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पीएम कुसुम योजना से जामताड़ा के किसान दामोदर सिंह की बदली जिंदगी, डीजल खर्च शून्य, आमदनी ₹1.5 लाख सालाना

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पीएम कुसुम योजना से जामताड़ा के किसान दामोदर सिंह की बदली जिंदगी, डीजल खर्च शून्य, आमदनी ₹1.5 लाख सालाना

सारांश

डीजल पर हर महीने ₹8,000–₹10,000 खर्च करने वाले जामताड़ा के किसान दामोदर सिंह अब पीएम कुसुम योजना के सोलर पंप से मुफ्त सिंचाई कर रहे हैं। एक फसल से तीन फसलों तक का सफर और सालाना ₹1.5 लाख की आमदनी — यह एक योजना के ज़मीनी असर की कहानी है।

मुख्य बातें

दामोदर सिंह , जामताड़ा, झारखंड के किसान को पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप मिला।
पहले हर महीने ₹8,000–₹10,000 डीजल पर खर्च होते थे, अब सिंचाई खर्च शून्य ।
सोलर पंप मिलने के बाद फसल उत्पादन एक से बढ़कर तीन फसल प्रति वर्ष हो गया।
सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आई, किसी दलाल या दफ्तर के चक्कर नहीं।
अब सालाना करीब ₹1.5 लाख की शुद्ध आमदनी; नया घर बना, बच्चे बेहतर स्कूल में।

झारखंड के जामताड़ा जिले के किसान दामोदर सिंह की खेती की तस्वीर प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत मिले सोलर पंप ने पूरी तरह बदल दी है। पहले जहाँ वे हर महीने ₹8,000 से ₹10,000 तक केवल डीजल पर खर्च करते थे, अब सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप की बदौलत सिंचाई का खर्च शून्य हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल में इस योजना ने देश के लाखों किसानों तक अपनी पहुँच बनाई है।

पहले क्या थी स्थिति

दामोदर सिंह के अनुसार, सोलर पंप मिलने से पहले खेतों की सिंचाई पूरी तरह डीजल पंप पर निर्भर थी। डीजल की बढ़ती कीमतें और बार-बार होने वाली बिजली कटौती खेती को महँगा और अनिश्चित बना देती थीं। इन चुनौतियों के चलते वे साल में केवल एक फसल ही उगा पाते थे।

सोलर पंप से क्या बदला

पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप मिलने के बाद दामोदर सिंह अब साल में तीन फसलें उगा रहे हैं। धान की खेती के साथ-साथ उन्होंने सब्जियों की खेती भी शुरू कर दी है। जरूरत के अनुसार कभी भी सिंचाई की सुविधा मिलने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनका कहना है, "सोलर पंप लगने के बाद अब उनकी खेती सिर्फ बारिश पर निर्भर नहीं रही।"

सब्सिडी और पारदर्शिता

दामोदर सिंह ने बताया कि योजना के तहत सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में पहुँची। इसके लिए उन्हें किसी दलाल या सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। यह प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) का व्यावहारिक उदाहरण है, जिसे सरकार बड़े पैमाने पर लागू कर रही है।

आमदनी और जीवन स्तर में सुधार

अपने खेतों की सिंचाई के अलावा दामोदर सिंह अब आसपास के किसानों के खेतों में भी सिंचाई सेवा देकर अतिरिक्त आमदनी कमा रहे हैं। उनके अनुसार, अब उन्हें हर साल करीब ₹1.5 लाख की शुद्ध आय हो रही है। बढ़ी हुई आमदनी से उन्होंने नया घर बनवाया है और बच्चों को बेहतर स्कूल में पढ़ा रहे हैं।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि पीएम कुसुम योजना का लक्ष्य देशभर के किसानों को सस्ती और टिकाऊ सिंचाई सुविधा देना है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाती है जब डीजल की कीमतें लगातार ऊँची बनी हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति अभी भी अनियमित है। झारखंड जैसे राज्यों में, जहाँ कृषि पर आबादी की निर्भरता अधिक है, ऐसी योजनाओं का असर सीधे किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि फसल चक्र और आमदनी की पूरी संरचना बदल देना है। हालाँकि यह एक व्यक्तिगत अनुभव है और योजना की व्यापक पहुँच व क्रियान्वयन की गुणवत्ता राज्य-दर-राज्य भिन्न हो सकती है। असली सवाल यह है कि क्या झारखंड के बाकी जिलों में भी सब्सिडी वितरण उतना ही सुगम और पारदर्शी है जितना जामताड़ा में दामोदर सिंह को मिला — यही इस योजना की वास्तविक सफलता का पैमाना होगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम कुसुम योजना क्या है और किसानों को इससे क्या लाभ मिलता है?
पीएम कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) योजना के तहत किसानों को सब्सिडी पर सोलर पंप दिए जाते हैं, जिससे सिंचाई के लिए डीजल या बिजली पर निर्भरता खत्म होती है। जामताड़ा के दामोदर सिंह जैसे किसानों के लिए इसका मतलब है हर महीने ₹8,000–₹10,000 की बचत और साल में तीन फसलें उगाने की क्षमता।
पीएम कुसुम योजना की सब्सिडी कैसे मिलती है?
योजना के तहत सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी किसान के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के जरिए भेजी जाती है। दामोदर सिंह के अनुसार, उन्हें इसके लिए किसी दलाल या सरकारी दफ्तर का चक्कर नहीं लगाना पड़ा।
सोलर पंप मिलने के बाद झारखंड के किसान दामोदर सिंह की आमदनी कितनी बढ़ी?
दामोदर सिंह के अनुसार, सोलर पंप मिलने के बाद अब उन्हें सालाना करीब ₹1.5 लाख की शुद्ध आय हो रही है। इसमें अपने खेतों की उपज के साथ-साथ आसपास के किसानों के खेतों में सिंचाई सेवा देने से होने वाली अतिरिक्त कमाई भी शामिल है।
क्या पीएम कुसुम योजना से फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है?
जामताड़ा के दामोदर सिंह के अनुभव के अनुसार, सोलर पंप मिलने से पहले वे साल में केवल एक फसल उगा पाते थे। अब वे साल में तीन फसलें उगा रहे हैं — धान के साथ-साथ सब्जियों की खेती भी शुरू हो गई है।
पीएम मोदी के 12 साल के कार्यकाल में किसानों के लिए कौन-सी प्रमुख योजनाएँ आई हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल में पीएम कुसुम योजना (सोलर पंप), पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी कई योजनाएँ लागू की गई हैं। पीएम कुसुम योजना विशेष रूप से सिंचाई की लागत घटाने और किसानों को ऊर्जा-स्वतंत्र बनाने पर केंद्रित है।
राष्ट्र प्रेस
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