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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: सम्मान से मिलता है आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: सम्मान से मिलता है आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर संस्कृत श्लोक साझा कर बताया कि सम्मान और स्वीकार्यता से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास दृढ़ होता है। एक दिन पहले भी उन्होंने विवेकपूर्ण निर्णय पर श्लोक पोस्ट किया था। यह उनकी भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल मंच पर जीवंत रखने की निरंतर पहल का हिस्सा है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जून, बुधवार को एक्स पर संस्कृत सुभाषित 'त्वत्संभावितमात्मानं बहुमन्यामहे वयम्…' साझा किया।
श्लोक का संदेश: श्रेष्ठ व्यक्तियों का सम्मान मनुष्य के अपने गुणों पर विश्वास को दृढ़ करता है और सकारात्मक ऊर्जा भरता है।
एक दिन पूर्व मंगलवार को भी मोदी ने 'सहसा विदधीत न क्रियाम्…' श्लोक पोस्ट किया था, जो विवेकपूर्ण निर्णय का महत्व बताता है।
प्रधानमंत्री नियमित रूप से सोशल मीडिया पर भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य को लोकप्रिय बनाते रहते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 17 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए सम्मान और आत्मविश्वास के गहरे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि जब किसी व्यक्ति को प्रेम, सम्मान और स्वीकार्यता प्राप्त होती है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास जागता है और वह नई ऊर्जा व उत्साह के साथ जीवन में आगे बढ़ता है।

साझा किया गया संस्कृत श्लोक

मोदी ने अपने एक्स पोस्ट में संस्कृत का निम्न श्लोक उद्धृत किया: 'त्वत्संभावितमात्मानं बहुमन्यामहे वयम्। प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः॥' इसके साथ उन्होंने इसका हिंदी भावार्थ भी प्रस्तुत किया, जिसमें बताया गया कि जब किसी को आदरपूर्वक स्वीकार किया जाता है, तो वह स्वयं को गौरवान्वित और धन्य महसूस करता है।

श्लोक का भावार्थ और संदेश

मोदी ने स्पष्ट किया कि श्रेष्ठ व्यक्तियों द्वारा दिया गया सम्मान मनुष्य के भीतर उसके अपने गुणों और क्षमताओं के प्रति विश्वास को और अधिक दृढ़ बनाता है। यह भावना न केवल आत्मविश्वास को मजबूत करती है, बल्कि व्यक्ति को बेहतर कार्य करने की प्रेरणा भी देती है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री अपने सोशल मीडिया माध्यमों के ज़रिए नियमित रूप से भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य के मोती जन-जन तक पहुँचाते रहे हैं।

एक दिन पहले का संस्कृत संदेश

इससे एक दिन पूर्व, मंगलवार को भी मोदी ने एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक साझा किया था: 'सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्। वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥' इस श्लोक का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा था कि किसी भी कार्य को बिना सोचे-समझे नहीं करना चाहिए, क्योंकि अविवेकपूर्ण निर्णय बड़ी विपत्तियों का कारण बन सकते हैं। जो व्यक्ति धैर्य और विवेक के साथ निर्णय लेता है, सफलता और समृद्धि स्वयं उसका वरण करती है।

भारतीय संस्कृति के प्रसार का प्रयास

यह ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को डिजिटल माध्यमों से लोकप्रिय बनाने के प्रति सक्रिय दिखते हैं। उनके इन संदेशों का उद्देश्य जीवन मूल्यों — विवेक, सम्मान, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच — के प्रति जागरूकता बढ़ाना माना जाता है। आने वाले दिनों में भी इस श्रृंखला के जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि कोई आकस्मिक पहल। हालाँकि आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि क्या ये संदेश व्यापक नीतिगत विमर्श से ध्यान हटाने का माध्यम तो नहीं बनते। फिर भी, करोड़ों अनुयायियों तक संस्कृत की पहुँच बनाने में इस प्रयास की प्रभावशीलता से इनकार करना कठिन है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 17 जून को कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
मोदी ने एक्स पर 'त्वत्संभावितमात्मानं बहुमन्यामहे वयम्। प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः॥' श्लोक साझा किया। इसका भावार्थ है कि श्रेष्ठ व्यक्तियों द्वारा दिया गया सम्मान मनुष्य को अपने गुणों पर विश्वास करने की प्रेरणा देता है।
इस संस्कृत सुभाषित का क्या संदेश है?
श्लोक का मूल संदेश यह है कि जब किसी को प्रेम, सम्मान और स्वीकार्यता मिलती है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास दृढ़ होता है और वह सकारात्मक ऊर्जा के साथ बेहतर कार्य करने को प्रेरित होता है। यह व्यक्तित्व विकास और जीवन मूल्यों पर केंद्रित संदेश है।
क्या मोदी ने इससे पहले भी संस्कृत श्लोक साझा किए हैं?
हाँ, एक दिन पूर्व मंगलवार को मोदी ने 'सहसा विदधीत न क्रियाम्…' श्लोक साझा किया था, जो विवेकपूर्ण निर्णय का महत्व बताता है। प्रधानमंत्री नियमित रूप से सोशल मीडिया पर भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य से जुड़े संदेश साझा करते रहते हैं।
PM मोदी के इन संस्कृत संदेशों का उद्देश्य क्या है?
इन संदेशों का उद्देश्य भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुँचाना और जीवन मूल्यों — विवेक, सम्मान, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच — के प्रति जागरूकता बढ़ाना माना जाता है।
मंगलवार को साझा किए गए श्लोक का क्या अर्थ था?
'सहसा विदधीत न क्रियाम्…' श्लोक का अर्थ है कि किसी भी कार्य को बिना सोचे-समझे नहीं करना चाहिए, क्योंकि अविवेकपूर्ण निर्णय बड़ी विपत्तियों को जन्म देते हैं। जो व्यक्ति धैर्य और विवेक से निर्णय लेता है, सफलता और समृद्धि स्वयं उसका वरण करती है।
राष्ट्र प्रेस
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