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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम से कठिन राह भी होती है आसान

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम से कठिन राह भी होती है आसान

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 2 जून को एक्स पर संस्कृत श्लोक के ज़रिए दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम का संदेश दिया — और इसे देश के युवाओं की राष्ट्र निर्माण की यात्रा से जोड़ा। यह उनकी लगातार जारी सुभाषित-श्रृंखला का हिस्सा है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 2 जून 2026 को एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा किया।
श्लोक का संदेश: दृढ़ निश्चय, समय का सदुपयोग और इंद्रिय-संयम ही सच्ची बुद्धिमानी है।
मोदी ने इस संकल्प-शक्ति को युवाओं के राष्ट्र निर्माण से जोड़ा।
1 जून को भी उन्होंने शिक्षण-कौशल पर केंद्रित संस्कृत श्लोक साझा किया था।
यह प्रधानमंत्री की नियमित संस्कृत सुभाषित-श्रृंखला का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 2 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने लिखा कि यही संकल्प-शक्ति देश के युवाओं को कठिन से कठिन लक्ष्य की ओर अग्रसर करती है।

मुख्य संदेश और श्लोक

मोदी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन राह को भी आसान बना देती है। आज हमारे युवा साथी इसी संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।'

उन्होंने संस्कृत का यह श्लोक भी साझा किया — 'निश्चित्य यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः। अबन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते॥' — जिसका अर्थ है: जो व्यक्ति किसी कार्य को भली-भाँति सोच-समझकर दृढ़ निश्चय के साथ आरंभ करता है, उसे अधूरा नहीं छोड़ता, समय का सदुपयोग करता है और अपनी इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है — वही वास्तव में बुद्धिमान है।

पृष्ठभूमि: एक दिन पहले का सुभाषित

यह ऐसे समय में आया है जब मोदी लगातार संस्कृत ज्ञान-परंपरा को सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जनमानस तक पहुँचाने की एक नियमित पहल के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। सोमवार, 1 जून को भी उन्होंने एक्स पर शिक्षण-कौशल पर केंद्रित संस्कृत श्लोक साझा किया था।

उस पोस्ट में उन्होंने 'श्लिष्टा क्रिया कस्यचिदात्मसंस्था सङ्क्रान्तिरन्यस्य विशेषयुक्ता। यस्योभयं साधु स शिक्षकाणां धुरि प्रतिष्ठापयितव्य एव।।' श्लोक के माध्यम से बताया था कि जिस व्यक्ति में स्वयं निपुणता और दूसरों को सिखाने की क्षमता — दोनों गुण हों, वही सर्वश्रेष्ठ शिक्षक की श्रेणी में आता है। साथ ही उन्होंने कंपाउंड वर्ब (संयुक्त क्रिया) की अवधारणा को भी सरल भाषा में समझाया था।

युवाओं और राष्ट्र निर्माण से जोड़

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री अपने इन संदेशों में प्राचीन भारतीय ज्ञान को समकालीन संदर्भ — विशेषकर युवा पीढ़ी और राष्ट्र निर्माण — से जोड़ते हैं। इस बार भी उनका संदेश स्पष्ट था: संकल्प और संयम केवल व्यक्तिगत जीवन के नहीं, बल्कि सामूहिक राष्ट्रीय प्रगति के भी स्तंभ हैं।

आगे क्या

प्रधानमंत्री की यह सुभाषित-श्रृंखला सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया पा रही है। संस्कृत विद्वानों और शिक्षाविदों ने इन पोस्ट को भारतीय शास्त्रीय परंपरा के प्रति नई पीढ़ी की रुचि जगाने का सार्थक प्रयास बताया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका एक सुचिंतित राजनीतिक आयाम भी है — संस्कृत और भारतीय शास्त्रीय परंपरा को मुख्यधारा की डिजिटल बातचीत में स्थापित करना। यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो 'सॉफ्ट मैसेजिंग' के ज़रिए आधार मज़बूत करती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन पोस्ट को केवल 'प्रेरणा' तक सीमित कर देती है, जबकि इनकी आवृत्ति और विषय-चयन एक सोची-समझी सांस्कृतिक पुनर्स्थापना की ओर इशारा करते हैं।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 2 जून को एक्स पर कौन-सा संस्कृत श्लोक साझा किया?
मोदी ने 'निश्चित्य यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः। अबन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते॥' श्लोक साझा किया, जिसका अर्थ है कि दृढ़ निश्चय से कार्य आरंभ करने वाला, समय का सदुपयोग करने वाला और इंद्रियों पर नियंत्रण रखने वाला व्यक्ति ही वास्तव में बुद्धिमान है।
मोदी ने इस संदेश को युवाओं से कैसे जोड़ा?
प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि देश के युवा साथी इसी दृढ़ संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हैं। उन्होंने संस्कृत की ज्ञान-परंपरा को समकालीन युवा ऊर्जा से जोड़ने का प्रयास किया।
क्या मोदी पहले भी ऐसे सुभाषित साझा करते रहे हैं?
हाँ, 1 जून को भी उन्होंने शिक्षण-कौशल पर केंद्रित संस्कृत श्लोक साझा किया था। यह उनकी एक नियमित सुभाषित-श्रृंखला का हिस्सा है जिसमें वे प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करते हैं।
1 जून को साझा किए गए श्लोक का क्या विषय था?
1 जून के श्लोक में आदर्श शिक्षक की परिभाषा दी गई थी — जो स्वयं निपुण हो और दूसरों को भी कुशलता से सिखा सके। मोदी ने कंपाउंड वर्ब (संयुक्त क्रिया) की अवधारणा के साथ इसे जोड़ा था।
इन संस्कृत पोस्ट का क्या महत्व है?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री की यह पहल संस्कृत और भारतीय शास्त्रीय परंपरा को डिजिटल मंच पर लोकप्रिय बनाने का प्रयास है। संस्कृत विद्वानों ने इसे नई पीढ़ी में प्राचीन ज्ञान के प्रति रुचि जगाने का सार्थक कदम बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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