29 जून 2026
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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक: 'विभिन्न संस्कृतियों का सम्मान बढ़ाता है विश्वास और भाईचारा'

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक: 'विभिन्न संस्कृतियों का सम्मान बढ़ाता है विश्वास और भाईचारा'

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 29 जून को एक्स पर संस्कृत श्लोक साझा कर संदेश दिया कि विभिन्न संस्कृतियों का सम्मान विश्वास और भाईचारे की नींव है। यह उनकी हालिया सुभाषित-श्रृंखला की कड़ी है, जो भारत की सॉफ्ट पावर को वैश्विक मंच पर रेखांकित करती है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 29 जून 2026 को एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा किया।
श्लोक का संदेश: विभिन्न संस्कृतियों को समझने वाला व्यक्ति विश्वास, सहयोग और भाईचारे का वाहक बनता है।
26 जून को भी मोदी ने एकता पर केंद्रित श्लोक 'सङ्गच्छध्वं संवदध्वं' साझा किया था।
संविधान हत्या दिवस पर उन्होंने स्वतंत्रता-केंद्रित श्लोक के साथ आपातकाल के विरोधियों को नमन किया था।
यह श्रृंखला भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम्' आधारित विदेश नीति के अनुरूप सांस्कृतिक संवाद का हिस्सा मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 29 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कहा कि दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना प्रबल होती है। उन्होंने लिखा, 'दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ती है। इससे आपसी समझ और भाईचारा और मजबूत होता है।'

साझा किया गया संस्कृत श्लोक

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी एक्स पोस्ट में निम्नलिखित श्लोक उद्धृत किया:

'देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः। स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥'

इस श्लोक का आशय है कि जो व्यक्ति विभिन्न देशों की परंपराओं, सामाजिक नियमों और सांस्कृतिक धर्मों को समझने की जिज्ञासा रखता है तथा उचित-अनुचित का विवेक विकसित करता है, वह जहाँ भी जाता है, श्रेष्ठजनों के बीच प्रतिष्ठा और प्रभाव अर्जित करता है।

हालिया सुभाषित-श्रृंखला का संदर्भ

यह पोस्ट प्रधानमंत्री मोदी की हालिया संस्कृत सुभाषित-श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले 26 जून को उन्होंने एकता और सामूहिक कर्तव्य पर केंद्रित श्लोक 'सङ्गच्छध्वं संवदध्वं, सं वो मनांसि जानताम्।' साझा किया था, जिसका संदेश था कि हम सब साथ मिलकर चलें और हमारे विचार एकसुर में हों।

गौरतलब है कि उसी सप्ताह संविधान हत्या दिवस के अवसर पर भी प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा था कि यह दिन उस 'काले दौर' की याद दिलाता है जब भारतीय लोकतंत्र को कुचला गया था और आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को उन्होंने नमन किया था। उस पोस्ट के साथ स्वतंत्रता पर केंद्रित श्लोक 'स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्।' भी साझा किया गया था, जिसका अर्थ है कि स्वतंत्रता से ही मनुष्य सुख, सर्वोच्च उपलब्धि और परम पद को प्राप्त होता है।

सांस्कृतिक कूटनीति और व्यापक संदर्भ

प्रधानमंत्री मोदी की ओर से संस्कृत श्लोकों को सोशल मीडिया पर नियमित रूप से साझा करने की यह प्रवृत्ति भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर रेखांकित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा मानी जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के दर्शन को अपनी विदेश नीति की धुरी के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सुभाषित न केवल सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि वैश्विक नेताओं के बीच भारत की 'सॉफ्ट पावर' को भी सुदृढ़ करते हैं।

आगे की दिशा

प्रधानमंत्री मोदी की यह सुभाषित-श्रृंखला भारतीय दर्शन और प्राचीन ज्ञान परंपरा को समकालीन राजनीतिक संवाद से जोड़ने का एक सतत प्रयास है। आने वाले दिनों में इस श्रृंखला के जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताता है कि प्राचीन ज्ञान और समकालीन राजनीतिक संदेश को एक साथ साधने की कोशिश हो रही है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन पोस्टों को अलग-थलग देखती है, जबकि इनकी निरंतरता और विषय-चयन में एक स्पष्ट कथा-सूत्र है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 29 जून को एक्स पर कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
PM मोदी ने 'देशाचारान् समयाञ्जातिधर्मान् बुभूषते यस्तु परावरज्ञः। स तत्र तत्राधिगतः सदैव महाजनस्याधिपत्यं करोति॥' श्लोक साझा किया। इसका अर्थ है कि विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं को समझने वाला व्यक्ति जहाँ भी जाता है, श्रेष्ठजनों के बीच सम्मान और प्रभाव अर्जित करता है।
मोदी की इस पोस्ट का मुख्य संदेश क्या है?
मोदी का संदेश है कि दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों का सम्मान करने से लोगों के बीच विश्वास, सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। यह भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की अवधारणा से जुड़ा संदेश है।
क्या मोदी ने इससे पहले भी संस्कृत सुभाषित साझा किए हैं?
हाँ, 26 जून को उन्होंने एकता पर केंद्रित श्लोक 'सङ्गच्छध्वं संवदध्वं' साझा किया था। उसी सप्ताह संविधान हत्या दिवस पर स्वतंत्रता-केंद्रित श्लोक 'स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति' भी पोस्ट किया गया था।
संविधान हत्या दिवस पर मोदी ने क्या लिखा था?
संविधान हत्या दिवस पर मोदी ने लिखा था कि यह दिन उस 'काले दौर' की याद दिलाता है जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह कुचला गया था, और आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को उन्होंने सादर नमन किया था।
मोदी की सुभाषित-श्रृंखला का व्यापक महत्व क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार यह श्रृंखला भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने और 'सॉफ्ट पावर' को सुदृढ़ करने की रणनीति का हिस्सा है। यह भारत की विदेश नीति में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के दर्शन को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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