पीएम कुसुम योजना से जामताड़ा के किसान दामोदर सिंह की बदली जिंदगी, डीजल खर्च शून्य, आमदनी ₹1.5 लाख सालाना
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के जामताड़ा जिले के किसान दामोदर सिंह की खेती की तस्वीर प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत मिले सोलर पंप ने पूरी तरह बदल दी है। पहले जहाँ वे हर महीने ₹8,000 से ₹10,000 तक केवल डीजल पर खर्च करते थे, अब सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप की बदौलत सिंचाई का खर्च शून्य हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल में इस योजना ने देश के लाखों किसानों तक अपनी पहुँच बनाई है।
पहले क्या थी स्थिति
दामोदर सिंह के अनुसार, सोलर पंप मिलने से पहले खेतों की सिंचाई पूरी तरह डीजल पंप पर निर्भर थी। डीजल की बढ़ती कीमतें और बार-बार होने वाली बिजली कटौती खेती को महँगा और अनिश्चित बना देती थीं। इन चुनौतियों के चलते वे साल में केवल एक फसल ही उगा पाते थे।
सोलर पंप से क्या बदला
पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप मिलने के बाद दामोदर सिंह अब साल में तीन फसलें उगा रहे हैं। धान की खेती के साथ-साथ उन्होंने सब्जियों की खेती भी शुरू कर दी है। जरूरत के अनुसार कभी भी सिंचाई की सुविधा मिलने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनका कहना है, "सोलर पंप लगने के बाद अब उनकी खेती सिर्फ बारिश पर निर्भर नहीं रही।"
सब्सिडी और पारदर्शिता
दामोदर सिंह ने बताया कि योजना के तहत सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में पहुँची। इसके लिए उन्हें किसी दलाल या सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। यह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) का व्यावहारिक उदाहरण है, जिसे सरकार बड़े पैमाने पर लागू कर रही है।
आमदनी और जीवन स्तर में सुधार
अपने खेतों की सिंचाई के अलावा दामोदर सिंह अब आसपास के किसानों के खेतों में भी सिंचाई सेवा देकर अतिरिक्त आमदनी कमा रहे हैं। उनके अनुसार, अब उन्हें हर साल करीब ₹1.5 लाख की शुद्ध आय हो रही है। बढ़ी हुई आमदनी से उन्होंने नया घर बनवाया है और बच्चों को बेहतर स्कूल में पढ़ा रहे हैं।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि पीएम कुसुम योजना का लक्ष्य देशभर के किसानों को सस्ती और टिकाऊ सिंचाई सुविधा देना है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाती है जब डीजल की कीमतें लगातार ऊँची बनी हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति अभी भी अनियमित है। झारखंड जैसे राज्यों में, जहाँ कृषि पर आबादी की निर्भरता अधिक है, ऐसी योजनाओं का असर सीधे किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।