पीएम-कुसुम योजना: हरियाणा के किसानों को सोलर पंप से सिंचाई लागत में बड़ी राहत
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत हांसी क्षेत्र के किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था से बिजली और डीजल की बढ़ती लागत से उल्लेखनीय राहत मिल रही है। केंद्र सरकार की इस योजना के अंतर्गत किसानों को सोलर पंप स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता और सब्सिडी दी जाती है, जिससे खेती की कुल लागत में कमी आ रही है।
पीएम-कुसुम योजना का उद्देश्य और लाभ
पीएम-कुसुम योजना का मूल लक्ष्य किसानों को सिंचाई के लिए स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा उपलब्ध कराना है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ओर से निर्धारित प्रावधानों के अनुसार सोलर पंप लगाने पर आर्थिक सहायता दी जाती है। इससे किसान बिजली कटौती या डीजल के बढ़ते दामों की परवाह किए बिना सिंचाई सुचारु रूप से कर पा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, योजना किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी देती है। किसान अपनी बंजर या खाली जमीन पर सोलर प्लांट स्थापित कर सकते हैं और उससे उत्पादित बिजली को ग्रिड में बेचकर आय अर्जित कर सकते हैं। इस प्रकार सौर ऊर्जा सिंचाई के साधन के साथ-साथ कमाई का अतिरिक्त स्रोत भी बन रही है।
किसानों के अनुभव
गढ़ी गाँव के लाभार्थी किसान नरेश ने बताया कि पहले खेतों की सिंचाई के लिए बिजली और डीजल पर भारी खर्च करना पड़ता था। उनके अनुसार, सोलर पंप लगने के बाद अब उन्हें हर महीने करीब ₹400 से ₹500 की बचत हो रही है और बिजली पर निर्भरता भी काफी कम हो गई है।
एक अन्य लाभार्थी किसान मुलायम सिंह ने बताया कि पहले बिजली के बिल और डीजल पर होने वाला खर्च अधिक होने से फसल से होने वाली बचत घट जाती थी। अब सोलर पंप से सिंचाई करने पर लागत में कमी आई है और खेती पहले की तुलना में अधिक किफायती हो गई है।
किसान नरेंद्र ने बताया कि सोलर पंप की सबसे बड़ी सुविधा यह है कि धूप निकलते ही पंप स्वतः चलने लगता है और सूरज ढलने के साथ अपने आप बंद हो जाता है। उन्होंने कहा कि इससे सिंचाई के लिए समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।
बिजली कटौती में भी राहत
किसानों का कहना है कि सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था उनके लिए विशेष रूप से तब उपयोगी साबित होती है जब बिजली कटौती होती है। धूप उपलब्ध रहने पर सोलर पंप से सिंचाई बाधित नहीं होती, जिससे फसल को नुकसान का खतरा कम होता है। डीजल पर होने वाला खर्च घटने से खेती की कुल लागत में भी सुधार आ रहा है।
दीर्घकालिक संभावनाएँ
किसानों के अनुसार, लंबे समय में यह व्यवस्था कृषि कार्यों को और अधिक किफायती बनाने में सहायक हो सकती है। यह योजना ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब देशभर में कृषि लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों की शुद्ध आय पर दबाव बना हुआ है। गौरतलब है कि सौर ऊर्जा को अपनाने से न केवल आर्थिक बल्कि पर्यावरणीय लाभ भी मिलता है, क्योंकि डीजल पंपों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। आने वाले वर्षों में योजना का विस्तार और अधिक किसानों तक पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता बताई जा रही है।