20 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएम कुसुम योजना से गुजरात के आदिवासी किसानों को राहत, 2.97 लाख पंप सोलराइज़

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएम कुसुम योजना से गुजरात के आदिवासी किसानों को राहत, 2.97 लाख पंप सोलराइज़

सारांश

पीएम कुसुम योजना ने गुजरात के आदिवासी किसानों को मानसून की बेड़ियों से मुक्त किया है। 695 मेगावाट के 256 सोलर प्लांट और 2.97 लाख सोलराइज़्ड पंपों के साथ, डांग और तापी के किसान अब साल में तीन फ़सलें उगा रहे हैं — बिजली और डीज़ल की चिंता के बिना।

मुख्य बातें

पीएम कुसुम योजना के तहत गुजरात में 2.97 लाख पंप सोलराइज़ किए जा चुके हैं।
695 मेगावाट क्षमता के 256 सोलर पावर प्लांट कंपोनेंट-सी के तहत चालू हैं; 22,787 सोलर पंप स्थापित।
आदिवासी किसानों को केंद्र से 30% और गुजरात सरकार से 70% सब्सिडी मिल रही है।
तापी और डांग जिलों के किसान अब साल में तीन फ़सलें उगा रहे हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान किया है।

केंद्र सरकार की पीएम कुसुम योजना गुजरात के दूरदराज और आदिवासी इलाकों के किसानों के लिए कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लेकर आई है। सौर ऊर्जा से चलने वाले सोलर पंपों ने इन किसानों को मानसून पर निर्भरता से मुक्त किया है और साल भर सिंचाई की सुविधा दी है। 19 जुलाई को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, गुजरात में इस योजना के तहत अब तक 2.97 लाख पंप सोलराइज़ हो चुके हैं।

किसानों की ज़मीनी कहानी

आदिवासी बहुल डांग जिले के उमरपाड़ा गाँव के किसान भरतभाई वाघमारे इस योजना के प्रत्यक्ष लाभार्थी हैं। वे अपने खेत में लगे सोलर पंप से सूर्योदय से सूर्यास्त तक लगातार सिंचाई करते हैं। उनके अनुसार, 'हमें पीएम कुसुम योजना का लाभ मिला है। हम अब धान, तुअर, उड़द और बैंगन, चौली जैसी सब्ज़ियाँ भी उगा रहे हैं।'

तापी के गवान गाँव के किसान गवजीभाई वसावा के बेटे राजेशभाई वसावा बताते हैं कि सोलर पंप लगने के बाद उनके परिवार को अब न सिंचाई के लिए रात में जागना पड़ता है और न बिजली के बिल की चिंता सताती है। उन्होंने कहा, 'हम साल में लगातार तीन फ़सलें उगा रहे हैं। बिजली और डीज़ल के खर्च की कोई चिंता नहीं है।'

सब्सिडी का ढाँचा

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने इस योजना के तहत अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान किया है। आदिवासी और वन क्षेत्रों के किसानों को केंद्र सरकार की ओर से 30 प्रतिशत सब्सिडी के अलावा राज्य सरकार की ओर से 70 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है, जिससे किसानों पर वित्तीय बोझ लगभग नगण्य रह जाता है।

सरकार की प्रतिक्रिया

गुजरात के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि 'पीएम कुसुम योजना के माध्यम से किसान दूरदराज की सभी जगहों पर, चाहे उनके पास कितनी भी खेती की ज़मीन हो, उस पर फ़सल उगा सकते हैं और सूरज की रोशनी से मिलने वाली बिजली से अपने घर की आय बढ़ा सकते हैं।'

योजना का विस्तार और आँकड़े

गुजरात में पीएम कुसुम योजना के कंपोनेंट-सी के तहत 695 मेगावाट क्षमता वाले 256 सोलर पावर प्लांट चालू किए गए हैं। इस कंपोनेंट के अंतर्गत अब तक 22,787 सोलर पंप शुरू किए जा चुके हैं, जबकि कुल 2.97 लाख पंप सोलराइज़ हो चुके हैं। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में सोलर पंप अब केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि अधिक फ़सल, बेहतर आय और खुशहाल जीवन का माध्यम बन चुके हैं।

आम जनता पर असर

इस योजना से न केवल कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई है, बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं। गुजरात का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है। आने वाले समय में योजना के और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 2.97 लाख सोलराइज़्ड पंपों में से कितने वास्तव में सक्रिय हैं और किसानों की आय में मापने योग्य वृद्धि हो रही है। गुजरात में 100% सब्सिडी मॉडल टिकाऊ है या नहीं, यह तब पता चलेगा जब रखरखाव की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य से हटकर किसानों पर आएगी। डांग और तापी जैसे आदिवासी जिलों में यह योजना सराहनीय है, पर इसे अन्य राज्यों में दोहराने के लिए बजटीय प्रतिबद्धता और स्थानीय तकनीकी क्षमता दोनों की दरकार होगी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम कुसुम योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
पीएम कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) योजना केंद्र सरकार की एक कृषि-सौर ऊर्जा पहल है, जिसका उद्देश्य किसानों को सोलर पंप और सोलर पावर प्लांट उपलब्ध कराना है। इससे किसान सिंचाई के लिए बिजली और डीज़ल पर निर्भरता घटा सकते हैं।
गुजरात में पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को कितनी सब्सिडी मिलती है?
गुजरात के आदिवासी और वन क्षेत्रों के किसानों को केंद्र सरकार की ओर से 30 प्रतिशत और राज्य सरकार की ओर से 70 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है, यानी कुल मिलाकर पूरी लागत सरकार वहन करती है।
गुजरात में पीएम कुसुम योजना के तहत अब तक कितने सोलर पंप लगाए गए हैं?
गुजरात में कंपोनेंट-सी के तहत अब तक 22,787 सोलर पंप शुरू किए जा चुके हैं और कुल 2.97 लाख पंप सोलराइज़ हो चुके हैं। इसके साथ 695 मेगावाट क्षमता के 256 सोलर पावर प्लांट भी चालू हैं।
पीएम कुसुम योजना से किसानों के जीवन में क्या बदलाव आया है?
योजना के लाभार्थी किसान अब साल में तीन फ़सलें उगा पा रहे हैं और उन्हें बिजली व डीज़ल के खर्च से मुक्ति मिली है। तापी और डांग जिलों के किसानों के अनुसार, सिंचाई के लिए रात में जागने की ज़रूरत भी खत्म हो गई है।
डांग और तापी जिले के किसानों को इस योजना से विशेष रूप से कैसे फायदा हुआ?
डांग और तापी गुजरात के आदिवासी बहुल जिले हैं जहाँ पहले किसान मानसून और बिजली आपूर्ति पर निर्भर थे। सोलर पंप लगने के बाद ये किसान धान, तुअर, उड़द और सब्ज़ियाँ जैसी विविध फ़सलें उगा रहे हैं और उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले