बुंदेलखंड में सोलर पंप योजना से किसानों को राहत: ₹20-30 हजार में मिला 90% सब्सिडी पर पंप, आय में सुधार
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक के गांव बितली के किसान अब सिंचाई की पुरानी चुनौतियों से मुक्त हो रहे हैं। प्रधानमंत्री सोलर पंप हाउस योजना के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर मिले सोलर पंपों ने बुंदेलखंड अंचल के किसानों की आर्थिक स्थिति और खेती की उत्पादकता दोनों में उल्लेखनीय सुधार किया है। 6 मई 2026 को राष्ट्र प्रेस से बातचीत में स्थानीय किसानों ने इस बदलाव का विस्तार से ब्यौरा दिया।
पुरानी मुश्किलें और नई उम्मीद
बुंदेलखंड में खेती हमेशा से अनिश्चित बिजली आपूर्ति और महंगे डीजल पंपों की दोहरी मार झेलती रही है। गांव बितली के किसान पंचम सिंह लोधी के अनुसार, बिजली कटौती इतनी गंभीर थी कि उन्हें अक्सर रात के दो बजे उठकर खेतों की सिंचाई करनी पड़ती थी। यदि समय पर नहीं उठ पाते, तो बिजली चली जाती और फसलें सूखने लगती थीं। इसके साथ ही डीजल पंप का बढ़ता खर्च खेती को घाटे का सौदा बना रहा था।
योजना से कैसे मिली राहत
पंचम सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री सोलर पंप हाउस योजना की जानकारी मिलते ही उन्होंने तुरंत आवेदन किया। योजना के अंतर्गत उन्हें 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर पंप उपलब्ध कराया गया, जिसमें उनकी जेब से केवल ₹20,000 से ₹30,000 का खर्च आया। सोलर पंप स्थापित होने के बाद अब उनके खेतों में दिनभर निर्बाध और मुफ्त सिंचाई संभव हो गई है। डीजल और बिजली पर होने वाला खर्च लगभग समाप्त हो गया है, जिससे उत्पादन लागत में भारी कमी आई है और फसलों की पैदावार में वृद्धि की उम्मीद जगी है।
दूसरे किसान का अनुभव
इसी गांव के किसान मुन्ना यादव ने बताया कि सोलर पंप से पहले उन्हें हर महीने करीब ₹10,000 तक का बिजली बिल चुकाना पड़ता था। अब यह खर्च पूरी तरह समाप्त हो गया है। मुन्ना यादव ने कहा कि वे न केवल स्वयं इस योजना से लाभान्वित हुए हैं, बल्कि आसपास के किसानों को भी इसके प्रति जागरूक करने में जुटे हैं। गौरतलब है कि बुंदेलखंड जैसे सूखा-प्रभावित क्षेत्रों में इस तरह की जागरूकता का प्रसार खेती के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आम किसानों पर असर
यह योजना ऐसे समय में आई है जब बुंदेलखंड के किसान जलवायु अनिश्चितता, अनियमित मानसून और बढ़ती इनपुट लागत की तिहरी चुनौती से जूझ रहे हैं। सोलर पंप जैसी सरकारी पहल न केवल सिंचाई को सुलभ बनाती है, बल्कि किसानों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर भी बनाती है। दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक में इस योजना के सकारात्मक परिणाम अन्य ब्लॉकों के लिए भी एक मॉडल बन सकते हैं।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का विस्तार बुंदेलखंड के अन्य जिलों तक भी किया जाए और आवेदन प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए, तो क्षेत्र के हजारों छोटे और सीमांत किसान इससे लाभ उठा सकते हैं। सोलर ऊर्जा आधारित सिंचाई न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि दीर्घकालिक रूप से खेती को एक टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय में बदलने की क्षमता भी रखती है।