PM मोदी का 'सुभाषितम' संदेश: ‘एकजुटता से कई गुना बढ़ती है राष्ट्र की शक्ति’
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 जून बुधवार सुबह सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक ‘सुभाषितम’ संदेश साझा करते हुए कहा कि नागरिकों की एकजुटता और आपसी सहयोग से राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। अपने संदेश के साथ उन्होंने महाभारत-प्रेरित एक संस्कृत श्लोक भी उद्धृत किया, जिसमें एकता को राष्ट्र की समृद्धि का आधार बताया गया है।
मोदी का एक्स पोस्ट और श्लोक
एक्स पर साझा पोस्ट में मोदी ने लिखा, ‘जब नागरिक एकजुटता और आपसी सहयोग के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प से आज देश उन्नति की नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है।’
संदेश के साथ उन्होंने यह श्लोक उद्धृत किया — ‘धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च। धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥’
श्लोक का अर्थ और प्रतीक
श्लोक का भाव है कि जिस प्रकार लकड़ियाँ अलग-अलग होने पर अपनी पूर्ण ऊर्जा प्रकट नहीं कर पातीं, किन्तु एकत्र होने पर प्रज्वलित होकर प्रकाश और ऊष्मा देती हैं, उसी प्रकार किसी राज्य की उन्नति, समृद्धि और शक्ति उसके नागरिकों की एकता, पारस्परिक सहयोग और सामूहिक संकल्प पर टिकी होती है।
मंगलवार का संदेश: दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम
इससे पहले मंगलवार को मोदी ने दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम विषय पर सुभाषित साझा किया था। उन्होंने लिखा था, ‘दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन राह को भी आसान बना देती है। आज हमारे युवा साथी इसी संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।’
उस पोस्ट में उद्धृत श्लोक था — ‘निश्चित्य यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः। अबन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते॥’ — जिसका अर्थ है कि जो व्यक्ति सोच-समझकर दृढ़ निश्चय से कार्य आरंभ करता है, उसे अधूरा नहीं छोड़ता, समय का सदुपयोग करता है और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखता है, वही वास्तव में बुद्धिमान कहलाता है।
संदेशों की निरंतर शृंखला
गौरतलब है कि मोदी पिछले कुछ समय से नियमित अंतराल पर ‘सुभाषितम’ शृंखला के तहत संस्कृत श्लोकों पर आधारित प्रेरणादायी संदेश साझा करते रहे हैं। यह शृंखला भारतीय शास्त्रीय परंपरा को समकालीन सार्वजनिक संवाद से जोड़ने के उनके सतत प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है, और सोशल मीडिया पर इसे व्यापक प्रतिक्रिया मिलती रही है।