मोदी ने ज्ञान और पराक्रम की एकता पर श्लोक साझा किया था।
बुधवार को निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प पर केंद्रित सुभाषित साझा किया गया था।
यह सुभाषित-श्रृंखला विकसित भारत 2047 के संकल्प को सांस्कृतिक संदर्भ देने की व्यापक पहल का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 29 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कहा कि विनम्रता, क्षमाशीलता और उत्तम आचरण ही व्यक्तित्व के सच्चे आभूषण हैं। उन्होंने इसे विकसित भारत के संकल्प से जोड़ते हुए देशवासियों की निरंतर साधना की सराहना की।

साझा किया गया श्लोक और उसका अर्थ

मोदी ने भगवद्गीता का श्लोक — 'तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता। भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत।।' — पोस्ट किया। इस श्लोक का अर्थ है कि तेजस्विता, क्षमाशीलता, अदम्य धैर्य, आचरण की पवित्रता, राष्ट्र के प्रति निष्कपट भाव और अहंकाररहित व्यक्तित्व — ये सभी गुण दैवी संपदा को प्राप्त व्यक्ति के लक्षण हैं। प्रधानमंत्री ने लिखा कि इन्हीं गुणों के साथ आज देशवासी विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में जुटे हैं।

पिछले दिनों के सुभाषित: एक सातत्य

गौरतलब है कि मोदी ने इससे पहले गुरुवार को वीर सावरकर की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए एक अन्य श्लोक साझा किया था — 'अनन्तोद्भूतभूतौघसङ्कुले भूतलेऽखिले। शस्त्रे शास्त्रे त्रिचतुराश्चतुरा यदि मादृशाः।।' — जिसका अर्थ है कि ज्ञान और पराक्रम दोनों से युक्त व्यक्तित्व संसार में अत्यंत विरले होते हैं। उन्होंने सावरकर को 'महान क्रांतिकारी और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक' बताया।

इससे एक दिन पहले बुधवार को मोदी ने 'यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेह ते क्रमात्। अवश्यं स तमाप्नोति न चेदर्थान् निवर्तते।।' श्लोक साझा किया था, जिसका भाव है कि जो व्यक्ति किसी लक्ष्य के लिए निरंतर क्रमबद्ध प्रयास करता है, वह उसे अवश्य प्राप्त करता है — यदि वह मार्ग से विचलित न हो।

सुभाषित श्रृंखला का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री लगातार सांस्कृतिक और दार्शनिक संदेशों के माध्यम से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को जन-जन तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं। मोदी की यह सुभाषित-श्रृंखला केवल आध्यात्मिक संदेश नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चरित्र-निर्माण की एक सुनियोजित सार्वजनिक पहल के रूप में देखी जा रही है।

आगे क्या

प्रधानमंत्री की ओर से इस तरह के सुभाषित और प्रेरक संदेशों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है, विशेषकर ऐसे अवसरों पर जब राष्ट्रीय पर्व, महापुरुषों की जयंतियाँ या सामाजिक जागरूकता के क्षण हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो विकसित भारत के आर्थिक लक्ष्यों को सांस्कृतिक और नैतिक आधार देती है। उल्लेखनीय है कि ये पोस्ट नीतिगत घोषणाओं से इतर हैं, फिर भी इनकी पहुँच और प्रतिक्रिया व्यापक है। सवाल यह है कि क्या सुभाषितों की यह श्रृंखला केवल प्रेरणा है, या यह सामाजिक विमर्श को एक खास दिशा देने का सचेत प्रयास भी है — जिसका उत्तर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः नहीं खोजती।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने 29 मई को एक्स पर कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
मोदी ने 'तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता। भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत।।' श्लोक साझा किया, जिसका अर्थ है कि तेजस्विता, क्षमाशीलता, धैर्य, पवित्र आचरण और अहंकाररहित व्यक्तित्व दैवी संपदा के लक्षण हैं।
मोदी ने इस सुभाषित को विकसित भारत से कैसे जोड़ा?
मोदी ने लिखा कि इन्हीं गुणों के साथ आज देशवासी विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में निरंतर जुटे हैं। यह उनके उस व्यापक संदेश का हिस्सा है जिसमें वे सांस्कृतिक मूल्यों को राष्ट्रीय विकास के लक्ष्य से जोड़ते हैं।
मोदी ने गुरुवार को वीर सावरकर जयंती पर क्या संदेश दिया?
मोदी ने वीर सावरकर को 'महान क्रांतिकारी और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक' बताते हुए उन्हें जयंती पर नमन किया और एक श्लोक साझा किया जिसका अर्थ है कि ज्ञान और पराक्रम दोनों से युक्त व्यक्तित्व संसार में अत्यंत विरले होते हैं।
मोदी की सुभाषित-श्रृंखला का क्या महत्व है?
तीन दिनों में तीन अलग-अलग संस्कृत श्लोकों के माध्यम से मोदी ने धैर्य, ज्ञान-पराक्रम और विनम्रता के संदेश दिए हैं। यह श्रृंखला विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को सांस्कृतिक और दार्शनिक आधार देने की उनकी व्यापक सार्वजनिक संवाद रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
बुधवार को मोदी ने कौन-सा सुभाषित साझा किया था?
बुधवार को मोदी ने 'यो यमर्थं प्रार्थयते...' श्लोक साझा किया था, जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति किसी लक्ष्य के लिए निरंतर क्रमबद्ध प्रयास करता है और मार्ग से विचलित नहीं होता, वह उसे अवश्य प्राप्त करता है।
राष्ट्र प्रेस
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