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पीएम-कुसुम योजना: हरियाणा के झज्जर में सोलर पंप से किसान को मिली सिंचाई की आज़ादी, 75% सब्सिडी का फायदा

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पीएम-कुसुम योजना: हरियाणा के झज्जर में सोलर पंप से किसान को मिली सिंचाई की आज़ादी, 75% सब्सिडी का फायदा

सारांश

झज्जर के खाजपुर गांव में पीएम-कुसुम योजना ने किसान परवीन कुमार की ज़िंदगी बदल दी। 75% सरकारी सब्सिडी पर लगे सोलर पंप ने बिजली के इंतजार का झंझट खत्म कर दिया — अब वे दिन में अपनी सुविधा से खेत और नर्सरी दोनों में सिंचाई करते हैं।

मुख्य बातें

पीएम-कुसुम योजना के तहत हरियाणा के झज्जर जिले के किसानों को सोलर पंप से सिंचाई में राहत मिली है।
किसान परवीन कुमार ने तीन एकड़ भूमि पर सोलर पंप स्थापित किया, जिससे खेती और नर्सरी दोनों में सुविधा हुई।
योजना के अंतर्गत सोलर पंप की लागत का 75% सरकारी सब्सिडी है; किसान को केवल 25% वहन करना होता है।
सोलर पंप से किसान अब दिन के समय अपनी इच्छानुसार सिंचाई कर सकते हैं, बिजली आपूर्ति पर निर्भरता समाप्त हुई।
नर्सरी संचालन में भी सोलर पंप से उल्लेखनीय सुविधा मिली है — रात को काम करने की बाध्यता खत्म हुई।

पीएम-कुसुम योजना (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) के तहत स्थापित सोलर पंपों ने हरियाणा के किसानों की सिंचाई-संबंधी परेशानियों को काफी हद तक कम किया है। झज्जर जिले के खाजपुर गांव के किसान परवीन कुमार इस योजना के लाभार्थियों में से एक हैं, जिनके अनुभव बताते हैं कि कैसे सरकारी सब्सिडी पर मिला सोलर पंप खेती और नर्सरी — दोनों कामों को सुगम बना रहा है।

किसान का अनुभव: बिजली की निर्भरता से मुक्ति

परवीन कुमार के पास तीन एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने बताया कि सोलर पंप लगने से पहले उन्हें सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति के अनिश्चित समय पर निर्भर रहना पड़ता था। उनके अनुसार, 'सोलर पंप के इतने फायदे हैं कि अब किसान को बिजली के बारे में सोचना भी नहीं पड़ता — कब लाइट आएगी, इसकी चिंता खत्म हो गई है।' अब वे दिन के किसी भी उचित समय पर अपनी आवश्यकतानुसार सिंचाई कर सकते हैं।

नर्सरी संचालन में भी सुविधा

परवीन कुमार एक छोटी नर्सरी भी चलाते हैं। उन्होंने बताया कि पहले नर्सरी में पानी देने के लिए भी बिजली आने का इंतजार करना पड़ता था, जिससे पौधों की देखभाल में व्यवधान आता था। सोलर पंप से अब वे दिन के समय अपनी सुविधा के अनुसार नर्सरी में पानी दे सकते हैं। उनके शब्दों में, 'रात का समय अपने आराम से रहो — सोलर पंप का यह सबसे बड़ा फायदा है।'

योजना की संरचना: किसान को देना होता है केवल 25%

पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत सोलर पंप की कुल लागत का 75 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी के रूप में दिया जाता है, जबकि लाभार्थी किसान को केवल 25 प्रतिशत राशि वहन करनी होती है। परवीन कुमार ने इसे किसानों के लिए एक व्यावहारिक और किफायती विकल्प बताया। यह योजना केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।

आम किसान पर असर

परवीन कुमार के अनुभव उन हज़ारों किसानों की स्थिति को प्रतिबिंबित करते हैं जो अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण सिंचाई में कठिनाई झेलते हैं। सोलर पंप से बिजली-निर्भरता घटने के साथ-साथ किसान कृषि के अतिरिक्त नर्सरी जैसे सहायक व्यवसाय भी बेहतर तरीके से चला पा रहे हैं। यह योजना ऐसे समय में राहत दे रही है जब हरियाणा सहित कई राज्यों में ग्रामीण बिजली आपूर्ति अभी भी अनिश्चित बनी रहती है।

आगे की राह

पीएम-कुसुम योजना के तहत देशभर में सोलर पंपों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। हरियाणा में इस योजना की सफलता की कहानियाँ अन्य किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रियान्वयन इसी गति से जारी रहा, तो कृषि क्षेत्र में बिजली पर निर्भरता उल्लेखनीय रूप से कम हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक व्यक्ति का अनुभव है — हरियाणा में कितने किसानों तक योजना वास्तव में पहुँची है, इसका व्यापक डेटा अभी सामने नहीं आया है। सब्सिडी का 75% हिस्सा आकर्षक है, परंतु छोटे और सीमांत किसानों के लिए शेष 25% की व्यवस्था करना भी चुनौती हो सकती है। असली सवाल यह है कि क्या यह योजना उन किसानों तक पहुँच रही है जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, या लाभ मुख्यतः उन्हीं तक सीमित है जो पहले से थोड़े संपन्न हैं।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-कुसुम योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
पीएम-कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को सोलर पंप और सौर ऊर्जा संयंत्रों के माध्यम से सस्ती एवं विश्वसनीय सिंचाई सुविधा प्रदान करना है। यह योजना कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देती है और किसानों की बिजली पर निर्भरता घटाती है।
पीएम-कुसुम योजना में किसान को कितनी सब्सिडी मिलती है?
योजना के अंतर्गत सोलर पंप की कुल लागत का 75 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। किसान को केवल 25 प्रतिशत राशि स्वयं वहन करनी होती है, जिससे यह छोटे किसानों के लिए भी सुलभ बनती है।
हरियाणा के किसानों को सोलर पंप से क्या फायदा हुआ है?
झज्जर जिले के किसान परवीन कुमार के अनुसार, सोलर पंप लगने से बिजली आपूर्ति पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो गई है। अब वे दिन के किसी भी समय अपनी सुविधा से खेत और नर्सरी में सिंचाई कर सकते हैं, जिससे कृषि उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता दोनों में सुधार आया है।
क्या पीएम-कुसुम योजना का लाभ नर्सरी जैसे सहायक कृषि कार्यों में भी मिलता है?
हाँ, खाजपुर गांव के किसान परवीन कुमार ने बताया कि सोलर पंप से उनकी नर्सरी के संचालन में भी बड़ी सुविधा हुई है। पहले बिजली न आने पर पौधों को समय पर पानी नहीं मिल पाता था, लेकिन अब वे दिन में अपनी ज़रूरत के अनुसार पानी दे सकते हैं।
पीएम-कुसुम योजना का लाभ कैसे उठाएँ?
इच्छुक किसान अपने राज्य की कृषि या ऊर्जा विभाग की वेबसाइट या नज़दीकी कृषि कार्यालय के माध्यम से पीएम-कुसुम योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। पात्रता और आवेदन प्रक्रिया राज्यवार भिन्न हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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