25 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएम-कुसुम योजना: हरियाणा के किसानों को सोलर पंप से सिंचाई लागत में बड़ी राहत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएम-कुसुम योजना: हरियाणा के किसानों को सोलर पंप से सिंचाई लागत में बड़ी राहत

सारांश

हांसी के किसान बता रहे हैं कि पीएम-कुसुम योजना के तहत मिले सोलर पंप ने उनकी खेती की तस्वीर बदल दी है — बिजली कटौती की चिंता नहीं, डीजल का खर्च नहीं, और हर महीने ₹400-500 की सीधी बचत। सौर ऊर्जा अब सिंचाई का साधन ही नहीं, अतिरिक्त आमदनी का ज़रिया भी बन रही है।

मुख्य बातें

पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पंप स्थापित करने पर केंद्र व राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और सब्सिडी मिलती है।
हांसी, हरियाणा के लाभार्थी किसानों को सोलर पंप से हर महीने ₹400 से ₹500 की बचत हो रही है।
किसान अपनी बंजर या खाली जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर ग्रिड को बिजली बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं।
सोलर पंप बिजली कटौती के दौरान भी धूप में स्वचालित रूप से काम करता है, जिससे फसल सिंचाई बाधित नहीं होती।
डीजल और बिजली पर निर्भरता घटने से खेती की कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आ रही है।

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत हांसी क्षेत्र के किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था से बिजली और डीजल की बढ़ती लागत से उल्लेखनीय राहत मिल रही है। केंद्र सरकार की इस योजना के अंतर्गत किसानों को सोलर पंप स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता और सब्सिडी दी जाती है, जिससे खेती की कुल लागत में कमी आ रही है।

पीएम-कुसुम योजना का उद्देश्य और लाभ

पीएम-कुसुम योजना का मूल लक्ष्य किसानों को सिंचाई के लिए स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा उपलब्ध कराना है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ओर से निर्धारित प्रावधानों के अनुसार सोलर पंप लगाने पर आर्थिक सहायता दी जाती है। इससे किसान बिजली कटौती या डीजल के बढ़ते दामों की परवाह किए बिना सिंचाई सुचारु रूप से कर पा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, योजना किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी देती है। किसान अपनी बंजर या खाली जमीन पर सोलर प्लांट स्थापित कर सकते हैं और उससे उत्पादित बिजली को ग्रिड में बेचकर आय अर्जित कर सकते हैं। इस प्रकार सौर ऊर्जा सिंचाई के साधन के साथ-साथ कमाई का अतिरिक्त स्रोत भी बन रही है।

किसानों के अनुभव

गढ़ी गाँव के लाभार्थी किसान नरेश ने बताया कि पहले खेतों की सिंचाई के लिए बिजली और डीजल पर भारी खर्च करना पड़ता था। उनके अनुसार, सोलर पंप लगने के बाद अब उन्हें हर महीने करीब ₹400 से ₹500 की बचत हो रही है और बिजली पर निर्भरता भी काफी कम हो गई है।

एक अन्य लाभार्थी किसान मुलायम सिंह ने बताया कि पहले बिजली के बिल और डीजल पर होने वाला खर्च अधिक होने से फसल से होने वाली बचत घट जाती थी। अब सोलर पंप से सिंचाई करने पर लागत में कमी आई है और खेती पहले की तुलना में अधिक किफायती हो गई है।

किसान नरेंद्र ने बताया कि सोलर पंप की सबसे बड़ी सुविधा यह है कि धूप निकलते ही पंप स्वतः चलने लगता है और सूरज ढलने के साथ अपने आप बंद हो जाता है। उन्होंने कहा कि इससे सिंचाई के लिए समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।

बिजली कटौती में भी राहत

किसानों का कहना है कि सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था उनके लिए विशेष रूप से तब उपयोगी साबित होती है जब बिजली कटौती होती है। धूप उपलब्ध रहने पर सोलर पंप से सिंचाई बाधित नहीं होती, जिससे फसल को नुकसान का खतरा कम होता है। डीजल पर होने वाला खर्च घटने से खेती की कुल लागत में भी सुधार आ रहा है।

दीर्घकालिक संभावनाएँ

किसानों के अनुसार, लंबे समय में यह व्यवस्था कृषि कार्यों को और अधिक किफायती बनाने में सहायक हो सकती है। यह योजना ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब देशभर में कृषि लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों की शुद्ध आय पर दबाव बना हुआ है। गौरतलब है कि सौर ऊर्जा को अपनाने से न केवल आर्थिक बल्कि पर्यावरणीय लाभ भी मिलता है, क्योंकि डीजल पंपों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। आने वाले वर्षों में योजना का विस्तार और अधिक किसानों तक पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता बताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹400-500 मासिक बचत का आँकड़ा तब और अर्थपूर्ण होगा जब इसे राष्ट्रीय स्तर पर सत्यापित लाभार्थियों की संख्या और औसत सब्सिडी राशि के साथ जोड़कर देखा जाए। असली सवाल यह है कि योजना का लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक कितनी पहुँच बना पाई है, क्योंकि सोलर पंप की शेष लागत भी अनेक किसानों के लिए बड़ी रकम होती है। बिजली ग्रिड को अधिशेष बिजली बेचने की संभावना तभी साकार होगी जब राज्य वितरण कंपनियाँ समय पर भुगतान सुनिश्चित करें — जो अतीत में एक कमज़ोर कड़ी रही है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-कुसुम योजना क्या है और इसका लाभ किसे मिलता है?
पीएम-कुसुम यानी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान, केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने पर आर्थिक सहायता और सब्सिडी दी जाती है। इसका लाभ देशभर के कृषि भूमि धारक किसानों को मिलता है।
सोलर पंप लगाने से किसानों को कितनी बचत होती है?
हांसी के लाभार्थी किसान नरेश के अनुसार सोलर पंप लगने के बाद उन्हें हर महीने करीब ₹400 से ₹500 की बचत हो रही है। यह बचत बिजली बिल और डीजल खर्च दोनों में कमी के कारण होती है।
क्या किसान सोलर पंप से बिजली बेचकर भी कमाई कर सकते हैं?
हाँ, पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत किसान अपनी बंजर या खाली जमीन पर सोलर प्लांट स्थापित कर सकते हैं और उससे उत्पादित अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार सौर ऊर्जा सिंचाई के साथ-साथ आमदनी का अतिरिक्त स्रोत भी बन सकती है।
बिजली कटौती के दौरान सोलर पंप कैसे काम करता है?
सोलर पंप सूर्य के प्रकाश से सीधे ऊर्जा लेकर चलता है, इसलिए बिजली कटौती के दौरान भी धूप उपलब्ध रहने पर सिंचाई बाधित नहीं होती। किसान नरेंद्र के अनुसार धूप निकलते ही पंप स्वतः चालू हो जाता है और सूरज ढलने पर अपने आप बंद हो जाता है।
पीएम-कुसुम योजना के तहत सब्सिडी कैसे मिलती है?
इस योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ओर से निर्धारित प्रावधानों के अनुसार सोलर पंप स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। इच्छुक किसानों को राज्य की नोडल एजेंसी या कृषि विभाग से संपर्क कर आवेदन करना होता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 23 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले